दिल्ली

क्या इंडिगो ने जानबूझकर….5 महीने में नहीं किए इंतजाम, सरकार बेबस क्यों हुई!

क्या इंडिगो ने जानबूझकर फ्लाइट संकट खड़ा किया
5 महीने में नहीं किए इंतजाम, सरकार बेबस क्यों हुई

इंडिगो एयरलाइंस की हर 10 में से 9 फ्लाइट्स देरी से उड़ रही या रद्द हो चुकी हैं। इंडिगो का कहना है कि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL के नए नियमों को लागू करने में चूक हुई। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंडिगो के पास पर्याप्त समय था, वो नियमों में रियायत पाने के लिए सरकार को ‘ब्लैकमेल’ कर रही है। फिलहाल DGCA ने नियमों में अस्थायी राहत दे दी, लेकिन हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा।

असली वजह क्या है, समस्या की शुरुआत कैसे हुई, इंडिगो को ही सबसे ज्यादा दिक्कत क्यों और अब आगे क्या होगा…

सवाल-1: मौजूदा फ्लाइट संकट की शुरुआत कैसे हुई?

जवाबः पायलट यूनियन ने जनवरी 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें पायलट के ज्यादा काम के घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL नियमों में बदलाव किए।

1 जुलाई 2025 को पायलट्स को आराम देने के लिए ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के नियम लागू किए गए थे। इसके तहत एयरलाइन कंपनियों के लिए पायलटों को हफ्ते में 36 घंटे के बजाय 48 घंटे आराम, यानी दो दिनों का वीकली रेस्ट देना अनिवार्य कर दिया। इस दौरान किसी छुट्टी को वीकली रेस्ट गिनने पर रोक लगा दी थी।

FDTL के दूसरे फेज में 1 नवंबर से नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों और अन्य क्रू मेंबर्स के लगातार नाइट शिफ्ट पर भी पाबंदी लगा दी थी।

इन नए नियमों के आने के बाद इंडिगो पायलट्स और दूसरे स्टाफ की कमी दूर नहीं कर पाई और हालात बेकाबू हो गए।

सवाल-2: पिछले 3-4 दिनों में हालात बेकाबू कैसे हुए?

जवाबः पिछले 4 दिनों में इंडिगो ने 1700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द कीं और हजारों देरी से चल रही हैं…

  • 2 दिसंबर को सबसे पहले दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की 50-70 घरेलू फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। इस दौरान इंडिगो का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस सिर्फ 35% रह गया, जो अन्य एयरलाइंस जैसे स्पाइसजेट के 82% से बहुत कम था।
  • 3 दिसंबर को भी बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद से उड़ने वाली फ्लाइट्स के कैंसिलेशन शुरू हो गए। फ्लाइट्स में देरी के चलते लोग काउंटरों पर घंटों लाइन में लगे रहे। पुणे और गोवा जैसे छोटे एयरपोर्ट्स का भी यही हाल होने लगा। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस गिरकर 19.7% रह गया।
  • यात्री सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे थे। लोगों का कहना था कि स्टाफ की कमी से फ्लाइट रद्द की जा रही हैं। इसके बावजूद फ्लाइट्स का किराया बढ़ाया जा रहा था। दिल्ली से मुंबई तक की फ्लाइट्स का किराया 10 हजार से बढ़कर 40 हजार तक दिखने लगा।
  • एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इंडिगो रिसोर्सेज की ठीक से प्लानिंग नहीं कर रहा है।
  • 4 दिसंबर को इंडिगो का काम लगभग ठप हो गया। करीब 800 फ्लाइट रद्द कर दी गईं। दिल्ली में रात 12 बजे तक की सभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। भोपाल, पुणे और गोरखपुर जैसे शहरों में भी यात्री फंसे हुए थे। किसी को शादी में जाना था, तो कोई छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों से लाइन में लगा था। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस गिरकर 8.5% हो गया।
  • 5 दिसंबर को हालात बदतर हुए और इंडिगो को 1 हजार से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी। यात्री 24-24 घंटे से फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्री पानी, खाना और जरूरी सामानों के लिए स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों से बहस करते और झगड़ा करते देखे गए।
  • इंडिगो का कहना है कि फ्लाइट ऑपरेशन नॉर्मल होने में 15 दिसंबर तक का समय लगेगा। इधर दूसरी एयरलाइन के किराए में उछाल देखने को मिला है। यात्रियों को ऑप्शनल फ्लाइट्स की तलाश में सामान्य से 10 गुना कीमत तक पर टिकट खरीदने पड़ रहे हैं।

