इंदौर में स्वच्छ पानी के लिए 2450 करोड़ रुपये, फिर भी दूषित पानी से हुईं 21 मौतें !!
इंदौर में स्वच्छ पानी के लिए आवंटित किए गए 2450 करोड़ रुपये, फिर भी दूषित पानी से हुईं 20 मौतें
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर, जो लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है, अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में नगर निगम की पाइपलाइनों से मिले दूषित पेयजल के कारण कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं।

- पिछले पांच वर्षों में इंदौर नगर निगम ने जल आपूर्ति और स्वच्छता पर भारी खर्च किया है
- नगर निगम बजट 5,135 करोड़ से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर, जो लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है, अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में नगर निगम की पाइपलाइनों से मिले दूषित पेयजल के कारण कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं।
यह संकट दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ और जनवरी 2026 में चरम पर पहुंच गया, जहां उल्टी-दस्त, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां फैलीं। कई मरीज अभी भी आईसीयू में जीवन-मरण की स्थिति में हैं।
भारी निवेश के बावजूद विफलता
पिछले पांच वर्षों में इंदौर नगर निगम ने जल आपूर्ति और स्वच्छता पर भारी खर्च किया है। नगर निगम का वार्षिक बजट का 25-30% हिस्सा इसी क्षेत्र पर जाता है:
- 2021-22 में जल-संबंधी खर्च: 1,680 करोड़ रुपये
- 2025-26 में प्रस्तावित: 2,450 करोड़ रुपये
इसके अलावा, कुल नगर निगम बजट 5,135 करोड़ से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। अमृत योजना, स्मार्ट सिटी मिशन और एशियाई विकास बैंक जैसी परियोजनाओं के तहत भी हजारों करोड़ का निवेश हुआ, ताकि 24 घंटे सुरक्षित पानी उपलब्ध हो सके।
29 दिसंबर 2025 से ही भागीरथपुरा में अफरा-तफरी मची हुई है। नगर निगम के वाहन लगातार घोषणा कर रहे हैं कि पानी उबालकर और छानकर पिएं। टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति हो रही है, राशन किट बांटी जा रही हैं, और नालियों की मरम्मत का काम चल रहा है। लेकिन इससे सड़कें खोदने के कारण यातायात और छोटे व्यवसाय प्रभावित हैं। लोग अब बोरवेल और आरओ पानी को भी उबालने पर मजबूर हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इसे “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” करार दिया है और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। मांग है कि स्रोत से वितरण तक पूरी व्यवस्था सुधारी जाए।
भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की याचिका दायर की है। याचिका में पिछले दो साल से दूषित पानी की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न करने का आरोप है। मांग है कि जांच पूरी होने तक अफसरों को हटाया जाए।

