दंदरौआ मंदिर ट्रस्ट भूमि में हेराफेरी; भिंड कलेक्टर मीणा पर हाईकोर्ट सख्त !!
दंदरौआ मंदिर ट्रस्ट भूमि में हेराफेरी; भिंड कलेक्टर मीणा पर हाईकोर्ट सख्त, जानिए क्या है मामला?
Dandraua Sarkar Bhind: दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट की भूमि को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है. मुख्य सचिव की रिपोर्ट, कलेक्टर का असंगत प्रस्तुतीकरण, और हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस-ये सभी संकेत देते हैं कि आगामी सुनवाई में कलेक्टर मीणा के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
दंदरौआ सरकार (Dandraua Sarkar Mandir Trust) मंदिर ट्रस्ट को वर्षों पहले शासन द्वारा दी गई जमीन को लेकर राजस्व अभिलेखों में हुई कथित हेराफेरी अब एक बार फिर सुर्खियों में है. इस मामले में चंबल संभागायुक्त पर आरोप लगाने के बाद भिंड कलेक्टर (Bhind Collector) किरोड़ी लाल मीणा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हाईकोर्ट (MP High Court) ने इस संबंध में कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?
राजस्व रिकॉर्ड में गलत दर्ज, शासन ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी याचिका में बताया था कि दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट को दी गई भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में नियम विरुद्ध तरीके से दर्ज किया गया था. इस प्रक्रिया में तत्कालीन तहसीलदार आर.एन. खरे की भूमिका प्रारंभिक जांच में गलत पाई गई थी. प्रशासन ने हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया कलेक्टर मीणा द्वारा शुरू की जा चुकी है और 11 अप्रैल 2025 को इस संबंध में पत्र चंबल संभागायुक्त को भेजा गया था. लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि संभागायुक्त कार्यालय ने फाइल इसलिए अटका रखी थी क्योंकि कलेक्टर ने अधूरी जानकारी भेजी थी, और इस पर कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए थे.
कलेक्टर का स्पष्टीकरण, कोर्ट ने माना गलत
कलेक्टर के इस स्पष्टीकरण को हाईकोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना. न्यायालय ने कहा कि कलेक्टर द्वारा भेजी गई जानकारी पूरी नहीं थी, जिसके चलते कार्रवाई में देरी हुई. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कलेक्टर मीणा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
मुख्य सचिव की जांच में भी कलेक्टर की चूक सामने आई
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई प्रशासनिक जांच में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कलेक्टर का प्रस्तुतीकरण मानकों के अनुरूप नहीं था. इसके चलते हाईकोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग को उन्हें प्रशासनिक चेतावनी जारी करने के आदेश दिए थे. अब हाईकोर्ट ने पूछा है कि—यह चेतावनी कलेक्टर की सेवा शर्तों पर क्या प्रभाव डालेगी? क्या यह केवल एक औपचारिक चेतावनी भर होगी या इसका भविष्य में रिकॉर्ड पर असर पड़ेगा?
तहसीलदार खरे पर देरी से कार्रवाई भी सवालों में
इस विवाद में सबसे बड़ा प्रश्न यह बना कि अगर तहसीलदार की भूमिका गलत पाई गई थी, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई समय पर क्यों नहीं हुई? कलेक्टर ने इसका उत्तर यह देकर दिया कि उन्होंने कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था, लेकिन जानकारी के अधूरे होने के कारण संभागायुक्त कार्यालय ने फाइल लंबित रखी. कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.

