मायावती शासन के स्मारक घोटाला में कारोबारी को झटका

  • HC की लखनऊ बेंच ने FIR को चुनौती देने वाली पत्थर सप्लायर की याचिका खारिज की, कहा- अभी क्लीनचिट नहीं मिलेगी
  • कोर्ट ने कहा इतने बड़े घोटाले में जांच पूरी होने तक किसी को क्लीनचिट नही मिल सकती

बसपा शासनकाल में हुए स्मारक और पार्क घोटाला मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पत्थर सप्लायर अंकुर अग्रवाल की याचिका खारिज कर दी है। याचिका में अंकुर ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा, यह सरकारी खजाने से 1410 करोड़ 50 लाख 63 हजार 200 रुपए के गबन का मामला है। यह नहीं कहा जा सकता कि याची के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है।

याचिकाकर्ता का दावा- उसे राजनीतिक कारणों से टारगेट किया जा रहा

यह आदेश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विकास कुंवर श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है। अंकुर अग्रवाल को स्मारक व पार्क के निर्माण के लिए गुलाबी पत्थर की सप्लाई का ठेका दिया गया था। वर्ष 2007 से 2011 के बीच पत्थरों की सप्लाई की गई। लेकिन सपा सरकार आने के बाद इन निर्माणों के संबध में लोकायुक्त को जांच भेज दी गई। वर्ष 2014 में लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में थाना गोमती नगर में आईपीसी की धारा 409 व 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) व 13(2) के तहत FIR दर्ज की गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे राजनीतिक कारणों से टारगेट किया जा रहा है।

मायावती शासन में लखनऊ नोएडा में स्मारक बनवाए गए थे।
मायावती शासन में लखनऊ नोएडा में स्मारक बनवाए गए थे।

राज्य सरकार के वकील ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान इस याचिका का राज्य सरकार की ओर से जोरदार विरोध किया गया। दलील दी गई कि मामले में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की संस्तुति दी जा चुकी है। ऐसे में वर्तमान याचिका पर कोई राहत नहीं दी जा सकती है।

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