NDA में 100 फार्म हाउस मालिकों की आई आपत्ति …?

प्राधिकरण को जवाब देने में लगेंगे एक महीने, कोर्ट से लेगा समय…

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर फार्म हाउस के 100 मालिकों ने प्राधिकरण में आपत्ति दर्ज कराई है। प्राधिकरण में आपत्ति आने से इसे बेचने वाले का नाम भी सामने आएगा। इन आपत्तियों में वे नहीं आए, जिनके फार्म हाउस को गिरा दिया गया। इनकी संख्या 124 के करीब है। अपत्ति दर्ज कराने वालों की सूची तैयार की जा रही है, जिससे इनको जवाब दिया जा सके।

प्राधिकरण ने सर्वे में यमुना के डूब क्षेत्र में1 हजार फार्म हाउस को अवैध माना था। इनको तोड़ने के लिए 8 जून को एक सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया गया था। जिसके बाद फार्म हाउस संचालकों ने एक एसोसिएशन के नाम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

डूब क्षेत्र में लगा प्राधिकरण का चेतावनी बोर्ड।
डूब क्षेत्र में लगा प्राधिकरण का चेतावनी बोर्ड।

हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को 10 दिन का दिया समय
कोर्ट ने फार्म हाउस संचालकों को आपत्तियां देने और प्राधिकरण को जवाब देने के लिए 10-10 दिन का समय दिया था। ऐसे में आपत्तियां आ गई हैं। प्राधिकरण ने बताया कि इनका जवाब देने में 10 दिन का समय काफी कम है।

ऐसे में कोर्ट में समय एक्सटेंशन के लिए याचिका दायर की जाएगी। इन जवाब देने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा।अधिकारियों ने ये स्पष्ट नहीं किया कि इस दौरान कार्रवाई चलेगी या रुकी रहेगी।

रजिस्ट्री तक के कागज किए सबमिट
जिन फार्म हाउस संचालकों ने एसोसिएशन के जरिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने रजिस्ट्री के कागज तक लगाए हैं। प्राधिकरण ने बताया कि यमुना का डूब क्षेत्र प्राधिकरण अधिसूचित क्षेत्र में है। यहां बिना प्राधिकरण के एनओसी जारी किए, निर्माण नहीं किया जा सकता है। ऐसे जो भी रजिस्ट्री हुई वे या तो सदर या दादरी से कराई गई है। इनको भी देखा जा रहा है।

यमुना के डूब क्षेत्र में बने फार्म हाउस
यमुना के डूब क्षेत्र में बने फार्म हाउस

डूब क्षेत्र में बनी है RWA
चौंकाने वाली बात ये है कि यहां ऐसे पक्के निर्माण में जहां 100 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। इनकी अपनी एक रजिस्टर्ड RWA भी है। इनके कुछ लोग भी कोर्ट गए। आपत्तियों में इसका जिक्र भी किया गया है।

इन आपत्तियों का देना है जवाब

  • फार्म हाउस मालिकों ने दावा किया कि 2011 के बाद वाले फार्म हाउस ढांचे को ध्वस्त करने का प्राधिकरण के पास कोई अधिकार नहीं है। ये निर्माण अवैध नहीं हैं।
  • जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय द्वारा जारी 2016 की एक अधिसूचना का हवाला दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि निर्माण केवल “सक्रिय” बाढ़ वाले क्षेत्रों तक प्रतिबंधित हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2011 के एक आदेश का हवाला दिया गया। इलाहाबाद शहर में गंगा नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) के 500 मीटर के भीतर निर्माण को मना किया गया था।
  • याचिकाकर्ताओं ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि नंगला नंगली और आसपास के गांव, जहां सबसे अधिक संख्या में फार्म हाउस बनाए गए हैं। उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत अधिसूचित नहीं हैं।
  • संबंधित क्षेत्र मास्टर प्लान 2021 का हिस्सा नहीं था। मास्टर प्लान 2031 में इस क्षेत्र को पहली बार रिवरफ्रंट विकास क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। मास्टर प्लान में संशोधन के लिए राज्य सरकार को कई अभ्यावेदन दिए गए हैं।

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