क्राइमदिल्ली

दिल्ली ब्लास्ट-20 घंटे पहले मिला अलर्ट, फिर उमर कैसे भागा???

दिल्ली ब्लास्ट-20 घंटे पहले मिला अलर्ट, फिर उमर कैसे भागा
डॉक्टर टेरर मॉड्यूल पकड़ा लेकिन खतरा कायम, IS फिर कर सकता है अटैक

10 नवंबर को दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद संदिग्ध आतंकी जेल में है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। दैनिक भास्कर को खुफिया जांच एजेंसियों से ऐसे डॉक्यूमेंट मिले हैं, जिससे डॉक्टर टेरर मॉड्यूल को लेकर 3 बड़ी बातें पता चली हैं। पहली, आतंकी अब भी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के खुफिया विभाग से जारी अलर्ट में इसका खुलासा हुआ। ये अलर्ट दिल्ली ब्लास्ट के तीन दिन बाद 13 नवंबर को जारी किया गया था।

दूसरी बात, दिल्ली ब्लास्ट से ठीक एक दिन पहले 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस को पता चल गया था कि हमले को अंजाम देने वाला डॉ. उमर फरार है। उसके पास भारी मात्रा में विस्फोटक भी है। ऐसे में अगर समय रहते उमर को वांटेड घोषित किया गया होता और पुलिस ने विस्फोटक की डिटेल जारी की होती तो दिल्ली ब्लास्ट रोका जा सकता था।

तीसरी बात, डॉक्टर टेरर मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार-गजवत-उल-हिंद (AGuH) दोनों के मिले-जुले नेटवर्क का हिस्सा है। इससे इस्लामिक स्टेट का हाइब्रिड मॉड्यूल भी लिंक है। इनका मकसद ऐसे लोगों को शामिल कर बड़े आतंकी हमले करना है, जिन पर जांच एजेंसियों को शक न हो।

दिल्ली ब्लास्ट के कनेक्शन में गिरफ्तार डॉ. मुज्जमिल, डॉ. शाहीन, डॉ. उमर, डॉ. आदिल और मौलाना इरफान इस नेटवर्क की महज एक कड़ी हैं। इसका मुख्य हैंडलर अब भी गायब है। इनमें से एक मुख्य हैंडलर का कोडनेम हाशिम है।

खुफिया एजेंसी से मिले डॉक्यूमेंट्स और पूछताछ के दौरान डॉक्टर टेरर मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध आतंकियों ने और क्या खुलासे किए हैं

खुलासा नंबर-1 इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी वॉयलेंट अटैक की तैयारी में

आखिर दिल्ली ब्लास्ट के बाद भी अभी खतरा क्यों नहीं टला है। इसे समझने के लिए हमने जम्मू-कश्मीर की इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट की पड़ताल की। 13 नवंबर को जारी इस अलर्ट में जिक्र है कि इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी संगठन अब भी भारत में बड़े हमले की साजिश रच रहे हैं। ISKP यानी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस भारत में आतंकी और कट्टरपंथी सोच वाले कैडर को वॉयलेंट अटैक के लिए ट्रेंड कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से ऐसा अलर्ट इस साल 22 मई, 16 जून और 15 सितंबर को भी जारी किया गया था। इसके बाद ही श्रीनगर के नौगाम थाने की पुलिस को जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर चिपकाने की जानकारी मिली। इसी के आधार पर फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ। हालांकि इस मॉड्यूल की जांच में बड़ी लापरवाही भी सामने आई है।

मंदिर, धार्मिक स्थल और विदेशी टूरिस्ट वाली जगहें टारगेट पर

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी ऐसी जगहों को टारगेट कर सकते हैं, जो काफी भीड़भाड़ वाला हो। ये मंदिर या कोई धार्मिक स्थान हो सकता है। इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले चर्चित मार्केट भी टारगेट किए जा सकते हैं। इस अलर्ट में खासतौर पर वेस्टर्न इंट्रेस्ट लिखा है। इसका मतलब उस जगह से है, जहां काफी विदेशी टूरिस्ट आते या ठहरते हों। ताकि आतंकी हमला भले भारत में हो, लेकिन उसका असर दुनिया के बाकी हिस्सों में भी महसूस किया जा सके।

