रेखा गुप्ता सरकार को दिल्ली में किन चुनौतियों से निपटना होगा?

रेखा गुप्ता सरकार को दिल्ली में किन चुनौतियों से निपटना होगा? 
27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में आई इस पार्टी के सामने क्या चुनौतियां हैं? इस चुनाव में हारे आप के दिग्गजों का क्या भविष्य होगा यह भी बड़ा सवाल है? इसी तरह के सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई।

बीते हफ्ते दिल्ली में नई सरकार का गठन हो गया। भाजपा ने जीत के बाद एक महिला को दिल्ली को कमान सौंपी है। 27 साल बाद सत्ता में आई इस पार्टी के सामने क्या चुनौतियां हैं? इस चुनाव में हारे आप के दिग्गजों का क्या भविष्य होगा यह भी बड़ा सवाल है? इसी तरह के सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: 27 साल बाद सत्ता में आई भाजपा के लिए दिल्ली की समस्याओं से निपटा ही सबसे बड़ी चुनौती है। यमुना का प्रदूषण हो या यहां की हवा की प्रदूषण हो ये समस्याएं स्थानीय स्तर की नहीं हैं। इनसे कैसे निपटेंगे ये देखना होगा। कचरे का पहाड़ और खस्ताहाल सड़कें भी नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती होंगे। चुनाव के दौरान किए गए बड़े-बड़े वादों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती होगी। अब देखना होगा नई सरकार अपने वादों को कब और कैसे पूरा करती है। 

रामकृपाल सिंह: पिछले जो अनुभव हैं। उसके हिसाब से मैं कहूंगा कि भाजपा के साथ भी ऐसा ही है वो जहां की सत्ता में आती है, उससे उसे बाहर करना बहुत मुश्किल होगा है। हरियाणा हो, मध्य प्रदेश हो गुजरात हो ये सब इसके उदाहरण हैं। दिल्ली की समस्याएं सिर्फ दिल्ली की समस्याएं नहीं हैं। जनता जानती हैं कि कोई जादू की छड़ी नहीं है कि अचानक दिल्ली में प्रदूषित हवाओं का आना बंद हो जाएगा। भाजपा जहां सत्ता में आती है वहां के मध्यम वर्ग और निम्न मध्य वर्ग का विश्वास जीत लेती है। यही वजह उसकी सत्ता में दोबारा वापसी होती है। 

अवधेश कुमार: भाजपा के सत्ता में आने का एक बड़ा कारण है आम आदमी पार्टी की सरकार का काम नहीं करना है। ऐसी स्थिति में अगर थोड़ा भी काम होगा तो वह जनता को दिखाई देगा। दिल्ली एक मेट्रोपॉलिटन शहर है। इसमें काम करना कठिन नहीं हैं। दिल्ली में सड़कों की समस्या है। उनकी मरम्मत करके समयबद्ध तरीके से ठीक किया जा सकता है। यमुना जितनी दूषित हो गई है उसकी सफाई भी एक बड़ी समस्या है। उसकी सफाई का अभियान चलेगा इसकी भी उम्मीद की जा सकती है। दिल्ली के काम में मुझे ज्यादा बाधा नहीं लगती है। 

राकेश शुक्ल: दिल्ली के अंदर दो बड़ी समस्याएं हैं। जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण, यह दोनों ही बड़ी समस्याएं हैं। मुझे लगता है कि यमुना सफाई कोई रॉकेट साइंस नहीं है। सिर्फ योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है। हरियाणा से जो यमुना का पानी आ रहा है उसमें अगर शुद्ध जल का प्रवाह होने लगेगा तो युमना अविरल हो जाएगी। मुझे लगता है कि आने वाले दो साल के अंदर यमुना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 

समीर चौगांवकर: अगर अरविंद केजरीवाल ने फ्री बीज की राजनीति अगर दस साल की है तो भाजपा ने भी चुनाव जीतने के लिए फ्री बीज की इसी लकीर को बड़ी करने की कोशिश की है। अरविंद केजरीवाल को यमुना सफाई के मामले में खामियाजा भुगतना पड़ा। जहां तक रेखा गुप्ता की बात है तो मुझे नहीं लगता है कि उनके सामने चुनौती आएगी क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है। दिल्ली की सरकार के लिए चुनौती तब होती जब केंद्र में कोई सरकार हो और दिल्ली में किसी और पार्टी की सरकार हो। सिर्फ यमुना में नाव उतार देने से जनता संतुष्ट नहीं होगी। भाजपा ने चुनाव में जो वादे किए थे उन्हें भी पूरा करना होगा। 

विनोद अग्निहोत्री: चुनौतियां हैं, लेकिन भाजपा शासन करना जानती है। हमें थोड़ा समय देना होगा। आप ने अभी से जो सवाल उठाने शुरू किए हैं उन्हें थोड़ा वक्त नई सरकार को देना चाहिए था। भाजपा का सत्ता में आने के बाद सत्ता से बाहर करना मुश्किल होता है उसकी वजह ये है कि भाजपा विपक्ष की कमजोरियों का बहुत अच्छे से दोहन करती है। कर्नाटक, राजस्थान और हिमाचल जरूर इसके अपवाद हैं। दिल्ली में भाजपा ने बहुत से वादे किए हैं। रेखा गुप्ता के सामने बाहर की जो चुनौतियां हैं वो हैं ही उसके साथ उन्हें अंदरूनी चुनौतियों से भी जूझना होगा।

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