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4 साल में 1124 प्रतिशत तक बढ़ा साइबर फ्रॉड…551 करोड़ रुपए ठगे !!!

4 साल में 1124 प्रतिशत तक बढ़ा साइबर फ्रॉड:साइबर ठगों ने 2025 में मप्र के 20.16 लाख लोगों को कॉल किए, 551 करोड़ रुपए ठगे

मध्यप्रदेश में साइबर ठगों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। बीते चार साल में साइबर फ्रॉड का काला कारोबार 1124 फीसदी तक बढ़ गया है। ठगों का सबसे बड़ा निशाना प्रदेश के बड़े शहरों के लोग बन रहे हैं। 2025 में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सीहोर और ग्वालियर में ठगों ने सबसे ज्यादा वार किया।

इन चार शहरों के 7573 लोगों से 165 करोड़ रुपए की ठगी हुई। अनूपपुर, अशोकनगर, दतिया और टीकमगढ़ जैसे जिलों में ठगी के मामले कम रहे। 1930 हेल्पलाइन और स्टेट साइबर क्राइम पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में ठगों ने प्रदेशवासियों से 45 करोड़ रुपए ठगे थे।

इसके बाद हर साल ठगों का नेटवर्क बढ़ता गया। साल 2025 में स्थिति बेहद गंभीर हो गई। पूरे प्रदेश में 62 हजार से ज्यादा लोग साइबर ठगों के जाल में फंस गए और ठगों ने कुल 551 करोड़ रुपए उड़ा लिए। औसतन हर दिन 178 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठग रोजाना 1.51 करोड़ रुपए की रकम ऐंठते रहे।

2022: भोपाल में 33, इंदौर में 11 करोड़ ठगे

साइबर ठगों ने 2022 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के 5982 लोगों को सबसे ज्यादा टारगेट कर 33 करोड़ 17 लाख रुपए ऐंठे थे। इंदौर के लोगों से 11 करोड़ 53 लाख रुपए की साइबर ठगी की गई। ग्वालियर में ठगों ने 6 करोड़ 10 लाख रुपए उड़ा दिए, जबकि जबलपुर 4 करोड़ 85 लाख रुपए की ठगी दर्ज की गई।

साल-दर-साल बढ़ता गया काला कारोबार

राष्ट्रीय साइबर रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म (एनसीआरपी) के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में प्रदेशवासियों से 45 करोड़ रुपए ठगे। 2023 में ठगी की राशि बढ़कर 196 करोड़ रुपए पहुंच गई। 2024 में यह आंकड़ा 465 करोड़ रुपए हो गया। वहीं 2025 में साइबर ठगों ने 551 करोड़ रुपए 62 हजार से ज्यादा लोगों के खातों से उड़ा लिए।

ठगी के नए-नए हथकंडों में फंस रहे लोग

साइबर ठग कभी बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी अपडेट करने का झांसा देते हैं तो कभी लॉटरी, इनाम या सरकारी योजनाओं के नाम पर पैसे ऐंठते हैं। फर्जी नौकरी, ऑनलाइन शॉपिंग, तत्काल लोन, सोशल मीडिया फ्रेंड या तकनीकी मदद के बहाने मोबाइल एक्सेस लेकर, क्यूआर कोड व यूपीआई लिंक भेजकर ठगी करते हैं।

स्टेट साइबर पुलिस ने 100 करोड़ रुपए वापस दिलाए

साइबर ठगी के बढ़ते मामले चिंता की बात है। 2025 में प्रदेश के 62 हजार से अधिक लोगों से 551 करोड़ रुपए की ठगी की गई। हालांकि साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच-पड़ताल के बाद 100 करोड़ रुपए पीड़ितों को वापस दिलाए हैं। ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सावधानी है।

मैसेज में आए लिंक, क्यूआर कोड या ऐप पर बिना जांच क्लिक न करें, क्योंकि 70% फ्रॉड की शुरुआत यहीं से होती है। सोशल मीडिया पर डीपी, मोबाइल नंबर और प्रोफाइल को पब्लिक न रखें। ठग इन्हीं जानकारियों से निशाना बनाते हैं। -प्रणय नागवंशी, एसपी राज्य साइबर सेल

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