इनका मकसद लग्जरी होटल टारगेट करना, जैसे- 26/11 मुंबई अटैक में ताज और ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल को निशाना बनाया गया था क्योंकि ऐसी जगहों पर ज्यादा विदेशी ठहरते हैं। इसके अलावा ऐसे टूरिस्ट हब, जहां ज्यादा विदेशी आते हैं, जैसे- गोवा या फिर वाराणसी-मथुरा जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी हो सकते हैं। ये अलर्ट देश की सभी सीक्रेट एजेंसियों, राज्यों की पुलिस और आर्मी को भी भेजा गया है।

13 नवंबर को जम्मू-कश्मीर की इंटेलिजेंस यूनिट की ओर से जारी अलर्ट में आगे बड़े खतरे को लेकर आगाह किया गया है।
13 नवंबर को जम्मू-कश्मीर की इंटेलिजेंस यूनिट की ओर से जारी अलर्ट में आगे बड़े खतरे को लेकर आगाह किया गया है।

खुलासा नंबर-2 दिल्ली ब्लास्ट रोका जा सकता था, फिर क्यों नहीं हुआ अलर्ट

अब बात गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे की। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 9 और 10 नवंबर की रात श्रीनगर के परिमपोरा थाने में संदिग्ध आतंकी मौलाना इरफान अहमद वागे उर्फ मुफ्ती से पूछताछ की थी। इरफान ने बताया था कि वो नौगाम की मस्जिद में इमाम है। 2022 में डॉ. मुजम्मिल ने उसकी मुलाकात डॉ. आदिल और डॉ. उमर मोहम्मद नबी से कराई थी। ये सभी अंसार-गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे।

पुलिस ने इस पूछताछ के बाद डॉ. उमर को फरार मान लिया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बाकायदा डॉ. उमर मोहम्मद नबी को फरार लिखा भी था। इसकी पुष्टि खुद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी। दरअसल 10 नवंबर की दोपहर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद और अंसार-गजवत-उल हिंद के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा करते हुए ट्वीट किया।

इसके कुछ घंटे बाद शाम 6:10 बजे फिर ट्वीट कर लिखा- ‘तुम भाग सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते।‘ ये इशारा डॉ. उमर के लिए ही था। ऐसे में सवाल ये है कि जब पुलिस के पास इतनी डिटेल थी तो फिर उसकी फोटो के साथ दिल्ली-फरीदाबाद और आसपास के एरिया में अलर्ट क्यों नहीं जारी किया गया।

खुलासा नंबर-3 आतंकी का इलाज करने गया था डॉ. मुजम्मिल, तब हुई दोस्ती

हमने संदिग्ध आतंकी डॉ. मुजम्मिल और इरफान के बयान की पड़ताल की। इनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले पुराने लिंक सामने आए हैं। दोनों की पूछताछ में एक नाम कॉमन मिला। वो आतंकी हाफिज मुजम्मिल तांत्रे का है, जिसे अप्रैल 2021 में कश्मीर में हुए एनकाउंटर में मार दिया गया था।

आतंकी कनेक्शन कैसे हुआ? इस पर इरफान ने पूछताछ में बताया कि बचपन में पढ़ाई के दौरान उसकी हाफिज मुजम्मिल से दोस्ती हो गई थी। 2017 में जब वो आतंकी संगठन से जुड़ा तो इरफान भी उससे जुड़ गया था। वहीं डॉ. मुजम्मिल ने बताया कि वो पहले कश्मीर में ही डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस कर रहा था।

2021 की बात है। अंसार-गजवत-उल-हिंद से जुड़ा आतंकी हाफिज मुजम्मिल तांत्रे बीमार था। डॉ. मुजम्मिल उसका इलाज करने गया था। इसी दौरान दोस्ती हुई और वो तांत्रे की विचारधारा से प्रभावित हो गया। तांत्रे के मारे जाने के बाद संगठन से जुड़े हैंडलर हाशिम ने उसे मौलवी इरफान का नंबर दिया और उससे मिलने के लिए कहा था।

