दिल्ली

आखिरी सांस से पहले धुला खेल माफिया का दाग !!!

कांग्रेस आलाकमान की आंख का तारा थे कलमाड़ी, आखिरी सांस से पहले धुला खेल माफिया का दाग

सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस आलाकमान को सदैव प्रिय रहे. तब भी जब वे महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उनकी सक्रियता देख कर ही तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 1982 में ही राज्यसभा में बुला लिया था. बाद में वह लोकसभा के लिए भी चुने गए. तेजी से कामयाबी हासिल करने वाले कलमाड़ी पर जब भ्रष्टाचार का आरोप लगे तो उनका ग्राफ तेजी से नीचे गिर गया.

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का आज सुबह निधन हो गया.

सुरेश कलमाड़ी को एक राजनीतिक के तौर पर याद किया जाए या एक खेल प्रेमी के तौर पर अथवा भारतीय वायु सेना के कुशल पायलट के तौर पर! यह भ्रम सदैव बना रहेगा. वे 3 बार राज्यसभा में रहे और दो बार लोकसभा में. पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री रहे और राज्य मंत्री होते हुए रेल बजट भी पेश किया था. वह भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रहे और इसी नाते उन पर कई तरह के आरोप भी लगे. हाकी स्टार परगट सिंह ने तो उन्हें खेल माफिया करार दिया था.

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और इसी नाते उन्होंने ओलंपिक संघ से इस्तीफा भी दे दिया था. वे थोड़े नकचढ़े भी थे. एक बार उन्हें उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बगल वाली कुर्सी नहीं ऑफर की गई तो वे ओलंपिक समारोह की बैठक छोड़ कर चले गए थे. इसके बावजूद सुरेश कलमाड़ी कभी भुलाये नहीं गए.

कांग्रेस आलाकमान की आँख के तारे थे कलमाड़ी

वे कांग्रेस आलाकमान को सदैव प्रिय रहे. तब भी जब वे महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उनकी सक्रियता देख कर ही तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 1982 में ही राज्यसभा में बुला लिया था. एक मई 1944 को पुणे में जन्मे सुरेश कलमाड़ी 1960 में NDA (भारतीय रक्षा अकादमी) के लिए चुन लिए गए थे. 1972 तक वे भारतीय वायुसेना में रहे. 1978 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई में युवा विंग के अध्यक्ष बने. और फिर 1982 से 1995 तक राज्यसभा में रहे.

साल 1996 और 2004 में कलमाड़ी पुणे से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. इसके बाद वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) के अध्यक्ष रहे और 2010 के राष्ट्र्मंडल खेलों की आयोजन समिति के चेयरमैन भी रहे. लेकिन खेलों में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद वे शांत बैठ गए.

भ्रष्टाचार और निलंबन, अकेलेपन की मृत्यु

मृत्यु के करीब एक साल पहले फरवरी 2025 में उन्हें इस आरोप से क्लीनचिट मिल गई जब ED की क्लोजर रिपोर्ट अदालत में स्वीकार कर ली गई. इस रिपोर्ट में ED ने कहा था कि सुरेश कलमाड़ी के खिलाफ मनी लांड्रिंग के सबूत नहीं हैं. और इसी के साथ उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप का केस भी खत्म हो गया. किंतु कांग्रेस ने उन पर खेलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सस्पेंड कर दिया था. उनका राजनीतिक करियर भी समाप्त हो गया और खेलों में उनकी सक्रियता भी.

वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और छह जनवरी की तड़के उनका निधन हो गया. पार्टी से बर्खाश्त होने के बाद से वे बहुत अकेलापन महसूस कर रहे थे. पार्टी नेताओं ने भी उनसे दूरी बना ली थी. लेकिन पुणे में कांग्रेस को स्थापित करने वालों में सुरेश कलमाड़ी का अहम रोल था.

शरद के खालीपन को कलमाड़ी ने भरा

शरद पवार के जाने के बाद कलमाड़ी ने ही महाराष्ट्र में कांग्रेस को खड़ा किया. कलमाड़ी एक जमाने में शरद पवार के बेहद करीबी हुआ करते थे. लेकिन जब शरद पवार ने कांग्रेस छोड़ी तब कांग्रेस ने कलमाड़ी को शरद खेमे से तोड़ लिया. यही कांग्रेस की चतुराई रही. अन्यथा महाराष्ट्र से उसी समय कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाता. शरद के जाते ही कांग्रेस महाराष्ट्र में समाप्त होने की कगार पर थी. तब सुरेश कलमाड़ी शरद की छत्रछाया में कांग्रेस में सक्रिय थे.

