ग्वालियर जीवाजी विवि केमिकल खरीद घोटाला:पूर्व कुलपति सहित 12 आरोपियों को कोर्ट से क्लीन चिट

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता के कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। ईओडब्ल्यू ने कई वर्षों की जांच के बाद यह खात्मा रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने पाया कि प्रयोगशाला सामग्री की खरीद विश्वविद्यालय की वित्तीय नियमावली के अंतर्गत की गई थी। सभी खरीद प्रक्रियाएं खुले निविदा आमंत्रण और अनुमोदित दरों के अनुसार पूरी की गई थीं।
विशेष न्यायाधीश ने ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर किसी कंपनी या व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाया। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता की पहचान और पता भी सही रूप में सत्यापित नहीं हो सका, और वर्षों की जांच के बाद भी आरोपों का समर्थन करने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला।
यह था मामला
यह मामला वर्ष 2009 में शुरू हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय की फार्मेसी प्रयोगशाला के लिए उपकरणों और रसायनों की खरीद में 3 लाख 27 हजार 327 रुपए की आर्थिक अनियमितता की शिकायत की गई थी। ईओडब्ल्यू ने इस शिकायत के आधार पर 2013 में तत्कालीन पूर्व कुलपति एके कपूर, वित्त अधिकारी एमके सक्सेना सहित कुल 12 लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
इनपर हुई एफआईआर
प्रो. ए.के. कपूर, तात्कालीन कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, एम.के. सक्सैना, तात्कालीन वित्त अधिकारी, राजेश जैन तात्कालीन संयोजक, डॉ. डी.एन. सक्सैना, आई.के.पात्रो, डॉ. जी.बी.के.एस. प्रसाद, प्रो. डी.सी. तिवारी, डॉ. नालिनी श्रीवास्तव, सहित अन्य दोषियों पर केस दर्ज हुआ।