उसने पूछताछ में आगे बताया कि 2021 में डॉ मुज्जमिल ने पहले वॉट्सएप पर इरफान से संपर्क किया, लेकिन शुरुआत में इरफान को भरोसा नहीं हुआ। इसके बाद इरफान ने उससे जुड़े खास हैंडलर के नाम पूछे। इस पर डॉ. मुजम्मिल ने तीन नाम बताए थे, पहला गाजी खालिद, दूसरा मंसूर और तीसरा हाशिम। ये तीनों AGuH के कमांडर थे। ये नाम सुनते ही इरफान को डॉ. मुजम्मिल पर भरोसा हो गया और वो मिलने को राजी हो गया।

इसके बाद इरफान ने डॉ. मुजम्मिल का ब्रेनवॉश कर दूसरे डॉक्टरों को भी जोड़ा, जिसके बाद ये डॉक्टर टेरर मॉड्यूल बनकर तैयार हुआ।

सबसे पहले जाकिर मूसा ने वाइट कॉलर मॉड्यूल तैयार किया

जिस अंसार-गजवत-उल-हिंद (AGuH) से हाफिज मुजम्मिल तांत्रे जुड़ा था, उसकी शुरुआत जुलाई 2017 में जाकिर राशिद भट्ठ उर्फ जाकिर मूसा ने की थी। मूसा ने इसे अल कायदा के सपोर्ट से शुरू किया था। मूसा अच्छे परिवार से था। बीटेक की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद पहले हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा।

उसने सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की मदद से आतंक फैलाने की जिम्मेदारी ली। युवाओं को साथ जोड़ने लगा। साल 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद मई 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर वो अल कायदा से जुड़ गया। फिर इसी साल अल कायदा की कट्टरपंथी विचारधारा पर अंसार-गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन बनाया।

संगठन बनाते ही मूसा ने जुलाई 2017 में एक पोस्टर जारी किया। इसमें साफतौर पर लिखा था कि ये बुरहान वानी के बाद कश्मीर में नया जिहाद है। इस पोस्टर के बाद संगठन से पढ़े-लिखे युवा जुड़ने लगे। 23 मई 2019 को आतंकी जाकिर मूसा भारतीय सेना के हाथों एनकाउंटर में मारा गया। हालांकि संगठन एक्टिव रहा। कश्मीर में आतंक बढ़ाने के लिए इसे जैश-ए-मोहम्मद का भी सपोर्ट मिलता रहा।

बुरहान वानी, जाकिर मूसा की राह पर चला हाफिज मुजम्मिल तांत्रे

…..को मिले डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि AGuH से जुड़े आतंकी जम्मू-कश्मीर में एक्टिव भी मिले। 21 अक्टूबर 2020 को जम्मू की CID ने दो संदिग्ध आतंकी किफायत राशिद कोका और आजाद अहमद कोका को पकड़ा था। ये अंसार-गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे। इनसे पूछताछ में पता चला था कि आतंकी सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी में हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर फंडिंग भी हो रही है।

फंडिंग के लिए ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क चला रहे हैं। दोनों संदिग्ध पहली बार मुजम्मिल तांत्रे और बासिक के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) का काम कर रहे थे। कश्मीर में आतंकी वारदात के लिए वे बड़ा लॉजिस्टिक नेटवर्क भी चला रहे हैं। इनसे मिले इनपुट के बाद ही 2021 में हाफिज मुजम्मिल तांत्रे का एनकाउंटर किया गया था। हालांकि इससे पहले ही मुजम्मिल तांत्रे ने फरीदाबाद डॉक्टर मॉड्यूल की शुरुआत कर दी थी।