मगर शरद के कांग्रेस से अलग होने के बाद कांग्रेस ने युवक सुरेश कलमाड़ी को पकड़ लिया. उन्हें युवक कांग्रेस की कमान सौंपी. कलमाड़ी ने कांग्रेस को निराश भी नहीं किया और महाराष्ट्र में कांग्रेस को सक्रिय करते रहे. कलमाड़ी के बढ़ते कद से महाराष्ट्र कांग्रेस के धाकड़ नेताओं ने उनके पर कतरने शुरू कर दिए किए. इसलिए कांग्रेस आलाकमान उन्हें केंद्र में लेकर आ गई. 1982 से 2009 तक वे संसद में रहे.

कलमाड़ी पर लगे खेल माफिया के आरोप

किंतु अति अहंकार और सक्रियता सुरेश कलमाड़ी को ले डूबी. उन पर इस तरह के आरोप लगाए गए कुछ से तो उनका कोई वास्ता नहीं था. हाकी के खेल को पुनर्स्थापित करने वाले सुरेश कलमाड़ी को हाकी टीम के कप्तान रहे परगट सिंह ने ही खेल माफिया बता दिया. मगर भारतीय ओलंपिक संघ में रहते हुए उन्होंने बहुत-सी मनमानी भी की. भारत में खेलों को प्रमोट करने के चक्कर में वे ऐसे-ऐसे खेलों को भारत में ले आए जिनका आम लोगों से कोई वास्ता नहीं था.

फॉर्मूला वन रेस को उन्होंने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में पेश किया. 2007 में जेपी समूह की कंपनी JPSK के साथ इंग्लैंड की फॉर्मूला वन रेस की कंपनी से 16 बिलियन डॉलर का करार हुआ. JPSK के साथ 13 प्रतिशत की हिस्सेदारी सुल्भा रियल्टी के साथ थी. और सुल्भा के एक निदेशक सुरेश कलमाड़ी के बेटे समीर कलमाड़ी थे.

दस महीने तिहाड़ जेल में भी गुजारे

इसके बाद से सुरेश कलमाड़ी पर अंगुलियां उठने लगीं. 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के वे चेयरमैन थे. तब इसकी तैयारियों के लिए जो उपकरण खरीदे गए उनकी कीमतों को लेकर हंगामा मचा और इस खरीद-फरोख्त की जांच की माँग उठी. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने इस घोटाले की जांच CBI को सौंप दी.

कलमाड़ी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और विपक्ष ने ओलंपिक संघ से उनके इस्तीफे की मांग की. एसी और ट्रेडमिल की अंधाधुंध खरीद में कलमाड़ी फंस गए. 2011 में CBI ने उनके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया. ओलंपिक संघ की अध्यक्षता भी उन्हें छोड़नी पड़ी और उसी साल अगस्त में कांग्रेस ने उनकी पार्टी सदस्यता निलंबित कर दी. साल 2013 की जुलाई में एशियन एथेलिटिक्स एसोसिएशन का चुनाव भी वे हार गए. इसके बाद उन्हें 10 महीने दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी रहना पड़ा.

बहुमुखी प्रतिभा वाले राजनेता का दुखद अंत

सुरेश कलमाड़ी का आज तड़के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में निधन हो गया. इस तरह बहुमुखी प्रतिभा संपन्न एक राजनेता का दुखद अंत हुआ. वे जहां भी रहे आकाश को छुआ. आखिर वे भारतीय वायु सेना के कुशल पॉयलट रह चुके थे और प्रशिक्षक भी. खेलों में उनकी रुचि थी और राजनीति के हर दांव-पेच से वे वाकिफ भी थे.

किंतु अपने अहंकारी स्वभाव के कारण उन्होंने राजनीति में अपने शत्रु भी खूब बनाये. पार्टी के बाहर भी और भीतर भी. अन्यथा 27 सालों तक राज्यसभा और लोकसभा का सदस्य रहने वाला राजनेता इस तरह गुमनामी में चला जाएगा, किसी ने सोचा नहीं था. राजनीति त्वरित फैसले और चालाकी से चलती है किंतु एक राजनेता को कभी भी अहंकारी और उग्र नहीं होना चाहिए, यह भूल सुरेश कलमाड़ी कर बैठे थे.

 

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