3200 करोड़ की ठगी:जिन खातों में आई साइबर फ्रॉड की रकम, वे IT फर्म के नाम थे

फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में 3200 करोड़ से ज्यादा की ठगी करने वाले मास्टर माइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी के खिलाफ अब रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की तैयारी है।
मप्र एसटीएफ ने हाल में लविश और उसके 13 गुर्गों के खिलाफ इंदौर की कोर्ट में 19 हजार पेज का चालान पेश किया है। इसमें बताया गया है कि ठगी की रकम जिन कंपनियों के खातों में पहुंची, उनका रजिस्ट्रेशन मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स/रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और बिजनेस सॉल्यूशन के नाम पर कराया गया था।
इन कंपनियों के खातों में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड ही नहीं बल्कि डिजिटल अरेस्ट, क्रिप्टो करंसी फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड, लॉन फ्रॉड, जॉब फ्रॉड की रकम भी आई। इसका खुलासा केंद्र के समन्वय पोर्टल पर दर्ज फ्रॉड की शिकायतों से हुआ है। मामले में गिरफ्तार किए गए चार आरोपी जेल में हैं। बाकी 9 को जमानत मिल चुकी है।
कई राज्यों में 15 अपराध दर्ज, ब्लू कॉर्नर नोटिस पहले से जारी
- लविश की कंपनी के खिलाफ हिमाचल, महाराष्ट्र, दिल्ली, असम, यूपी, चंडीगढ़, हरियाणा और राजस्थान में कुल 15 अपराध दर्ज हैं, जांच कई राज्यों में चल रही है।
- आरोपी यॉर्कर वायएफएक्स और बोटब्रो इवेंट के नाम पर विदेश यात्राएं बुक कराते थे, ठगी की रकम ठिकाने लगाने में एनसीआर की कुछ कंपनियों की भूमिका सामने आई है।
ऐसे समझें फर्जीवाड़े का खेल
- अकेले रेनेट टेक्नोलॉजी प्रालि के खातों में जनवरी-2023 से अगस्त 2025 तक 2062 करोड़ रुपए जमा हुए। 2022 करोड़ निकाल भी लिए।
- किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशन प्रालि के खातों में 2023 से 2025 की अवधि में 734 करोड़ रुपए क्रेडिट हुए। इनमें 651 करोड़ रुपए निकाले जा चुके हैं। रेनेट और किंडेंट दोनों का रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और बिजनेस सॉल्यूशन के नाम पर हुआ
- एसटीएफ एआईजी नवीन कुमार चौधरी ने बताया कि अब तक 254 करोड़ रुपए फ्रीज कराए जा चुके हैं।
ये है पूरा मामला : उप्र निवासी नवाब उर्फ लविश चौधरी ने भारत में अपंजीकृत यॉर्कर कैपिटल, वायएफएक्स, टीएलसी कॉइन और बोटब्रो के जरिए निवेश पर 6-8 फीसदी तक का मुनाफा दिखाकर कई लोगों से मोटी रकम ऐंठी। यह काम उसने देशभर में खड़े किए अपने एजेंट्स के जरिए किया।
प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका
1. मनोरंजन राय: रेनेट टेक्नोलॉजी का डायरेक्टर बक्सर निवासी मनोज ग्रेटर नोएडा से कंपनी चलाता था। 2. पंकज कुमार गुंजन: किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशन का डायरेक्टर। बिहार निवासी पंकज नोएडा से काम करता था। 3. राहुल कुमार यादव: बिहार निवासी राहुल भी किंडेंट का डायरेक्टर है। अबू धाबी में टूर्नामेंट में गई यूपी नवाब क्रिकेट टीम की यात्रा का भुगतान इस कंपनी ने किया। 4. लोकेश पाल: मंडीदीप का लोकेश सोशल मीडिया के जरिए लविश की कंपनी की मार्केटिंग करता था। 4 बार विदेश गया। 6. विजय रावत: इंदौर के ठेकेदार विजय ने फरियादी को दुबई में लविश द्वारा कराए गए इवेंट की जानकारी दी। विजय चार बार विदेश जा चुका है। 7. रीतेश झा: जबलपुर का एमआर रीतेश लविश की कंपनी में निवेश के लिए वीडियो अपलोड करता था।
अन्य आरोपी-अमन यादव(हरियाणा), दीपक शर्मा (दिल्ली), मदन मोहन कुमार (दिल्ली), कृष्ण कुमार (ग्रेटर नोएडा), महबूब आलम (झारखंड), मुकेश कुमार (भिलाई), बेनुधर मोहंतो (ओडिशा)।