मुजम्मिल की कमाई 9 लाख रुपए, विस्फोटक के लिए 5 लाख कैसे दिए

डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल, डॉ. उमर और डॉ. शाहीन फरीदाबाद डॉक्टर मॉड्यूल की अहम कड़ी हैं। इन सबने मिलकर विस्फोटक और हथियारों के लिए 2023-24 में ही 26 लाख रुपए जुटाए थे। दिल्ली ब्लास्ट के बाद पुलिस की जांच में ये भी पता चला है कि इसमें से 5 लाख रुपए डॉ. मुजम्मिल ने दिए थे।

जबकि मुजम्मिल ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की पूछताछ में कबूला है कि वो अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में बतौर चीफ मेडिकल ऑफिसर यानी CMO पदस्थ था। उसकी सालाना कमाई महज 9 लाख रुपए थी। इस पर जांच एजेंसियों को CMO लेवल के डॉक्टर की इतनी कम सैलरी खटकी। साथ ही ये सवाल भी उठा कि ये पैसे कैसे आए।

फरीदाबाद में भी डॉ. शाहीन के कमरे की तलाशी के दौरान 18.5 लाख रुपए और सोने के बिस्किट मिले थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन पैसों को हवाला और ड्रग्स के जरिए कमाकर आतंकी एक्टिविटीज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

सिग्नल ऐप पर डॉ. उमर ने $#& जैसे स्पेशल कैरेक्टर के नाम पर ग्रुप बनाया

डॉ. मुजम्मिल शकील ने पूछताछ में बताया है कि डॉ. उमर बेशक हमसे जुड़ा था लेकिन वो ज्यादा कट्टर था। उसकी कट्टरता की वजह से कई बार हमारे बीच बातचीत भी बंद हो जाती थी। वो टेक्निकल तौर पर काफी मजबूत था। उसने सिग्नल ऐप पर $#& जैसे स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल करके चैट ग्रुप बनाया था। जिससे किसी को उसके नाम की जानकारी ना हो। बाद में ग्रुप डिलीट भी कर दिया।

जैश का तरीका ऐसे आतंकी बनाओ- जिन पर कोई शक न करे

डॉक्टर टेरर मॉड्यूल के ऐसे बनाया गया, जिस पर किसी को शक ना हो। जैश-ए-मोहम्मद ये पैटर्न अपने हाइब्रिड टेरर मॉड्यूल में काफी पहले से इस्तेमाल करता आ रहा है। इस बारे में जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य कहते हैं, ‘साउथ कश्मीर के त्राल के रहने वाले नूर मोहम्मद तांत्रे को जैश-ए-मोहम्मद ने उसकी कद-काठी की वजह से आतंकी बनाया था।

नूर मोहम्मद की लंबाई महज 4 फुट 2 इंच थी। वो लंगड़ा कर चलता था। ऐसे में किसी जांच एजेंसी को उस पर शक ना हो। इसलिए उसे पहले ओवरग्राउंड वर्कर बनाया गया। फिर उसे बड़ा आतंकी बनाया गया। जिसे जांच एजेंसियों ने मौत का सौदागर नाम दिया था।

आतंकी ट्रेनिंग के बाद दिल्ली वो बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से गया था। 2003 में ही दिल्ली के सदर बाजार में नूर मोहम्मद करीब 19 लाख रुपए और भारी मात्रा में हथियार के साथ पकड़ लिया गया था। इसे आतंकी गाजी बाबा का करीबी कहा जाता था।

2011 में उम्रकैद की सजा हुई थी। 2015 में उसे दिल्ली से श्रीनगर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया। इसके बाद वो पैरोल पर बाहर आया और गायब हो गया। दिसंबर 2017 में सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में मार दिया गया।

अब उसी पैटर्न पर डॉक्टर टेरर मॉड्यूल का भी इस्तेमाल किया गया। जिससे आसानी से उन पर शक ना हो। फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में जांच एजेंसियों को शक है कि इसमें जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा, अंसार-गजवत-उल-हिंद के साथ इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस भी हाइब्रिड आतंकी नेटवर्क में है। जिसकी जांच हो रही है।

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