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वायु प्रदूषण की वजह से क्या 2022 में 17 लाख मौतें हुईं?

वायु प्रदूषण की वजह से क्या 2022 में 17 लाख मौतें हुईं?

राज्यसभा में टीएमसी सांसद ने किया सवाल, जानिए सरकार का जवाब

देश में वायु प्रदूषण से कितनी मौतें, से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव ने बताया कि देश में ऐसा कोई पक्का आंकड़ा मौजूद नहीं है जो सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली मौत या बीमारी के बीच सीधा संबंध स्थापित कर सके.

वायु प्रदूषण की वजह से क्या 2022 में 17 लाख मौतें हुईं? राज्यसभा में टीएमसी सांसद ने किया सवाल, जानिए सरकार का जवाब

देश के कई राज्यों के लिए समस्या बनता जा रहा वायु प्रदूषण

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है और कई मसलों पर चर्चा तथा बहस हो रही है. सत्र के दौरान पर्यावरण का भी मामला उठा. राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार से सवाल किया कि क्या साल 2022 में प्रदूषण की वजह से 17 लाख लोगों की मौत हो गई थी, साथ ही यह भी सवाल किया गया कि वायु प्रदूषण की वजह से भारी आर्थिक नुकसान का अंदाजा है. क्या इस वजह से GDP में 9.5 परसेंट का नुकसान हुआ है? क्या सरकार के पास प्रदूषण की वजह से हुई मौतों का कोई आंकड़ा है?

प्रदूषण रोकने को लेकर उठाए कई कदम

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने देश भर में वायु प्रदूषण की जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसमें जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Climate Change and Human Health, NPCCHH) का कार्यान्वयन, जिसका मकसद साल 2019 से ही संवेदनशील स्वास्थ्य मुद्दों पर देशभर में जागरूकता पैदा करना, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारी करना शामिल है.

केंद्र सरकार के प्रयासों के बारे में उन्होंने बताया कि NPCCHH के तहत, सरकार ने वायु प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर “स्वास्थ्य अनुकूलन योजना” (Health Adaptation Plan) विकसित की है.

राज्यस्तर पर बनाए एक्शन प्लान

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि इसने सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर “राज्य कार्य योजना” (State Action Plan) भी तैयार किया है. इस योजना में वायु प्रदूषण से जुड़ा एक चैप्टर भी है जो इसके असर को कम करने के लिए हस्तक्षेप करने का सुझाव देता है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह भी जारी करता है जिसमें वायु प्रदूषण से होने वाले असर को कम किया जा सके.

प्रदूषण के स्तर को दुरुस्त करने को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों के बारे में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून), नीले आसमान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस (7 सितंबर) और राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस (2 दिसंबर) के जरिए हर साल राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं. वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों को लक्षित करते हुए कंटेंट तैयार किया गया है, जिसका प्रसार लोगों के बीच किया जाता है.

उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का लक्ष्य महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है. साथ ही उन्हें साफ-सुथरा खाना पकाने के लिए गैस (LPG) देना है. इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन भी चलाया जा रहा है जिसका लक्ष्य शहरों, छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों, गलियों और बुनियादी ढांचे को साफ-सुथरा रखना है, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके. यही नहीं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने साल 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया है.

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