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कैसे सत्य साईं के श्रद्धालुओं का गढ़ बना वेनेजुएला?

कैसे सत्य साईं के श्रद्धालुओं का गढ़ बना वेनेजुएला? मादुरो से अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी तक दंडवत

Sathya Sai Baba Movement in Venezuela: वेनेजुएला तक किस कदर सत्य साईं बाबा का प्रभाव है, यह पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुराे और वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी की वायरल तस्वीरों से समझा जा सकता है. एक किताब के अनुवाद ने कैसे वेनेजुएला तक सत्य साईं बाबा के विचारों को पहुंचा दिया, इसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है. आज हजारों की संख्या में वेनेजुएला में उनके समर्थक हैं. जानिए, कैसे सत्य साईं के श्रद्धालुओं का गढ़ बना वेनेजुएला, जिनके सामने मादुरो से अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी तक दंडवत हैं.

कैसे सत्य साईं के श्रद्धालुओं का गढ़ बना वेनेजुएला? मादुरो से अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी तक दंडवत

वेनेजुएला में सत्‍य साईं बाबा के प्रभाव की नींव 1972 में पड़ी.

हमले के बाद वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिका की गिरफ्त में हैं. उधर, वेनेजुएला में अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में डेल्सी रोड्रिगेज कमान संभाल रही हैं. लेकिन दोनों में एक कॉमन कनेक्शन यह भी है कि वो सत्य साईं बाबा के भक्त हैं. हालिया घटनाक्रम के बीच निकोलस मादुरो और डेल्सी की वो तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें साफ दिख रहा है कि दोनों ही भारतीय अध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा के कितने बड़े भक्त हैं.

सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के अनुसार, रोड्रिग्ज ने हाल के वर्षों में दो बार आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में सत्य साईं बाबा के समाधि मंदिर, प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया. विदेश मंत्रालय के अनुसार, वेनेजुएला में विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भारतीय गुरुओं और संगठनों ने स्थापित किए हैं, जिनमें सत्य साईं बाबा, ब्रह्मा कुमारीज और राधा स्वामी के अनुयायी शामिल हैं.

अब सवाल है कि कैसे सत्य साईं बाबा के विचार वेनेजुएला तक पहुंचे और यह देश उनके अनुयायियों का गढ़ बन गया. मादुरो से लेकर वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी तक उनकी भक्त हैं.

वेनेजुएला तक कैसे पहुंचे सत्य साईं बाबा के विचार?

इसकी शुरुआत 1972 में हुई जब वेनेजुएला से अर्लेट मेयर, एलिजाबेथ पामर और उनका परिवार सत्य साईं बाबा के दर्शन के लिए उनके आश्रम भारत आए. उन्होंने 1968 और 1970 में भी उनके दर्शन किए थे. जब उन्हें सत्य साईं के साथ यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ तो बाबा के विचारों का उन पर गहरा असर पड़ा. बाबा के आश्रम में विदेशी यात्रियों के लिए जीवन यापन की स्थितियां काफी अलग थीं. वहां पर न तो पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक शौचालय थे, न हीं हाइटेक सुविधाएं.

अर्लेट ने सनातन सारथी का केवल एक ही अंक पढ़ा था और वह साईं बाबा के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं. लेकिन जब उन्होंने मंदिर में शाम की आरती के बाद बालकनी से उन्हें दर्शन देते हुए देखा , तो उसे अपने अंदर ऊर्जा की एक लहर महसूस हुई और वह रोने लगीं.

अगले दिन, 24 दिसंबर 1972 को, सत्य साईं बाबा ने अपना प्रसिद्ध प्रवचन दिया जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे वही हैं जिनके बारे में यीशु ने कहा था, “जिसने मुझे भेजा है वह फिर आएगा.” ठीक अगली शाम, एक विदेशी फ्लैट में आया और पूछा कि क्या अनुवादक मौजूद है. अर्लेट ने कहा कि वह पेशे से अनुवादक हैं.

उस व्यक्ति ने कहा, “अच्छा, तो आप स्वामी जी की पुस्तकों का अनुवाद कर सकती हैं।” उन्होंने ‘साईं बाबा, मैन ऑफ मिरेकल्स’ का सुझाव दिया. यह विचार आकार लेने लगा, लेकिन उसने सोचा कि पहले स्वामी जी से अनुमति ले लेनी चाहिए.

Gail Muniz From Mexico And Arlette Meyer From Venezuela With Swami

सत्य साईं बाबा के साथ मेक्सिको की गेल मुनिज़ (बाएं) और वेनेजुएला की अर्लेट मेयर.

