निगम में वेतन संकट फिर भी 300 करोड़ संपत्तिकर वसूली बकाया ?
एक तरफ नगर निगम में वेतन का हर महीने संकट का सामना कर रहा है। वहीं निगम का संपत्तिकर अमला नई संपत्ति की आईडी बनाने में व्यस्त है। जबकि पिछले 29 सालों की बकाया राशि को वसूलने के लिए निगम के उपायुक्त, आरआई और कर संग्राहकों की रुचि नहीं है। यहीं कारण है कि उक्त सालों की बकाया डिमांड राशि 300 करोड़ रुपए से अधिक तक जा पहुंची है।
संपत्तिकर से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि उक्त राशि की निरंतर वसूली होती तो निगम को पैसों की कमी से नहीं जूझना पड़ता। वहीं निगम के पास वर्तमान वर्ष की डिमांड 130 करोड़ बनी है। ये भी निगम को वसूलना। इस तरह आंकड़ा 450 करोड़ रुपए तक हो सकता है।
निगम की सीमा में नए वार्ड 61 से 66 बने है। इसके अलावा वार्ड-60, 61-66 में भी नई कॉलोनियों के निर्माण होते रहते है। इस साल के 8 हजार नई संपत्तियों का नामांतरण हो चुका है, जबकि पुरानी संपत्तियों से बकाया वसूली नहीं कर रहा है।
निगम में दर्ज 3.48 लाख में से 66 हजार डुप्लीकेट या बोगस निकली
निगम के आंकड़ों के अनुसार संपत्तिकर विभाग में 3.48 लाख संपत्तियां दर्ज है। इनका परीक्षण कराने पर 66 हजार ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं। जिनका साल 1997 से टैक्स नहीं दिया गया है। इनकी डिमांड 260 करोड़ रुपए है। मौके पर उनका भवन का नामांकन तक नहीं मिला है। इसलिए ये बोगस और डुप्लीकेट संपत्तियां हैं। इन्हें हटाया जा रहा है। वहीं सूत्र बताते हैं कि साल 2003 में एजीएल कंपनी ने निगम के 60 वार्डों में संपत्ति की सर्वे में से 50 प्रतिशत ही काम किया था।
अभी तक 75 करोड़ रुपए की हुई वसूली
निगम के आंकड़ों के अनुसार अभी तक संपत्तिकर 75 करोड़ रुपए आया है। जनवरी का महीना खत्म होने को है। सिर्फ दो महीने शेष है। ऐसे में बीते साल वसूली का रिकार्ड को पार करना भी मुश्किल है, क्योंकि अधिकांश वार्डों में टारगेट से पीछे वसूली चल रही है। उक्त वसूली में 23 करोड़ रुपए बकाया राशि और 52 करोड़ रुपए करंट की वसूली बताई जा रही है। बीते साल 106 करोड़ रुपए की वसूली पूरे वित्तीय वर्ष में हुई थी।
निगम में 3.48 लाख से ज्यादा संपत्तियां
नगरीय सीमा के 66 वार्डों में अभी तक 3.48 लाख संपत्तियां निगम में दर्ज हो चुकी है। अब उक्त संपत्तियों को अपडेट करने के लिए सेटेलाइट सर्वे चल रहा है। इसकी वजह से निगम एरिया संपत्तियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इनमें सरकारी संपत्तियां भी शामिल है। निगम को 150 सरकारी विभाग की संपत्तियों से 200 करोड़ों रुपए की राशि वसूल करना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के आफिस, शैक्षणिक संस्थान आदि शामिल है।
बोगस और डुप्लीकेट आईडी बंद कर रहे हैं, बकाया से संपत्तिकर की वसूली होगी
निगम में 3.48 लाख संपत्तियों में से 66 हजार आईडी डुप्लीकेट और बोगस निकली है। इसमें शासकीय सेवा प्रभार वाली भी हो सकती है। इन्हें बंद कराया जा रहा है। इनमें से कई आईडी ऐसी है, जो एजीएल कंपनी सर्वे में हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं है। उस समय आईडी बन गई है लेकिन टैक्स नहीं दे रहे है। ऐसी पूर्व में बनी सभी आईडी की यदि संपत्ति मौके पर है तो टैक्स लिया जाएगा। इसके अलावा 200 करोड़ के लगभग शासकीय संपत्तियों पर सेवाकर बकाया है। उनसे वसूला जाएगा। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि


