BMC चुनाव नतीजों के बाद उद्धव की शिंदे को सीधी चुनौती …शिवसेना ने मुंबई को दिए 23 मेयर !!!
शिवसेना ने मुंबई को दिए 23 मेयर, अब देखते हैं…’ BMC चुनाव नतीजों के बाद उद्धव की शिंदे को सीधी चुनौती
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में बीजेपी और शिंदे गुट की महायुति की जीत के बाद शहर में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ लौट आई है। शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को होटल में स्थानांतरित कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। उद्धव ठाकरे ने परिणामों को स्वीकार करते हुए शिंदे को चुनौती दी है। अब सभी की निगाहें मेयर पद पर टिकी हैं, जिस पर महायुति के भीतर खींचतान जारी है।
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- महायुति की जीत के बाद शिंदे गुट ने पार्षदों को होटल भेजा।
- उद्धव ठाकरे ने BMC चुनाव परिणाम स्वीकारे, शिंदे को चुनौती।
- मेयर पद को लेकर शिंदे गुट और बीजेपी में खींचतान जारी।
नई दिल्ली। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट की महायुती की शानदार जीत के बाद शहर की राजनीति में फिर से रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर लौट आया है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करते हुए कहा कि नगर निगम चुनाव तो खत्म हो गए, लेकिन असली राजनीति अभी बाकी है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने BMC में अपना अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिससे ठाकरे परिवार को अपने मजबूत किले में करारा झटका लगा है। अब सभी की निगाहें शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर टिकी हुई हैं।
शिंदे, जिनके 2022 के विद्रोह के बाफ शिवसेना को दो खेमों में बंट गई और उद्धव ठाकरे की महा विकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया, अब BJP के साथ गठबंधन में हैं।
इस चुनाव में शिंदे गुट ने 29 सीटें हासिल की हैं। परिणामों के जश्न के बीच शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को मुंबई के एक 5 स्टार होटल में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स आमतौर पर तब उभरती है जब चुनावी नतीजे राजनीतिक समीकरणों में उथल-पुथल की आशंका पैदा करते हैं। शिंदे गुट के इस फैसले को समझने के लिए BMC के आंकड़ों पर नजर डालते हैं।
227 वार्डों वाली इस निकाय में बहुमत के लिए 114 सीटें जरूरी हैं। BJP ने 89 और शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें जीतीं, जो कुल 118 बनती हैं, यह बहुमत से काफी ऊपर है।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने तीन सीटें जीतीं और संभवतः गठबंधन का समर्थन करेगी।
विपक्षी खेमे में शिवसेना (UBT) ने 65, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने छह और NCP (शरद पवार) ने एक सीट हासिल की इआसे विपक्षी खेमे में कुल 72 सीट आईं हैं।
कांग्रेस की 24, AIMIM की आठ और समाजवादी पार्टी की दो सीटों को जोड़ें तो विपक्ष की कुल संख्या 106 पहुंच सकती है, जो बहुमत से आठ कम है।
हालांकि, इन दलों की वैचारिक असमानताओं को देखते हुए ऐसा गठजोड़ बनना मुश्किल लगता है, लेकिन संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर
शिंदे गुट इस गणित को देखते हुए कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। अगर विपक्ष एकजुट हो गया, तो उन्हें महायुति से महज आठ पार्षदों की जरूरत होगी जो पक्ष बदलकर समीकरण पलट सकें। लेकिन क्या शिंदे सिर्फ ठाकरे गुट से ही डरे हुए हैं?
उद्धव ठाकरे का कहना है कि शिंदे वास्तव में BJP के साथ हैं। उन्होंने कहा, ‘जो लोग एक बार पार्टी छोड़ चुके हैं, वे फिर से ऐसा कर सकते हैं।’ मेयर पद को लेकर NDA में खींचतान जारी है।
BJP अपने किसी पार्षद को मेयर बनाकर लाभ उठाना चाहती है, जबकि शिंदे पर शीर्ष पद दावा करने का दबाव है। दशकों से मुंबई में शिवसेना का मेयर रहा है, और इसे खोना बाल ठाकरे की विरासत पर उनके दावे को कमजोर करेगा।
पिछले साल राज्य चुनावों के बाद शिंदे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और देवेंद्र फडणवीस के उप बनकर संतोष करना पड़ा। अब BMC मेयर गंवाने से उनकी छवि को और नुकसान होगा, जो ठाकरे परिवार को हमले का मौका देगा।
इसलिए, राजनीतिक चर्चाओं में यह बात जोर पकड़ रही है कि शिंदे का रिसॉर्ट कदम न सिर्फ विपक्ष को रोकने के लिए है, बल्कि सहयोगी BJP को संदेश देने के लिए भी है।
हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि NDA नेता, जिसमें वे और शिंदे शामिल हैं, मेयर मुद्दे पर फैसला लेंगे।

