क्या होगा मोदी 3.0 का स्ट्रक्चर: JDU-TDP के कितने मंत्री बनेंगे ?

क्या होगा मोदी 3.0 का स्ट्रक्चर: JDU-TDP के कितने मंत्री बनेंगे; 6 पॉइंट्स में पूरी तस्वीर
नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की मीटिंग में पहुंचकर चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ने सरकार गठन की तस्वीर को लगभग साफ कर दिया है. एनडीए की यह मीटिंग नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास पर हुई है.

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद 3 बात की चर्चाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं. 1. सरकार किसकी बनेगी? 2. कैबिनेट का स्ट्रक्चर क्या होगा और 3. नई सरकार में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू का रोल क्या होगा?

नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की मीटिंग में पहुंचकर चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ने सरकार गठन की तस्वीर को लगभग साफ कर दिया है. एनडीए की यह मीटिंग नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास पर हुई है.

हालांकि, सरकार गठन को लेकर 2 तस्वीर अभी भी उलझी हुई है. इस स्पेशल स्टोरी में इन्हीं उलझी गुत्थियों को 6 सवाल और उसके जवाब के जरिए विस्तार से समझते हैं.

1. कैबिनेट का फॉर्मूला क्या हो सकता है?
2014 और 2019 में बीजेपी खुद के बदौलत सरकार में आई थी. पार्टी ने तब अपने सहयोगियों को सांकेतिक हिस्सेदारी देने का फैसला किया था. उस वक्त जेडीयू ने इसका खुलकर विरोध किया था और संख्या के हिसाब से हिस्सेदारी की मांग की थी. हालांकि, बीजेपी ने संख्या के आधार पर हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया था. 

इस बार सिनेरियो पूरी तरह से बदल गया है. बीजेपी बहुमत से 33 कदम दूर है और सरकार बनाने के लिए एनडीए के सहयोगियों पर निर्भर है. ऐसे में इस बार कैबिनेट गठन का नया फॉर्मूला बन सकता है. 

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक पार्टी की कोशिश इस बार कैबिनेट विस्तार में इस फॉर्मूले को लागू कराने की होगी. संख्या के आधार पर अगर फॉर्मूला तय होता है, तो कैबिनेट में 3.6 सांसद पर एक मंत्री बनाया जा सकता है. 

यह फॉर्मूला इस प्रकार है- X/M= मंत्रिपरिषद की तस्वीर

यहां X का मतलब एनडीए के कुल सांसद

M का मतलब कैबिनेट में कुल पद हैं.

एनडीए के कुल सांसद/कैबिनेट में कुल पद (एनडीए के पास 296 सांसद है, जबकि कैबिनेट में 81 पद है)

जेडीयू के एक सांसद नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं- अटल बिहारी वाजपेई की जब 1999 में सरकार बनी थी, तब भी एनडीए को 296 सीट ही मिला था. इस बार भी आंकड़ा इसी के आसपास है. 

अटल बिहारी की सरकार में कुल 72 मंत्री बनाए गए थे, जिसमें से 17 मंत्री सहयोगी दलों के थे. अटल सरकार में बीजेपी कोटे से 55 मंत्री बनाए गए थे. हालांकि, उस वक्त बीजेपी को सिर्फ 182 सीटों पर जीत मिली थी.

2. जेडीयू और टीडीपी की भूमिका क्या होगी?
एनडीए में टीडीपी दूसरे नंबर की जबकि जेडीयू तीसरे नंबर की पार्टी है. दोनों दलों के पास जो संख्या है, उस पर ही सरकार की नींव टिकी है. दोनों दलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों एनडीए के साथ ही है.

सरकार गठन तक दोनों साथ रहते हैं तो कैबिनेट में जेडीयू-टीडीपी का दबदबा दिख सकता है.

जेडीयू को 3-4 मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि टीडीपी भी संख्या के आधार पर 5-6 मंत्री पद ले सकती है. दोनों दलों को बड़े विभाग भी दिए जा सकते हैं. अटल बिहारी की सरकार में जॉर्ज फर्नांडिज को रक्षा जैसे अहम विभाग सौंपे गए थे. 

नीतीश कुमार को उस सरकार में रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी. इसी तरह टीडीपी को भी टॉप-5 में से कोई एक विभाग दिया जा सकता है. 

इसके अलावा शिवसेना (शिंदे) के 7 सांसद लोकसभा के लिए चुने गए हैं. शिवसेना को भी 2 मंत्री पद मिल सकता है. 2014 और 2019 में शिवसेना (संयुक्त) को एक मंत्री पद मिला था. सरकार में पार्टी को भारी उद्योग मंत्रालय का विभाग दिया गया था. 

3. सरकार में छोटे दलों का भी एडजस्टमेंट होगा?
एनडीए में शामिल लोजपा (आर) को 5  जबकि आरएलडी, जेडीएस और जनसेना पार्टी को 2-2 सीटें मिली हैं. कैबिनेट में इन दलों को भी तवज्जों मिल सकती है.

इसके अलावा एनसीपी, अपना दल, हम (से), आजसू, यूपीपीएल और एजीपी को 1-1 सीटें मिली हैं. 2014 और 2019 में 1-1 सीट जीतने वाली पार्टियों को सरकार में शामिल नहीं किया गया था. 

हालांकि, इस बार की तस्वीर बिल्कुल अलग है. ऐसे में हो सकता है इन पार्टियों को सरकार में शामिल कर लिया जाए.

4. सरकार में बीजेपी कोटे से कितने मंत्री बनेंगे?
सरकार गठन को लेकर कोई आधिकारिक फॉर्मूला अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन कैबिनेट को लेकर जो फॉर्मूला सामने आ रहा है. अगर वो लागू होता है, तो सरकार में बीजेपी के 60-65 मंत्री बनाए जा सकते हैं.

हालांकि, यह सब कुछ कैबिनेट के स्ट्रैंथ पर निर्भर करेगा. 2014 में मोदी ने 45 मंत्रियों और 2019 में 54 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी. केंद्रीय कैबिनेट में प्रधानमंत्री समेत 81 मंत्री हो सकते हैं.

5. स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद का क्या होगा?
2014 और 2019 में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में थी. दोनों बार पार्टी ने अपने ही कोटे से स्पीकर बनवाए. हालांकि, इस बार गठबंधन की सरकार में है. 

अटल बिहारी के वक्त स्पीकर का पद टीडीपी और शिवसेना को मिला था. टीडीपी की तरफ से जीएमली बालयोगी और शिवेसना की तरफ से मनोहर जोशी स्पीकर बने थे.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने टीडीपी के उच्च सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट की है. इसके मुताबिक टीडीपी ने पिछली बार की तरह ही इस बार भी स्पीकर कुर्सी की मांग की है.

हालांकि, अब तक इसको लेकर न तो बीजेपी और न ही टीडीपी ने कोई बयान दिया है.

6. सरकार में बीजेपी के भीतर भी कुछ बदलेगा?
बीजेपी को बड़े विभाग अगर सहयोगी दलों को देना पड़ता है, तो टॉप-लेवल पर इसका असर पड़ सकता है. केंद्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा वित्त, विदेश, गृह, रक्षा और परिवहन को बड़ा विभाग माना जाता है.

इसके अलावा बीजेपी के 19 मंत्री इस बार चुनाव हार गए हैं. इनमें स्मृति ईरानी, अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे जैसे बड़े नाम शामिल हैं. ऐसे में इनके बदले नए चेहरे को तरजीह मिल सकती है. 

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