एक साक्षात्कार के दौरान स्वामी ने उनसे पूछा, आपका नाम क्या है? जब उन्होंने उत्तर दिया, अर्लेट, तो स्वामी ने मज़ाक में कहा, अर्लेट, ऑमलेट नहीं, जिससे सब लोग हंस पड़े. उन्होंने बाबा से पूछा कि क्या वह पुस्तक का स्पेनिश में अनुवाद कर सकती हैं, और उन्होंने कहा, हां, कर दो, यह तुम्हारा कर्तव्य है.

दस महीने बाद, अर्लेट स्पेनिश में अनुवादित पुस्तक ‘मैन ऑफ मिरेकल्स ‘ लेकर प्रशांति निलयम लौट आईं, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि इसे प्रकाशित कैसे किया जाए. संयोगवश उनकी मुलाकात मैक्सिको के गेल और लुइस मुनिज़ से हुई, जो बाबा की कुछ पुस्तकों का स्पेनिश में अनुवाद और प्रकाशन करने की अनुमति लेने आए थे.

उन्होंने लुइस को अपने अनुवाद की एक फोटोकॉपी दी और कहा, “यह पहली प्रति है.” 1974 में, एक साक्षात्कार के दौरान, स्वामी ने अपने बारे में प्रकाशित पहले स्पेनिश अनुवाद को आशीर्वाद दिया और अर्लेट को सत्य साई स्पीक्स श्रृंखला का अनुवाद जारी रखने के लिए कहा. इसी यात्रा के दौरान स्वामी ने उन्हें एक साईं केंद्र खोलने का निर्देश भी दिया.

जब बाबा ने पूछा- केंद्र में कौन गा रहा है?

सत्य साईं संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य डॉ. हिसलोप से परामर्श करने के बाद, अर्लेट ने 22 अगस्त, 1974 को राजधानी कराकस में वेनेजुएला का पहला साईं केंद्र खोला. एक साक्षात्कार में, स्वामी ने पूछा कि साई केंद्र कैसा चल रहा है और उन्हें बताया गया कि बहुत कम लोग आ रहे हैं. उन्होंने उत्तर दिया, “हमें संख्या नहीं, गुणवत्ता चाहिए.” जब उन्होंने पूछा कि केंद्र में कौन गा रहा है, तो उन्हें बताया गया, “आप, स्वामी.” तब उन्होंने समूह को टेप का उपयोग करने के बजाय स्वयं भजन गाने के लिए प्रोत्साहित किया, और तभी समूह ने गंभीरता से भजन सीखना शुरू किया.

Nicholas Maduro With Satya Sai

सत्य साईं बाबा की शरण में पहुंचे थे निकोलस मादुरो.

वेनेजुएला में साईं साहित्य का स्पेनिश संग्रह बढ़ता गया

छोटे से साईं केंद्र में कम ही लोग आते थे, लेकिन जब मेक्सिको से ‘साईं बाबा, मैन ऑफ मिरेकल्स’ की पहली खेप आई और वितरित की गई, तो धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ने लगी. अर्लेट ने अनुवाद का काम जारी रखा और जल्द ही साईं साहित्य का स्पेनिश संग्रह बढ़ता गया. सत्य साईं स्पीक्स खंड I (1977), गीता वाहिनी (1978), समर रोज़ेज़ ऑन द ब्लू माउंटेंस (1976), भगवान श्री सत्य साईं बाबा के साथ वार्तालाप (1980), सत्य साईं स्पीक्स खंड II (1980) और उसके बाद के वर्षों में सत्य साईं स्पीक्स के अन्य संस्करण, 1990 में खंड VII तक प्रकाशित हुए. साईं केंद्र का पता और टेलीफोन नंबर पुस्तकों में दर्ज था, इसलिए धीरे-धीरे अधिक लोग आने लगे. शुरुआत में, यह सारा काम टाइपराइटर पर किया जाता था, क्योंकि 1985 तक अर्लेट के पास कंप्यूटर नहीं था.

आश्रम में अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी का वायरल वीडियो

 

सिर्फ प्रवचनों तक सीमित नहीं रहा संगठन

अर्लेट ने 1975 में वेनेजुएला की प्रतिनिधि के रूप में साईं संगठनों के दूसरे विश्व सम्मेलन में भाग लिया. उस समय, मंदिर के सामने के हिस्से को पूरी तरह से नया रूप दिया गया था, अतिरिक्त कमरे जोड़े गए थे, पूर्णा चंद्र सभागार को सजाया जा रहा था, और 50 फुट ऊंचे सर्व धर्म स्तूप का निर्माण चल रहा था, जिसका बाबा ने 23 नवंबर को उद्घाटन किया था. भीड़ इतनी अधिक थी कि स्वामी जी के लिए हिलना तक मुश्किल हो गया था.

