3 हजार करोड़ का का मालिक कौन? 77 फॉर्म हाउस पर चलाया बुलडोजर ….

नोएडा प्राधिकरण ने 77 फॉर्म हाउस पर चलाया बुलडोजर; एक का भी ओनर नहीं मिला…

नोएडा प्राधिकरण के सर्वे में चौंकाने वाली जानकारी मिली है। डूब क्षेत्र में बने एक हजार फॉर्म हाउस अवैध हैं। हैरानी की बात ये है कि प्राधिकरण ने 77 फॉर्म हाउस पर बुलडोजर चलाया, लेकिन एक का भी ओनर सामने नहीं आया है। अब प्राधिकरण 3 हजार करोड़ के फॉर्म हाउस के मालिक को खोजने में लग गया है।

दरअसल, सेक्टर-150 स्थित तिलवाड़ा गांव में बना सैनिक फार्म हाउस बना हुआ था। प्राधिकरण के सर्वे में यह फार्म हाउस अवैध बना था। इसके बाद कार्यवाही का सिलसिला शुरू किया गया। एक जून को तिलवाड़ा में 1 लाख 20 हजार वर्गमीटर जमीन से 55 फार्म हाउस तोड़े गए। उसी दिन गांव गुलावली में 7 फार्म हाउस तोड़े गए। इसके बाद प्राधिकरण ने सर्वे शुरू किया।

असदुल्लापुर में 15 और अवैध फार्म काे तोड़ा
इस बीच 8 जून को प्राधिकरण ने दूसरी बड़ी कार्यवाही करते हुए असदुल्लापुर में 15 और अवैध फार्म हाउसों को तोड़ दिया। अभी तक इनका कोई भी मालिक सामने नहीं आया है। हैरानी की बात यह है कि प्राधिकरण तक को नहीं पता कि इनके ओनर कौन हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि जो भी रजिस्ट्री हुई, वह फर्जी नामों से की गई है।

नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्य अधिकारी प्रसून द्विवेदी ने बताया की अभी तक किए गए सर्वे में 1000 फार्म हाउस अवैध मिले इन पर कार्रवाई की जा रही है। इन फॉर्म हाउस के मालिक कौन है इसकी जानकारी नहीं है। जो अवैध फार्म हाउस तोड़े भी गए हैं उसको लेकर भी कोई भी सामने नहीं आया है।

नोएडा प्राधिकरण ने 77 अवैध फार्म हाउसों पर बुलडोजर चलवाकर गिरवा दिया।
नोएडा प्राधिकरण ने 77 अवैध फार्म हाउसों पर बुलडोजर चलवाकर गिरवा दिया।

सिंचाई विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी
प्राधिकरण ने जो सर्वे किया है, उसके अनुसार एक हजार फार्म हाउस अवैध बताए गए। इनकी कीमत करीब 3 हजार करोड़ या इससे कुछ कम हो सकती है। इनके मालिक कौन हैं, वे भी लापता हैं। जबकि यहां 2 हजार से ज्यादा फार्म हाउस बने हुए हैं।

इनको गिराने की कार्रवाई के बाद भी कोई भी फार्म हाउस मालिक प्राधिकरण नहीं पहुंचा है। प्राधिकरण ने बताया कि डूब क्षेत्र की जमीन पर पक्का निर्माण नहीं हो सकता। हम सिर्फ पक्का निर्माण तोड़ने जाते हैं। जमीन सिंचाई विभाग की है। निगरानी का काम भी उनका ही है।

क्या है डूब क्षेत्र?
दरअसल, 1976 में 36 गांवों को मिलाकर नोएडा को बनाया गया। 2031 मास्टर प्लान के अनुसार इसका क्षेत्र बढ़ाकर 20 हजार 2016 हेक्टेयर किया गया। ये पहला ऐसा शहर है। जिसमें करीब 5 हजार 36 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र यानी यमुना और हिंडन का रिवर बैंड है आ रही है। यानी वह जमीन जहां तक यमुना नदी के बाढ़ का पानी आया है।

