प्रोफेसर कॉलोनी के रीडेंसिफिकेशन का डिटेल प्लान ….

मंत्री-अफसरों के बंगले तोड़कर बनेगा नया कलेक्टोरेट; मेट्रो ऑफिस और हैबिटेट सेंटर के साथ छोटे तालाब पर नया ब्रिज भी ?

नए और पुराने शहर के बीच बसी प्रोफेसर कॉलोनी के रीडेंसिफिकेशन का पूरा प्लान तैयार हो चुका है। यहां कुछ पुराने बंगलों को तोड़कर नया कलेक्टोरेट और कंपोजिट ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। एक हैबिटेट सेंटर और स्टेट गेस्ट हाउस भी बनेगा। ट्रैफिक के संभावित दबाव को देखते हुए छोटे तालाब पर एक नया ब्रिज भी बनाया जाएगा। पूरे इलाके में कुछ नई सड़कें भी बनेंगी। कुल मिलाकर इस पूरे क्षेत्र का नक्शा बदलने वाला है।

इस डेवलपमेंट से छोटे तालाब के आसपास खूबसूरती और सुविधाएं भी बढ़ेंगी। यहां 2 होटल बनाए जाने हैं, जिसमें से एक लेक फेसिंग होगा। कुल मिलाकर सीएम हाउस से लेकर राज भवन और मिंटो हॉल तक के इस एरिया में ऐसी सुविधाएं डेवलप होंगी, जहां इंडस्ट्रियल मीट जैसे बड़े आयोजन भी आसानी से हो सकेंगे। शहर के लगातार बढ़ने के कारण लालघाटी के पास बने कलेक्टोरेट परिसर जाना आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। लंबे समय से इसकी शिफ्टिंग पर विचार हो रहा है।

पहले विध्वंस- सर्किट हाउस और प्रोफेसर कॉलोनी में बने पुराने सरकारी बंगले तोड़े जाएंगे

फिर सड़क निर्माण- कॉलोनी के भीतरी इलाकों में 12 मीटर और 18 मीटर की नई सड़कें बनाई जाएंगी

और फिर गलती सुधार- पॉलिटेक्निक चौराहे से किलोल पार्क तक बीआरटीएस हटाकर जंक्शन सुधारे जाएंगे

ऐसा होगा रीडेंसीफिकेशन

अब लगभग तय हो गया है कि नया कलेक्टोरेट प्रोफेसर कॉलोनी में ही आएगा। हाउसिंग बोर्ड ने इसके लिए एक रीडेंसीफिकेशन प्लान बनाया है। इस पर जिला प्रशासन ने सहमति जता दी है।

सब-वे से जुड़ेगा रवींद्र भवन और हैबिटेट सेंटर, पार्किंग सुधरेगी

सर्किट हाउस व प्रोफेसर कॉलोनी में मंत्री-अफसरों के बंगले तोड़कर होने वाले इस री-डेवलपमेंट में रवींद्र भवन के पास हैबिटेट सेंटर बनेगा। दोनों को प्रोफेसर कॉलोनी वाले एरिया से सब वे से जोड़ेंगे। यहां एक दो फ्लोर की पार्किंग बनेगी। इससे रवींद्र भवन, गांधी भवन, हिंदी भवन से यहां होने वाली पार्किंग समस्या भी ठीक हो जाएगी। पूरा प्लान ऐसा बनाया है कि यहां हरियाली को नुकसान न पहुंचे।

पॉलिटेक्निक की ज्योमेट्री सुधारेंगे

छोटे तालाब पर 24 मीटर चौड़ा ब्रिज बनेगा और इसकी एप्रोच रोड पॉलिटेक्निक चौराहे से मिलेगी। यहां पूरी ज्योमेट्री को सुधारा जाएगा। प्रोफेसर कॉलोनी के अंदर वाले इलाके में 12 और 18 मीटर की नई सड़कें बनेंगी। पॉलिटेक्निक चौराहे से लेकर किलोल पार्क तक बीआरटी कॉरिडोर को हटाकर जंक्शन सुधारे जाएंगे।

2005 से चल रहा सिलसिला- 8 बार चुनी जा चुकी है नए कलेक्टोरेट के लिए जगहजानिए… कहां, क्यों अटक गए प्लान

1. अरेरा हिल पर नर्मदा भवन में – साल 2005 में कलेक्टोरेट शिफ्टिंग का प्लान बनाया, पर राज्य शासन ने मंजूरी नहीं दी।

2. बेनजीर पैलेस की जमीन पर- साल 2007 में मोतिया तालाब के पास पुराने बेनजीर साइंस कॉलेज की खाली जमीन व बेनजीर पैलेस को तोड़कर नया कलेक्टोरेट बनाने का प्रस्ताव बनाया। लेकिन, राज्य पुरातत्व संचालनालय ने आपत्ति कर दी।

3. अरेरा पहाड़ी पर पुरानी जेल के सामने- साल 2008 में यहां की खाली जमीन पर कलेक्टोरेट बनाने का प्रस्ताव बना, लेकिन यहां हरियाली उजड़ जाने की आशंका पर मंजूरी नहीं मिली।

4. जवाहर चौक – 2010 में 12-दफ्तर इलाके में कम्पोजिट कॉम्पलेक्स निर्माण का प्रस्ताव बना, लेकिन पुराने शहर के लोगों के विरोध से इस पर अमल नहीं हो सका।

5. पुरानी जेल की जमीन पर- 2012 में अरेरा हिल पर पुरानी जेल को तोड़कर प्रशासनिक संकुल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन गृह विभाग ने इसकी मंजूरी नहीं दी।

6. नेवरी में – 2014 में नेवरी में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर कलेक्टोरेट बनाने की योजना बनाई। लेकिन, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यह स्थान एयर ट्रैफिक के रास्ते में होने के कारण 8 मीटर से ज्यादा ऊंचाई का निर्माण किए जाने की मंजूरी नहीं दी।

7. कोहेफिजा में – 2015 में कोहेफिजा स्थित शिरीन बंगला, कॉटेज नंबर-5 और कॉटेज नंबर-10 को तोड़कर खाली होने वाली 4.5 एकड़ जमीन पर कलेक्टोरेट निर्माण का प्रस्ताव बनाया। कॉटेज नंबर-5 में अभी एसडीएम बैरागढ़ का कार्यालय है। इस प्रस्ताव को भी शासन ने मंजूरी नहीं दी।

8. मौजूदा पुराना सचिवालय को तोड़कर: 2017 में तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवड़े ने मौजूदा कलेक्टोरेट में ही एक बड़ा प्रशासनिक संकुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया, लेकिन खींचतान में इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

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