सवाल-3: इंडिगो समाधान करने की बजाय लगातार बहाने क्यों बनाता रहा?

जवाबः 2 दिसंबर को इंडिगो ने कहा कि किसी छोटी तकनीकी गड़बड़ी, सर्दियों के शेड्यूल मैनेजमेंट, मौसम, एयरपोर्ट कंजेशन और नए क्रू रोस्टरिंग नियमों के चलते फ्लाइट्स प्रभावित हो रही हैं। साथ ही यात्रियों से टिकट रिफंड और री-बुकिंग का वादा किया।

3 दिसंबर को इंडिगो ने एयरलाइन से जुड़ी तकनीकी दिक्कत और ऑपरेशनल इश्यूज से फ्लाइट प्रभावित होने की बात कही गई।

4 दिसंबर को हालात बेकाबू हो गए, तो इंडिगो के सीनियर ऑफिसर्स ने DGCA के साथ मीटिंग के बाद नए रोस्टर नियमों के मुताबिक अपनी प्लानिंग में कमी की बात मानी।

इंडिगो ने माना कि क्रू रिक्वायरमेंट अनुमान से ज्यादा था। नए क्रू रोस्टरिंग नियमों और बाकी तकनीकी कारणों, मौसम आदि के सम्मिलित प्रभाव के चलते उसकी फ्लाइट्स प्रभावित हुईं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिगो को नए पायलट्स और बाकी स्टाफ हायर करने के लिए 9 महीने का समय दिया गया था, लेकिन इंडिगो ने जरूरत के मुताबिक नई भर्तियां नहीं कीं। यही बात शक पैदा करती है कि संकट अचानक नहीं हुआ, बल्कि पहले से अनुमानित था।

सवाल-4: क्या इंडिगो ने इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया?

जवाबः कॉमेडियन अभिजीत गांगुली ने आरोप लगाया कि इंडिगो ने सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए फ्लाइट्स रद्द कीं, ताकि यात्रियों को तकलीफ हो और सरकार इंडिगो को FDTL के नियमों में छूट देने के लिए राजी हो जाए।

जब नवंबर में दूसरे फेज के रूल्स लागू हुए, तभी बेंगलुरु में फ्लाइट्स प्रभावित होने लगी थीं। इंडिगो का स्टाफ कह रहा था कि अभी यह स्थिति करीब एक महीने तक चलेगी। वही हुआ और आखिरकार सरकार इंडिगो को नए रूल्स से राहत देने को तैयार हो गई।

अभिजीत गांगुली का X पर किया पोस्ट।
अभिजीत गांगुली का X पर किया पोस्ट।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इंडिगो की मोनोपॉली का सवाल उठाया…

इंडिगो ने एक सोची समझी हड़ताल की है। नए नियमों को अचानक लागू नहीं किया गया था। स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए इंडिगो के पास पर्याप्त समय था, लेकिन इंडिगो के पास भारतीय एविएशन सेक्टर में करीब 65% की हिस्सेदारी है। उसने अपना खर्च कम करने के लिए नए स्टाफ की भर्ती नहीं की और दबाव बनाने के लिए फ्लाइट्स प्रभावित की गईं।

सवाल-5: पायलट-क्रू के आराम के लिए बने नए FDTL नियम क्या हैं?

