मध्य प्रदेश

भिंड कलेक्टर केएल मीणा पर चल रहे कोर्ट की अवमानना का मामला…अदालत में झूठा बयान देने का आरोप !!!

भिंड कलेक्टर पर चल रहे कोर्ट की अवमानना का मामला
हाईकोर्ट ने कहा- जिस अधिकारी पर अदालत में झूठा बयान देने का आरोप, उसे पक्षकार बनाना जरूरी

ग्वालियर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को भिंड कलेक्टर केएल मीणा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई किए जाने से जुड़े राज्य शासन की अपील पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जिस अधिकारी अदालत के समझ भी झूठा बयान देने का आरोप है, उसे इस अपील में पक्षकार बनाना जरूरी है।

साथ ही कहा कि कलेक्टर भिंड के समर्थन में शपथ पत्र भी पेश किया जाना चाहिए। यह पूरा मामला दंदरौआ धाम ट्रस्ट को 56 हेक्टेयर जमीन के पट्‌टे से जुड़ा है। अब इस मामले में मंगलवार (13 जनवरी) काे भी कोर्ट लगेगी और सुनवाई होगी।

एकलपीठ के आदेश को दी थी चुनौती

दरअसल, यह पूरा मामला राज्य सरकार द्वारा दायर की गई उस रिट अपील से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट की एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी गई है। जिसमें भिंड कलेक्टर केएल मीणा के खिलाफ अदालत के समझ कथित रूप से झूठा बयान देने पर अवमानना की कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

साथ ही अलग से कार्रवाई पंजीबद्ध करने के निर्देश जारी किए गए थे। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि उक्त नोटिस में शपथ पर कथित गलत बयान देने के आधार पर जारी हुआ था।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि अवमानना की कार्यवाही सीधे केएल मीणा के विरुद्ध प्रस्तावित है, इसलिए वे नामित अवमानना कर्ता हैं और उन्हें अपील में अनिवार्य रूप से पक्षकार बनाया जाना चाहिए।

साथ ही अदालत ने राज्य सरकार के वकीलों से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि अपील और स्थगन आवेदन के समर्थन में संबंधित अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करना क्यों आवश्यक नहीं समझा गया। इन बिंदुओं पर पक्षकारों को बहस करने का अवसर दिया गया है।

ऐसे समझिए पूरा मामला

दरअसल, भिंड जिले में दंदरौआ धाम ट्रस्ट को 56 हेक्टेयर भूमि का तहसीलदार ने पट्टा दे दिया। इस पट्टे की जानकारी कलेक्टर को मिली तो पट्टा निरस्त कर दिया। दंदरौआ धाम ने संभागायुक्त के यहां आवेदन किया, जिसे संभागायुक्त ने निरस्त कर दिया। इसके बाद राजस्व मंडल में आवेदन लगाया।

राजस्व मंडल ने दंदरौआ धाम के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ शासन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन यह याचिका खारिज हो गई और इस याचिका को फिर से सुनवाई में लाने के लिए आवेदन लगाया।

भिंड कलेक्टर ने इस मामले में गलत तथ्य कोर्ट के सामने रखे, जिसको लेकर कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी किया था।

 

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