किस काम का महिला आयोग ….. 15 मिनट में 10 फोन किए एक भी नहीं उठा, न कॉल बैक आई, एमपी की वेबसाइट ठप

आमतौर पर महिलाएं अपने प्रति होने वाले अपराध के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती हैं, अगर हिम्मत करके आवाज उठाई भी जाए तो सरकारी तंत्र की कमियों के चलते यह हिम्मत दम तोड़ देती है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 011- 26944880, 011- 26940148 पर कॉल उठती नहीं है और अगर उठ जाती है तो आवाज वहां तक नहीं पहुंचती। अगर लगातार फोन करने पर संपर्क हो भी गया तो 10 मिनट बाद कॉल करने की बात कहकर फोन रख दिया जाता है। यानी महिला अपराध उत्पीड़न और शोषण को रोकने के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।

हाल ही में बुल्ली बाई ऐप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें अपलोड करने के मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर तेजी से कार्रवाई करने के लिए कहा है। जब मुझे इसकी जानकारी हुई तो हाल ही में महिला आयोग को लेकर मुझे अपना अनुभव याद आ गया।

दरअसल, एक स्टोरी के सिलसिले में मुझे महिला आयोग की अध्यक्ष से बात करनी थी। आयोग की वेबसाइड पर दिए नंबरों पर सिलेसिलेवार कॉल करना शुरू किया, लेकिन एक भी कॉल रिसीव नहीं हुई। दसियों कॉल करने के बाद एक कॉल रिसीव हुई भी तो उधर से बिना मुझे सुने ही कह दिया गया कि 10 मिनट बाद कॉल कीजिएगा। 10 मिनट बाद फिर कई बार कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। उसके बाद मैंने वेबसाइट पर दिए सभी नंबरों पर वन वाई वन कॉल की, यह सोचकर शायद किसी पर तो बात होगी, लेकिन मैं गलत साबित हुई।

मुश्किल है शिकायत दर्ज कराना
करीब एक हफ्ते बाद सोमवार दोपहर मैंने राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत दर्ज कराने के लिए दिए गए लैंडलाइन नंबर 011- 26944880, 011- 26940148 डायल किए, लेकिन यहां पर भी कॉल पिक नहीं हो सकी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब एक जर्नलिस्ट का महिला आयोग से बात करना इतना मुश्किल है तो फिर किसी पीड़ित महिला को महिला आयोग से मदद कैसे मिलती होगी? क्या महिला आयोग महिलाओं के लिए वास्तव में मदद करता है या फिर महिलाओं के हक में सिर्फ नोटिस जारी कर रस्म अदा कर दी जाती है?

‘नोटिस जारी करने और एटीआर मांगने तक सीमित है आयोग’
इन सवालों के जवाब में सोशल साइट कोरा (Quora) पर लोगों की अलग-अलग राय है। एक यूजर का कहना है, ‘नहीं, वे (आयोग) केवल पीड़ितों की शिकायत दर्ज करते हैं और एटीआर मांगने के लिए पुलिस को मेल भेजते हैं। पुलिस उन्हें कोई भी एटीआर दे सकती है और शिकायत बंद हो जाएगी। बस उनकी यही भूमिका है। इसके अलावा उनके काम में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर टिप्पणी करना शामिल है।’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘मेरा जवाब नहीं है। अगर एनसीडब्ल्यू गंभीरता से काम कर रहा होता तो अब तक महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हो चुका होता।’

एक्टिव हैं यूपी में महिलाओं के मददगार
महिला आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं के अधिक सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में 15,828, दिल्ली में 3,336, महाराष्ट्र में 1,504, हरियाणा में 1,460 और बिहार में 1,456 हैं।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की साइट पर दिए गए टोल फ्री नंबर पर कॉल किया तो नहीं लगा। शिकायत दर्ज कराने के लिए दिए गए दूसरे नंबर पर पहली बार में ही कॉल रिसीव हो गई। कॉल पर बात करने वाले आयोग के सदस्य ने कहा, ‘मैडम, ट्रोल फ्री चालू। हो सकता अभी कोई सर्वर इश्यू हो। मैं चेक करवाता हूं। हर दिन 80 से 90 कॉल आती हैं। हम ज्यादातर शिकायतें फैक्स और व्हाट्सएप पर लिखित फॉर्मेट में लेते हैं।’

महिला अपराध उत्पीड़न और शोषण को रोकने के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर
महिला अपराध उत्पीड़न और शोषण को रोकने के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर

मप्र में वेबसाइट और महाराष्ट्र में हेल्पलाइन नहीं कर रही काम
मध्य प्रदेश में महिला आयोग की वेबसाइट काम नहीं कर रही है। वहीं, महाराष्ट्र महिला आयोग की हेल्पलाइन पर कॉल जाती है, तो पिक होती है मगर आवाज नहीं पहुंचती। बिहार में महिला आयोग की साइट पर सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 0612-2226368 है। वही नंबर हेल्प डेस्क कॉलम पर क्लिक करने पर लिखा आता है, दिस पेज करंटली अंडर कंस्ट्रक्शन। एनसीडब्ल्यू की वेबसाइट पर दिल्ली वुमन कमिशन की जगह दिल्ली सरकार की साइट का लिंक दिया गया है।

हैरानी की बात ये है कि राष्ट्रीय महिला आयोग, महाराष्ट्र, बिहार और राजधानी दिल्ली से किसी ने बैककॉल या फॉलोअप कॉल नहीं किया। केवल हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की ओर से बैककॉल किया गया।

इन राज्यों में नहीं है आयोग की वेबसाइट
आंध्र प्रदेश, गोवा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन-दीव और लक्षद्वीप में महिला आयोग की वेबसाइट नहीं है

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