नियम बदले…:अब एसआई ही नहीं, एएसआई भी कर सकेंगी गंभीर महिला अपराधों में एफआईआर
पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने महिलाओं से जुड़े गंभीर अपराधों की विवेचना और एफआईआर दर्ज करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ये संशोधन देशभर में 1 जुलाई 2024 से लागू नए कानूनों के 18 महीने बाद किए गए हैं।
अब कई मामलों में केवल महिला सब इंस्पेक्टर द्वारा ही जांच कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके तहत योग्य एएसआई को भी जांच का अधिकार दिया गया है। साथ ही हर टीआई को महीने में कम से कम एक लैंगिक अपराध की विवेचना करना अनिवार्य होगा।
हालांकि नए कानूनों में महिला और बाल अपराधों की जांच के लिए एसआई या इंस्पेक्टर स्तर के अफसर को ही पात्र माना गया था। अब स्पेशल डीजी महिला सुरक्षा अनिल कुमार ने इससे जुड़े नए निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में 281 महिला इंस्पेक्टर और 831 महिला सब इंस्पेक्टर ही पदस्थ हैं। विभाग को 2090 महिला सब इंस्पेक्टर की आवश्यकता बताई गई है। 978 महिला एसआई के नए पदों की दरकार है।
सिर्फ एक रैंक नीचे के अफसर तक ही छूट
जहां तय न्यूनतम रैंक की अधिकारी मौजूद नहीं, वहां एसपी एक रैंक नीचे के अधिकारी को कारण सहित अधिकृत करेंगे।{यह अधिकृत कार्रवाई एक पद से ज्यादा नीचे नहीं होगी। मसलन- बलात्कार की विवेचना के लिए न्यूनतम रैंक एसआई है, लेकिन एसआई उपलब्ध न होने पर एएसआई को लिखित आदेश से अधिकृत किया जा सकेगा। हवलदार को नहीं।
अपहरण व लैंगिक अपराधों पर नई व्यवस्था
- नाबालिगों के अपहरण के मामले सामान्यतः 4 महीने बाद डीएसपी/एएसपी को ट्रांसफर होते थे।
- अब दो महीने पूरे होते ही ऐसे मामलों की विवेचना थाना प्रभारी खुद करेंगे।