इस जमीन पर सिर्फ खेती की जा सकती है न की पक्का निर्माण। एनजीटी के भी यही आदेश है। यहां किसानों से भू माफियाओं ने सस्ती कीमतों पर जमीन खरीदी और लोगों को फार्म हाउस के नाम पर जमीन मोटे सौदे में बेच दी। उन्होंने मुनाफा कमाया। इन भू माफियाओं का फायदा राजनेता बड़े अधिकारियों ने भी उठाया। जिन्होंने जमकर यहां फार्म हाउस बनाए और अब जब प्राधिकरण का बुलडोजर चला तो वे सामने तक नहीं आ रहे।

2012 में कराया गया था सर्वे
इस जमीन की निगरानी सिंचाईं विभाग को करनी थी और ये जमीन नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित क्षेत्र में आती है। जिसका काम था यहां किसी प्रकार का निर्माण न हो। लेकिन ऐसा ही हुआ नहीं। यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और फार्म हाउस काटे गए।

पहली बार 2012 में शासन की ओर से एक डूब क्षेत्र का एक सर्वे कराया गया। जिसकी मॉनिटरिंग सीधे सीएम के हाथ में थी। इसमें तहसील स्तर पर टीमें बनाई गई और सर्वे किया गया। दोनों ही क्षेत्र में करीब 1000 फार्म हाउस का निर्माण अवैध रूप से किया गया। से रिपोर्ट शासन को भेज दी गई और आर्डर का इंतजार हुआ। लेकिन आर्डर नहीं आए। खनापूर्ती के लिए समय समय पर डूब क्षेत्र में कार्यवाही की गई और कुछ फार्म हाउसों को तोड़कर इतिश्री कर लिया गया।

ऑनलाइन भी बुक होते हैं ये फॉर्म हाउस
इन फार्म हाउसों को देखकर ऐसा कतई नहीं कहा जा सकता कि ये छोटे या आम आदमी के हो सकते हैं। तोड़े गए फार्म हाउसों और बने अवैध फार्म हाउसों में माड्यूलर किचन, बार, पार्टी लॉन्ज, स्वीमिंग पूल के अलावा लग्जरी लाइफ के वह सभी सुख-सुविधा है। पार्टी के नाम बुकिंग के बोर्ड और ऑनलाइन बुकिंग तक होती है। इसके अलावा हाईटेक डेकोरेशन इनकी सुंदरता को बढ़ाता है।

इन फार्म हाउसों को बुक कर यहां पार्टियां की जाती हैं।
इन फार्म हाउसों को बुक कर यहां पार्टियां की जाती हैं।

अफवाह या हकीकत इसे समझना होगा
यमुना डूब क्षेत्र में नोएडा प्राधिकरण, प्रशासन, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के शीर्ष से लेकर निम्न अधिकारियों तक के फार्म हाउस हैं। जिसमें पक्का निर्माण कराकर कॉमर्शियल गतिविधियां की जा रही हैं। जब भी प्राधिकरण कोई फार्म हाउस तोड़ता है तो ये समझ में आता है कि इसमें किसी बड़े अधिकारी या राजनेता का पैसा लगा है।

जारी की गई सार्वजनिक सूचना
हैरानी यह भी है कि प्राधिकरण बड़े फार्म हाउसों पर नोटिस जारी नहीं कर रहा। बल्कि एक सार्वजनिक सूचना निकालकर इनको खुद तोड़ने के लिए कह रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही नोटिस जारी किया जाएगा, ये लोग कोर्ट का रुख करेंगे और उस पर स्टे ले लेंगे।

प्राधिकरण ने सार्वजनिक सूचना पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि लोग अपने अवैध फार्म हाउस खुद तोड़ लें।
प्राधिकरण ने सार्वजनिक सूचना पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि लोग अपने अवैध फार्म हाउस खुद तोड़ लें।

गुपचुप तरीके से लगाई रोक
डूब क्षेत्र में बढ़ती अवैध फार्म हाउस की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने गुपचुप तरीके से रजिस्टर्ड GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) पर रोक लगा दी है। अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण की NOC के बाद ही डूब क्षेत्र की जमीन को खरीदने या बेचने के लिए रजिस्टर्ड GPA भी हो सकेगा। निबंधन विभाग में डूब क्षेत्र में आने वाले गांव की जमीन पर वर्ष 2020 से रजिस्ट्री प्रतिबंधित है। यह रोक जिला आपदा प्रबंधन कमेटी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने लगाई है।

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