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साइबर लिटरेसी- 2 साल में 3 गुना डिजिटल अरेस्ट केसेज !!!

साइबर लिटरेसी- 2 साल में 3 गुना डिजिटल अरेस्ट केसेज
1 साल में 2000 करोड़ की ठगी, कैसे बचें- जानकारी और बचाव के 10 कदम

देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इससे जुड़े साइबर अपराधों में 2022 से 2024 के बीच तेज बढ़ोतरी हुई है। राज्यसभा में सरकार ने बताया कि 2022 में डिजिटल अरेस्ट के 39,925 मामले दर्ज हुए थे और ठगी की कुल राशि 91.14 करोड़ रुपए थी।

वहीं, 2024 में ये मामले लगभग तीन गुना बढ़कर 1,23,672 हो गए। ठगी की राशि 21 गुना बढ़कर 19,35.51 करोड़ रुपए पहुंच गई। कमाल की बात ये है कि पढ़े-लिखे लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।

इसलिए आज डिजिटल अरेस्ट पर ये कंप्लीट एजुकेशनल स्टोरी जरूर पढ़िए।

साइबर लिटरेसी कॉलम में आज हम जानेंगे कि-

  • क्या भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून है?
  • साइबर ठग कैसे आपका मेंटल कंट्रोल अपने हाथों में ले लेते हैं?
  • हम डिजिटल अरेस्ट से कैसे बच सकते हैं?

सबसे पहले पिछले 1-2 महीने में हुई डिजिटल अरेस्ट की कुछ घटनाएं-

  • भुवनेश्वर में एक बुजुर्ग चार्टेड अकाउंटेंट को डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फंसाकर 1.5 करोड़ रुपए की ठगी हुई। पीड़ित करीब 10 दिनों तक उनके जाल में फंसा रहा।
  • हैदराबाद में 78 साल के एक शख्स को डिजिटल अरेस्ट करके उससे 51 लाख रुपए की ठगी की गई।
  • हैदराबाद में ही एक 73 साल की महिला को डिजिटल बंधक बनाकर उससे 1.43 करोड़ रुपए की ठगी की गई।
  • स्कैमर्स ने अलीगढ़ की पूर्व मेयर के पति को 3 दिन तक डिजिटल अरेस्ट पर रखा। फाइनेंशियल फ्रॉड का केस बताकर 50 लाख रुपए की मांग की।
  • नोएडा की 83 साल की एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट करके 31 लाख रुपए की ठगी हुई। स्कैमर्स ने महिला को 2 दिन तक फंसाकर रखा।
  • उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक देवर-भाभी को डिजिटल अरेस्ट करके 1.5 लाख रुपए की ठगी हुई। स्कैमर्स ने कहा था कि महिला के पति पर रेप का चार्ज है। उसे केस से निकलवाने के लिए पैसे दें।
  • मुंबई में टाटा हॉस्पिटल के रिटायर्ड एम्प्लॉई को डिजिटल अरेस्ट करके 75.5 लाख रुपए की ठगी की। उन्हें 3 महीने तक फंसाए रखा।

बुजुर्गों को शिकार बना रहे हैं स्कैमर्स

इन सभी मामलों में एक कॉमन बात ये है कि स्कैमर्स बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बन रहे हैं। इनके अकाउंट में जमा बड़ी धनराशि को चूना लगा रहे हैं।\

 

सवाल- डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और स्कैमर्स कैसे लोगों को ठग रहे हैं?

जवाब- यह स्कैमर्स का बनाया साइबर ठगी का एक तरीका है। इसमें स्कैमर्स खुद को पुलिस, CBI, ED या साइबर एजेंसी का अधिकारी बताकर शख्स को डराते हैं। ये हर किसी को अलग-अलग तरीके से अपने जाल में फंसाते हैं, जैसे-

  • तुम्हारे अकाउंट से करोड़ों रुपए विदेशी अकाउंट में ट्रांसफर हुए हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का केस बनेगा।
  • तुम्हारा नाम ड्रग्स केस में सामने आया है। तुम्हारे ऊपर पुलिस केस चलेगा।
  • तुम्हारे, भाई/बेटे का नाम रेप केस में सामने आया है। उसके ऊपर पुलिस केस चलेगा।
  • आपके ऊपर सरकार से धोखाधड़ी का आरोप है, आपको पुलिस अरेस्ट करेगी।

इसके बाद ये बोलते हैं कि आपको डिजिटल निगरानी में रखा गया है। आपको कैमरे के सामने रहना होगा। जिस कमरे में हैं, उसका दरवाजा बंद करके रखना होगा। इस दौरान ये आपका नाम केस से हटाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

सवाल- क्या भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द या प्रक्रिया है?

