MBBS की फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर !!!
केस 1 : चार साल पहले पाली पुलिस ने फर्जी डॉक्टर मोहनलाल भाटी को गिरफ्तार किया। जांच में भाटी के MBBS की डिग्री फर्जी निकली।
केस 2 : दो साल पहले नानजी राम चौधरी नाम के फर्जी डॉक्टर ने ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई। जांच हुई तो फर्जी डिग्री का सच सामने आया।
चौंकाने वाली बात ये नहीं कि इन लोगों के पास MBBS की फर्जी डिग्री थी या इन्होंने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करा लिया। चौंकाने वाली बात ये है कि सच सामने आने के बावजूद ये फर्जी आज भी जिम्मेदारों की नाक के नीचे अस्पताल और क्लिनिक खोलकर मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने मरीज बनकर इन्हें कैमरे पर एक्सपोज किया।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

फर्जी डॉक्टर-1 : मोहनलाल भाटी भास्कर टीम को इन्वेस्टिगेशन के दौरान पता चला कि पाली के सबसे बड़े बांगड़ हॉस्पिटल के सामने मोहनलाल भाटी खुद को डॉक्टर बताकर अपना क्लिनिक चला रहा है। क्लिनिक में आने वाले ज्यादातर मरीज गांव के होते हैं।
मोहनलाल ने क्लिनिक में लैब भी बना रखी है। भास्कर रिपोर्टर मरीज बनकर क्लिनिक पर पहुंचा। क्लिनिक के बाहर भाटी लैब लिखा था। क्लिनिक में जाते ही अंदर फीमेल रिसेप्शनिस्ट थी। उसने रिपोर्टर को बैठने के लिए कहा। 10 मिनट इंतजार के बाद मोहनलाल भाटी आ गया।
- मोहनलाल भाटी : क्या हुआ?
- रिपोर्टर : जुकाम है। छाती बंधी हुई है।
- मोहनलाल भाटी : कितने दिन से? बीपी की शिकायत है क्या?
- रिपोर्टर : तीन दिन से। बीपी की गोली चल रही है। जुकाम की अभी तक कोई दवा नहीं ली।
- मोहनलाल भाटी : आपका बीपी बढ़ा हुआ है। पल्स भी तेज है। यह बहुत खतरनाक है। कुछ टेस्ट कराने होंगे।
- रिपोर्टर : टेस्ट तो कुछ दिन पहले ही कराए थे।
- मोहनलाल भाटी : वो रिपोर्ट लेकर आ जाओ।
(रिपोर्टर वहां से निकला और रिपोर्ट लेकर फिर क्लिनिक पर आ गया। रिपोर्ट देखने के बाद मोहनलाल ने अपने एक कर्मचारी के साथ रिपोर्टर को एक्सरे कराने के लिए भेजा। कुछ देर में रिपोर्टर एक्स-रे करवा कर फिर से मोहनलाल के पास पहुंचा। )

- मोहन लाल : बीपी में सुधार नहीं है। टैबलेट काम नहीं कर रही। 10 दिन के लिए दवा चेंज करनी पड़ेगी। आपके एक्सरे में जो बादल जैसे दिख रहे हैं, वो चेस्ट इंफेक्शन है। लगता है पहले किसी डॉक्टर नहीं, कंपाउंडर ने आपकी बीपी चेक की थी। ऐसे शरीर के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।
- रिपोर्टर : अब क्या करना होगा?
- फर्जी : आपका ब्लड सैंपल लेना पड़ेगा। आपकी रिपोर्ट जब तक आती है तब तक मैं पेशेंट देखकर आता हूं।
(सैंपल देने के बाद रिपोर्टर क्लिनिक से निकल गया।)
अब पढ़िए मोहन लाल के फर्जी डॉक्टर बनने की कहानी

