4 कर्मचारियों के नाम खरीदी जमीन, चारों लापता..आदिवासियों की 1135 एकड़ जमीन को हड़पने का आरोप, संगठनों का प्रदर्शन
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक पर आदिवासियों की 1135 जमीन एकड़ खरीदने के लगे आरोप लगे हैं। इस मामले में आदिवासी संगठनों की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग को शिकायत की गई थी, जिस पर आयोग ने कटनी, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया और सिवनी कलेक्टर से जानकारी मांगी थी।
इस मामले में उमरिया कलेक्टर धर्णेंद्र जैन ने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट आयोग को भिजवा दी है। कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि अभी एक दो दिन में जानकारी आयोग को भिजवा दी जाएगी।
बुधवार को कटनी कलेक्ट्रेट पर इस मसले को लेकर आदिवासी सगठनों की ओर से प्रदर्शन किया। कटनी जिले की विजय राघवगढ़ से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक पर 1135 एकड़ जमीन खरीदी घोटाले के आरोप आदिवासी कांग्रेस, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी समेत आदिवासी संगठनों ने लगाए हैं।
आरोपों में कहा गया है कि जिन आदिवासियों के नाम पर यह जमीन खरीदी गई हैं वे लापता है कलेक्टर से उनकी सुरक्षा की मांग की गई है। इस दौरान कलेक्ट्रेट कार्यालय पर इकट्ठे हुए प्रदर्शनकारियों की पुलिस से हल्की झड़प भी हुई।
डिंडोरी जिले में खरीदी गई जमीन प्रदर्शन करने पहुंचे दिव्यांशु मिश्रा ने बताया कि ये विरोध आदिवासी जमीन घोटाले के मामले में भाजपा विधायक पर कार्रवाई को लेकर किया गया है। मिश्रा का आरोप है कि विधायक ने अपने चार कर्मचारियों नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़ और रघुराज सिंह गौड़ के नाम पर डिंडोरी जिले में करीबी 1135 एकड़ जमीन खरीदी है।
उमरिया कलेक्टर ने सौंपी रिपोर्ट, कटनी कलेक्टर का इंतजार
मिश्रा का आरोप है कि विधायक ने अपने चार कर्मचारियों– नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़, और रघुराज सिंह गौड़ के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 1135 एकड़ जमीन खरीदी है। दिल्ली से आदिवासी आयोग ने संबंधित संबंधित कलेक्टर्स से जमीनों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
आयोग ने कहा कि इन आदिवासियों के नाम पर जमीन कैसे और कब आई ? कलेक्टर ने आज तक इस मामले में आज तक इसका जवाब नहीं मांगा है। मिश्रा का आरोप है कि ये चारों आदिवासिी विधायक संजय पाठक के कर्मचारी हैं। शिकायत होने के बाद वे अपने घर से लापता हैं।
आदिवासियों के खातों की डिटेल भी नहीं ली गई है
आदिवासियों के बैंक खातों की डिटेल भी नहीं ली गई है। जिला प्रशासन और जांच अधिकारियों ने इन चारों आदिवासियों के बैंक खातों से पिछले 25 वर्षों में किए गए लेन-देन की जानकारी एकत्र नहीं की है। आयोग ने शिकायतकर्ताओं के बयान 20 जून को दर्ज किए थे।