जवाब- भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द या कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह पूरी तरह भ्रमित करने के लिए साइबर ठगी में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। असल में, भारत में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को लिखित नोटिस, FIR और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।

सवाल- पुलिस या सरकारी एजेंसियां किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए कौन-सी औपचारिक कानूनी प्रक्रिया अपनाती हैं?

जवाब- किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को कानून के तहत निश्चित प्रक्रिया का पालन करना होता है।

  • सबसे पहले पुलिस के पास गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण या लिखित शिकायत (FIR) होनी चाहिए।
  • कई मामलों में मजिस्ट्रेट से गिरफ्तारी वारंट भी जरूरी होता है।
  • हालांकि कुछ संज्ञेय अपराधों में पुलिस वारंट के बिना भी गिरफ्तार कर सकती है।
  • गिरफ्तारी के समय पुलिस को अपना पहचान पत्र दिखाना और गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है।
  • साथ ही व्यक्ति को उसके अधिकारों की जानकारी दी जाती है, जैसे कि वकील लेने का अधिकार और परिवार को सूचना देना।
  • इसके बाद ही उसे कोर्ट में पेश किया जाता है।

सवाल- क्या पुलिस, CBI या कोई सरकारी विभाग वॉट्सऐप, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया पर नोटिस या अरेस्ट वारंट जारी कर सकता है?

जवाब- नीचे बिंदुवार समझिए–

  • नहीं, पुलिस, CBI या कोई भी सरकारी विभाग वॉट्सऐप, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के जरिए न तो अरेस्ट वारंट जारी कर सकता है और न ही आधिकारिक नोटिस दे सकता है।
  • भारत में सभी कानूनी नोटिस या वारंट लिखित रूप में ही जारी होते हैं और वे या तो सीधे व्यक्ति को दिए जाते हैं या उसके पते पर भेजे जाते हैं।
  • अगर कोई एजेंसी पूछताछ के लिए बुलाती है, तब भी उसके लिए आधिकारिक लेटरहैड पर नोटिस जारी होता है।
  • वॉट्सऐप या कॉल के जरिए केवल सूचना या समन की जानकारी दी जा सकती है, पर इसकी आधिकारिक कॉपी हमेशा कागज पर मिलती है।
  • इसलिए ऐसे कॉल या मैसेज को देखकर कभी घबराएं नहीं।

सवाल- जब ऐसा कोई कानून है ही नहीं तो लोग क्यों इन ठगों के झांसे में आ जाते हैं और अपने लाखों रुपए गंवा देते हैं?

जवाब- देखिए, ये पूरा खेल ‘डर’ और ‘गिल्ट’ पैदा करके साइकोलॉजिकल प्रेशर बनाने का होता है। ठग लोगों के मनोविज्ञान में दो चीजों को पकड़ते हैं–

  • डर
  • गिल्ट यानी अपराध बोध

एक कठोर सच्चाई ये भी है कि हमारे समाज में एकदम पाक–साफ, कानूनी और नैतिक तरीके से जीने और काम करने वाले लोग कम ही होते हैं। अमूमन लोग एक तरह के डर और गिल्ट में भी जीते हैं कि कभी कहीं वो फंस न जाएं। ये डर सामाजिक परवरिश और माहौल का भी नतीजा है। हम इस बात को लेकर कभी गांरटीड नहीं महसूस करते कि हमारे साथ कुछ गलत नहीं हो सकता क्योंकि हमने गलत नहीं किया। ऐसे डर बिना किसी तर्क और ठोस कारण के अमूमन लोगों के दिलों में छिपे रहते हैं–

  • पुलिस झूठे केस में फंसा सकती है।
  • भ्रष्टाचार का झूठा आरोप लग सकता है।
  • कोई भी झूठा मुकदमा हो सकता है।