संगठन का दायरा बढ़ने लगा और हर महीने के आखिरी शनिवार को एक सार्वजनिक सभा आयोजित की जाती थी जिसमें अर्लेट द्वारा अपनी पहली यात्रा के दौरान फिल्माई गई फिल्म दिखाई जाती थी. इसके अलावा, गुरुवार की सभाओं में स्वामी के संदेशों का संक्षिप्त पाठ किया जाता था. भजन सीखने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए संस्कृत में 271 भजनों और स्पेनिश में कुछ भजनों वाली एक भजन पुस्तिका तैयार की गई थी. इन सब बातों का अपना प्रभाव पड़ा और नए लोग आने लगे. यहां तक कि संख्या इतनी बढ़ गई कि अपार्टमेंट में जगह ही नहीं बची.

धीरे-धीरे संगठन का जुड़ाव यहां के शिक्षा मंत्रालय के साथ हुआ तो सत्य साईं बाबा के विचार पूरे देश और पड़ोसी देशों तक पहुंचने लगे. जरूरतमंदों के लिए यहां लगने वाले कैम्पों ने संगठन की प्रसिद्धी को बड़ी आबादी तक पहुंचा दिया. कैंम्पों का मकसद बुजुर्गों की देखभाल करना. बच्चों के साथ समय बिताना. जैसी एक्टिविटी कराई जाने लगी. धीरे-धीरे वेनेजुएला के राजनीतिज्ञ और जानी-मानी शख्सियत सत्य साईं बाबा के प्रवचन को सुनने के लिए पहुंचने लगे.

Venezuela Acting President Rodriguez Is Sai Baba Devotee, Visited Andhra Ashram Twice

डेल्सी रोड्रिगेज के सत्य साईं आश्रम दौरे की तस्वीर.

अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी का भारत दौरा

डेल्सी ने 2023 और 2024 में सत्य साईं बाबा आश्रम का दौरा किया. 26 अक्टूबर, 2024 को अपनी हालिया यात्रा के दौरान, डेल्सी रोड्रिगेज ने भगवान श्री सत्य साई बाबा को प्रणाम करने के लिए प्रशांति निलयम की यात्रा की थी. श्री सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी आर.जे. रत्नाकर ने रोड्रिगेज़ का स्वागत किया और उन्हें आश्रम का भ्रमण कराया. डेल्सी ने प्रशांति निलयम के दो प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों, गर्भगृह और शांति भवन में समय बिताया और कहा कि सत्य साई बाबा की दिव्य उपस्थिति में रहने से उन्हें “शांति और सुकून का अनुभव” हुआ.

यह उनकी पहली यात्रा नहीं थी. इससे पहले, 5 अगस्त, 2023 को, डेल्सी ने प्रशांति निलयम का दौरा किया था, जब वह जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले वेनेजुएला के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भारत में थीं.

मादुरो कैसे बने बाबा के भक्त?

साईं बाबा, जिन्हें विश्वभर में लाखों अनुयायियों के साथ “चमत्कारों का स्वामी” कहा जाता था. भक्तों का मानना ​​था कि उनमें बीमारों को ठीक करने से लेकर वस्तुओं को कहीं से भी प्रकट करने की क्षमताएं थीं. कराकस के मिराफ्लोरेस पैलेस में मादुरो के निजी कार्यालय में आने वाले मेहमानों को वहां पूर्व नेताओं ह्यूगो चावेज़ और साइमन बोलिवर के चित्रों के साथ साईं बाबा का एक बड़ा फ्रेम वाला चित्र दिखाई देता है. खबरों के मुताबिक, मादुरो अपनी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के माध्यम से साई बाबा के कट्टर अनुयायी बन गए. सिलिया फ्लोरेस खुद एक वकील और सांसद रही हैं, जो मादुरो से शादी करने से बहुत पहले से ही उनकी भक्त थीं.

 

फ्लोरेस ही थीं जो मादुरो को शादी से बहुत पहले, 2005 में साईं बाबा से मिलवाने के लिए भारत लाई थीं. उस समय फ्लोरेस पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ की वकील थीं और मादुरो विधानसभा के अध्यक्ष थे. बाद में, जब मादुरो को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया, तो फ्लोरेस ने अध्यक्ष पद से उनका स्थान लिया. 2005 की एक तस्वीर में मादुरो और फ्लोरेस, जो साईं बाबा के अनुयायियों में से पहले थे, भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में स्थित उनके प्रशांति निलयम आश्रम में गुरु से मुलाकात के दौरान जमीन पर घुटने टेकते हुए दिखाई दे रहे हैं. कई तस्वीरों और वीडियो में रोड्रिगेज को 2023 और 2024 में आश्रम में आध्यात्मिक गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दिखाया गया है.

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