जवाबः FDTL के नए नियमों के तहत…

  • पायलट दिन में 10 घंटे और दो पायलट क्रू-सेटअप होने पर 13 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकते। ऐसे ही रात में पायलट 8 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकते।
  • जरूरत पड़ने पर पायलट की ड्यूटी डेढ़ से 2 घंटे बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसके बदले उन्हें जरूरी आराम देना होगा। एक घंटे तक के एक्सटेंशन में दोगुना और उससे ज्यादा में चार गुना आराम जरूरी होगा।
  • पायलट हफ्ते में 35 घंटे और महीने में 100-125 घंटे की उड़ान भर सकते हैं। सालाना उड़ान 1,000 घंटे से ज्यादा और ड्यूटी 1,800 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती।
  • हफ्ते में पायलट को 36 घंटे के बजाय 48 घंटे का आराम जरूरी है। आराम का समय पिछली फ्लाइट से कम-से-कम दोगुना होना चाहिए। अगर पायलट ने 24 घंटे ड्यूटी की है तो कम-से-कम 10 घंटे का रेस्ट जरूरी है।
  • पायलट लगातार सिर्फ दो दिन नाइट ड्यूटी कर सकते हैं। इस दौरान वे सिर्फ 2 नाइट लैंडिंग कर सकते हैं, जो पहले 6 थी। एक हफ्ते में पायलट 2 से ज्यादा नाइट लैंडिंग नहीं कर सकते।
  • एयरलाइन्स को हर महीने थकान-जोखिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। ऐसा न करने पर 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।

सवाल-6: सरकार ने ये नियम क्यों बनाए और इन्हें लागू करना क्यों जरूरी था?

जवाबः DGCA ने पायलटों की थकान से जुड़ी रिपोर्ट्स की समीक्षा करने के बाद ये नियम लागू किए हैं। पिछले 3-4 सालों में समय-समय पर कई पायलट्स एसोसिएशन ने DGCA को पत्र लिखकर इन नियमों को लागू करने की मांग की थी, ताकि उन्हें जरूरी आराम मिल सके।

DGCA का कहना है कि पायलट्स की थकान बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। दुनियाभर की एयरलाइंस भी इसे एक बड़ा जोखिम मानती हैं। थकान की वजह से खराब परिस्थितियों में फैसला लेने और रात के वक्त प्लेन लैंड कराने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA ने 2023 में 1,622 कॉमर्शियल पायलट्स को लाइसेंस जारी करने की बात कही थी, लेकिन फिर भी अगले 5 सालों में 2,375 पायलटों की कमी रह जाएगी। 2029 तक कुल 22,400 पायलटों की जरूरत होगी, जबकि अभी सिर्फ 11,745 पायलट्स ही हैं। 2022 से 2025 के बीच उड़ानें बढ़ने से पायलट्स खासकर कैप्टन पर काम का बोझ बढ़ा है।

भारत के पायलट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स की क्षमता भी कम है। हर साल सिर्फ 1200-1500 पायलट्स को ही ट्रेनिंग के बाद लाइसेंस मिल पाता है। जबकि जरूरत इससे कहीं ज्यादा है।

सवाल-7: अमेरिका और यूके में पायलट्स को कितना रेस्ट मिलता है?

जवाबः अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FFA) और यूरोप की यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने पायलटों को जरूरी आराम देने के लिए कुछ ऐसे ही नियम बनाएं हैं, जो अमेरिका और यूरोपीय देशों की लगभग सभी एयरलाइंस पर लागू होते हैं…

  • अमेरिका में पायलट हफ्ते में 32 घंटे और महीने में 100 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। उन्हें हफ्ते में एक बार लगातार 24 घंटे का आराम दिया जाता है। तीन पायलट क्रू-सेटअप होने पर भी पायलट 12 घंटे से ज्यादा की उड़ान नहीं भर सकते।
  • यूरोप में पायलट एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। कुछ खास परिस्थितियों में इसे 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। दो फ्लाइंग ड्यूटी के बीच पायलट को 10-11 घंटों का आराम देना जरूरी है। पायलट को हफ्ते में एक बार 36 घंटे का आराम मिलता है।

भारत के नए नियम इसी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर आधारित हैं। सेफ्टी के लिहाज से ये जरूरी माने जाते हैं।

सवाल-8: नए नियमों से सबसे ज्यादा इंडिगो ही क्यों प्रभावित हुआ?