साइबर अपराधियों ने इसी मनोविज्ञान को पकड़ा है और इसी का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन आपको ये तीन बातें समझनी और हमेशा याद रखनी हैं–

पॉइंट 1– स्कैमर्स आधिकारिक पहचान बताकर कॉल या वीडियो पर धमकाते हैं।

आपका डर– ऐसा होता है। ऐसा हो सकता है कि सरकारी लोग डराएं, धमकाएं।

तार्किक जवाब– डरना नहीं है। अगर आपने सचमुच कोई अपराध किया होगा तो पुलिस पकड़ेगी, सजा देगी, डराएगी–धमकाएगी नहीं। और अगर ऐसा करती है तो उस पुलिस के खिलाफ शिकायत और एक्शन का अधिकार आपके पास सुरक्षित है।

पॉइंट 2– स्कैमर्स ब्लैकमेल करते हैं, केस रफा–दफा करने के नाम पर पैसे मांगते हैं।

आपका डर– एक बार फिर आपका डर ये है कि ऐसा होता है, पुलिस ऐसा कर सकती है।

तार्किक जवाब– बिल्कुल डरना नहीं है। केस है तो फिर हो। पुलिस वारंट लेकर आए, गिरफ्तार करे, कानूनी प्रक्रिया पूरी करे। वीडियो कॉल पर पैसे नहीं देने हैं।

निष्कर्षकुल मिलाकर निष्कर्ष ये है कि

  • किसी भी तरह की धमकी, ब्लैकमेलिंग से बिल्कुल डरना नहीं है।
  • किसी तरह का प्रेशर नहीं लेना है।
  • अपने माइंड को कंट्रोल नहीं होने देना है।
  • तुरंत वो वीडियो कॉल काट देना है।
  • उस नंबर को ब्लॉक करना है।
  • साइबर क्राइम सेल में तत्काल इसकी रिपोर्ट करनी है।

सवाल- स्कैमर्स पीड़ितों पर कमरे में बंद रहने, किसी को न बताने या कैमरे पर बने रहने जैसी शर्तें क्यों लगाते हैं?

जवाब- ठग पीड़ित को कमरे में बंद रखते हैं, किसी से बात न करने के लिए कहते और कैमरे पर बने रहने को मजबूर करते हैं ताकि वे डर और शर्म से चुप बने रहें। इससे पीड़ित बिल्कुल अकेला पड़ जाता है। इससे धोखे को उजागर करना मुश्किल हो जाता है।

सवाल- हम कैसे खुद को अलर्ट रखकर डिजिटल अरेस्ट से बच सकते हैं?

जवाब- ग्राफिक में दिए सभी संकेत देखकर दिमाग में बात खटकनी चाहिए।

सवाल- कौन सी बातें हमेशा याद रखनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई इस स्कैम का शिकार न हो?

जवाब- नीचे लिखे 10 पॉइंट सबसे जरूरी सबक हैं। ये बातें याद रखें और अपने परिवार, दोस्तों, परिचितों सबको जरूर बताएं।

  • सरकारी ऑफिस या पुलिस कभी व्हाट्सऐप/वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
  • अगर कोई कॉल पर डराए-धमकाए तो घबराएं नहीं। असली पुलिस घर पर कागज देकर बुलाती है।
  • ओटीपी, बैंक पासवर्ड, UPI PIN किसी को भी नहीं बताना है, चाहे वो कोई भी क्यों न हो।
  • जो बोले अभी पैसे भेजो या किसी को मत बताना, समझ लो वही ठग है।
  • AnyDesk जैसे रिमोट कंट्रोल ऐप कभी डाउनलोड मत करो, ये सबसे बड़ा जाल है।
  • अगर मन में शंका हो तो कॉल तुरंत काटो और परिवार/दोस्त को बताओ।
  • फ्रॉड हो या शक हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करो या cybercrime.gov.in पर शिकायत करो।
  • याद रखें कि कानूनी प्रक्रिया समय लेती है, तुरंत गिरफ्तारी जैसी बातें सिर्फ ठगों की चाल है।
  • बच्चों को सिखाएं कि अनजान लिंक/कॉल/मैसेज पर भरोसा नहीं करना है।
  • बुजुर्गों को जरूर बताएं कि असली सरकारी अधिकारी कभी पैसे नहीं मांगते हैं।

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