सफलता की कहानी …? 16000 सदस्य वाले तीन संगठनों पर IIM का शोध,ग्रामीण महिलाओं का श्रम ही उनकी ताकत; पूंजी मिल जाए तो कारोबार को ऊंचाई पर पहुंचा देंगी

  • छात्रों को इस केस स्टडी से सिखाएंगे कि किस तरह पारंपरिक सीमाओं को समझते हुए सफल व्यापार कर सकते हैं
  • उन्हें आर्थिक मजबूती और स्थिरता की ज्यादा जरूरत होती है, बजाय ख्याति या महत्वाकांक्षा की

ग्रामीण महिलाओं का परिश्रम ही उनकी ताकत है। यदि उन्हें पूंजी और सामग्री दी जाए तो वे अपने परिश्रम से श्रेष्ठतम उत्पाद तैयार कर सकती हैं। महिलाओं को सामूहिक रूप से एकत्रित करने के लिए और उन्हें बढ़ावा देने के लिए उनकी सहज क्षमताओं को पहचान कर आगे बढ़ाना और उनके प्रयासों को प्रभावी रूप से बाजार तक ले जाना जरूरी है। उन्हें आर्थिक मजबूती और स्थिरता की ज्यादा जरूरत होती है, बजाय ख्याति या महत्वाकांक्षा की।

आईआईएम इंदौर ने यह निष्कर्ष देश में 16000 सदस्य वाले 3 संगठनों पर शोध के बाद निकाला है। प्रो. भवानी शंकर सरिपल्ली, विनय सिंह चवान और श्रीनिवास गुंता का यह शोध अब आईआईएम में छात्रों को यह सिखाने में मदद करेगा कि ग्रामीण महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार एवं उद्योग खड़ा करने के लिए आखिर किन चीजों की जरूरत होती है। प्रमुख शोधकर्ता प्रो. सरिपल्ली कहते हैं छात्रों को इस केस स्टडी के माध्यम से यह भी सिखाना चाहते हैं कि किस तरह पारंपरिक और रूढ़िवादी सीमाओं को समझते हुए व्यापार चलाया जा सकता है।

तीन संगठन, जो सिर्फ महिलाओं को खुद से जोड़ रहे, उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे

मध्यप्रदेश वीमेन पोल्ट्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड में 6500 महिलाएं जुड़ी हैं। सभी पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़ी हैं। कंपनी का मुख्यालय भोपाल में है। इसी तरह आंध्रप्रदेश की डेरी मुल्कानूर में 5000 महिलाएं जुड़ी हैं। दूध और डेरी उत्पाद बनाकर खुद को सक्षम बनाने का काम कर रही हैं। लिज्जत पापड़ में 4500 महिलाएं जुड़ी हैं। ये तीनों संस्थाएं महिलाओं द्वारा ही संचालित की जाती हैं, जिनमें सभी सदस्य महिलाएं ही हैं। सभी संस्थाओं ने अपने बूते सफल व्यापार खड़ा किया है और पिछले कई सालों से मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।

महिलाओं को हर साल देते हैं 10 ग्राम सोना

लिज्जत पापड़ द्वारा शुरुआती दौर में संस्था से जुड़ी सभी महिलाओं को साल में एक बार 10 ग्राम सोना दिया जाता था। अब महिलाओं के खुद के नाम से बैंक के खाते बनाए गए, जिनसे महिलाएं खुद पैसे निकालकर खर्च करती हैं।

बैंक ने मदद नहीं की, कोविड के बावजूद 3 गुना मुनाफा

मध्यप्रदेश की मुर्गी पालन करने वाली संस्था को जब अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए धन की जरूरत थी, तब किसी बैंक ने उनकी सहायता नहीं की, क्योंकि उनके व्यवसाय को अस्थिर माना गया। उन्होंने कठिनाइयों के साथ खुद के व्यापार के लिए राशि जुटाई और अपना काम स्थापित किया। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में 97.53 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया। 8.95 लाख का मुनाफा दर्ज किया है।

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