जवाबः नए नियमों से इंडिगो सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ क्योंकि…

  • भारत के एयरलाइंस मार्केट में उसकी सबसे ज्यादा 60% हिस्सेदारी है। एयरलाइन दिन भर में लगभग 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट करती है।
  • इंडिगो की सबसे ज्यादा और लगातार फ्लाइट रहती है। देर रात और सुबह की उड़ानों पर इंडिगो सबसे ज्यादा ध्यान देता है।
  • इसकी तुलना में अन्य एयरलाइंस कंपनियां नए विमानों की डिलीवरी में देरी और मरम्मत के लिए खड़े विमानों से जूझ रही हैं। ऐसे में इनकी उड़ाने कम और स्टाफ ज्यादा हैं। वो नए नियमों के हिसाब से आसानी में पायलट्स की ड्यूटी शेड्यूल कर पा रहे हैं।

अभी इंडिगो के पास 5,456 पायलट और 10,212 केबिन क्रू मेंबर हैं। 41 हजार से ज्यादा स्थायी कर्मचारी हैं। इंडिगो का कहना है कि नए फ्लाइट टाइम लिमिटेशन नियमों के कारण पायलट और क्रू की कमी हुई है।

सवाल-9: क्या सरकार वाकई ‘बेबस’ थी, उसके पास क्या विकल्प थे?

जवाबः थ्योरिटिकली सरकार के पास चार विकल्प थे-

  • DGCA नए नियम पूरी तरह वापस ले, लेकिन सेफ्टी के चलते संभव नहीं
  • अन्य एयरलाइंस से कैपेसिटी ट्रांसफर कराई जाए, लेकिन ये कुछ ही रूट्स पर संभव है
  • शॉर्ट-टर्म पायलट घंटों में छूट दी जाए, लेकिन यह रिस्की है।
  • इंडिगो पर भारी पेनल्टी लगाई जाए, लेकिन इससे स्थिति और बिगड़ सकती थी।

स्थिति को देखते हुए DGCA ने एयलाइंस को नए नियमों से 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी है। पायलट्स को वीकली रेस्ट के बदले कोई भी छुट्टी नहीं देने के फैसले को भी वापस ले लिया है।

सवाल-10: इस पूरे मामले में आगे क्या हो सकता है?

जवाबः इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स का कहना है, ‘इंडिगो की फ्लाइट्स रद्द होने और देरी से चलने के लिए हम सभी से माफी मांगते हैं। पूरा सिस्टम रिबूट हो रहा है। हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा। 10 से 15 दिसंबर तक हालात सामान्य हो सकेंगे। पिछले कुछ दिनों में ज्यादा दिक्कतें आई हैं। आज 1 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द हुई हैं। कल 1,000 से कम उड़ाने प्रभावित होंगी।’

एविएशन एक्सपर्ट अनंत सेठी कहते हैं ‘अभी सरकार के पास यात्रियों की समस्या दूर करने का विकल्प नहीं है, इसलिए अभी इंडिगो से बात की जा रही है। DGCA ने इंडिगो से पूछा है कि वह कितने फेज में और किस तरह से नए नियम लागू करेंगे। हो सकता है कि कुछ दिनों में इंडिगो नया शेड्यूल जारी करके कुछ फ्लाइट्स कम कर दे, क्योंकि यही एक चारा है, अचानक पायलट्स बढ़ाना आसान काम नहीं है।’

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