ओवरएज होने के बावजूद एमबीबीएस में एडमिशन
मोहन लाल की जन्म तिथि 20 जुलाई 1979 है। दस्तावेजों के अनुसार, भाटी ने साल 2012 में पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (Aryabhatta Knowledge University – AKU) में एमबीबीएस में एडमिशन लिया था। उस समय एमबीबीएस में उम्र सीमा 17 से 25 वर्ष थी, जबकि मोहन लाल 33 साल का था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि उसे ओवरऐज होने के बावजूद एडमिशन कैसे मिला?
किसी और के नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन
मोहन लाल ने 20 मार्च 2019 को बिहार काउंसिल ऑफ मेडिकल में 49250 नंबर से अपना रजिस्ट्रेशन कराया। दस्तावेजों के अनुसार, भाटी को एक दिन पहले 19 मार्च को ही आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा एमबीबीएस का प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिला था। दूसरे ही दिन उसने बिहार काउंसिल ऑफ मेडिकल में रजिस्ट्रेशन करा लिया।
भास्कर ने रजिस्ट्रेशन की पड़ताल की तो सामने आया कि 49250 नंबर से राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) में 7 जनवरी 2020 को डॉ. अंसीला ने रजिस्ट्रेशन कराया था। डॉ. अंसीला ने पटना AIIMS से MBBS किया था। इसके अलावा मोहन लाल ने साल 2020 में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 48085 नंबर पर रजिस्ट्रेशन करा रखा है।

4 साल पहले गिरफ्तार, फिर भी नहीं छोड़ा फर्जीवाड़ा
अक्टूबर 2021 में पाली की कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मोहन लाल भाटी को गिरफ्तार किया था। जेल से छूटने के बाद उसने फिर डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी से खेलना शुरू कर दिया।
मामले में आरएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल गोयल का कहना है कि मोहन लाल भाटी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर 09 जून 2020 को RMC में रजिस्ट्रेशन करवाया था। चार साल पहले इसके पकड़े जाने की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने के बाद 10 अक्टूबर 2025 को रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया।
पाली कोतवाली के तत्कालीन SHO गौतम जैन ने बताया था कि मोहन लाल को 4 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया था। उसके दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। उसके बाद उसे कोर्ट में पेश कर दिया था। मामला कोर्ट में चला था। आगे क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है।

फर्जी डॉक्टर-2 : नानजी राम चौधरी
इन्वेस्टिगेशन के दौरान जालोर जिले के रानीवाड़ा में एक और फर्जी डॉक्टर नानजी राम चौधरी का नाम सामने आया। ये भी पता चला कि नानजी राम चौधरी ने 2 साल पहले एक महिला का ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद उस महिला की मौत हो गई।
जांच हुई तो पता चला कि नानजी राम की डिग्री फर्जी है। उसने फर्जी डिग्री के आधार पर RMC से मान्यता ले ली। फिर इसी मान्यता के आधार पर रानीवाड़ा में बड़ा हॉस्पिटल खोल लिया। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद 22 अक्टूबर 2024 को इसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था।
कुछ समय तक नानजी राम गायब रहा, लेकिन अब फिर वह रानीवाड़ा में डॉक्टर बनकर लोगों की जिंदगी से खेल रहा है। फर्जीवाड़ा सामने लाने के लिए रिपोर्टर पेट दर्द का मरीज बनकर नानजी राम चौधरी के हॉस्पिटल पहुंचा।

- रिपोर्टर : पेट में दर्द है।
- स्टाफ : डॉक्टर साहब केबिन में ही हैं, पर्ची कटवा लीजिए।
- रिपोर्टर : डॉक्टर नानजी राम से चेक कराना है।
- स्टाफ : थोड़ा टाइम लगेगा। इंतजार कीजिए।
(रिपोर्टर स्थानीय नहीं लग रहा था। ऐसे में स्टाफ को शक हो गया। काफी देर इंतजार करवाने के बाद यह कहकर वहां से भेज दिया कि डॉक्टर साहब बाहर चले गए हैं, शाम को लौटेंगे।)

पिछले साल हुआ था इन फर्जी डॉक्टरों का खुलासा
साल 2025 में भी कई फर्जी डॉक्टरों का खुलासा हुआ था। सच्चाई सामने आने के बाद आरएमसी ने इनके रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिए, लेकिन नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) में अभी भी इनका रजिस्ट्रेशन दिख रहा है। इस खामी का ये फर्जी डॉक्टर फायदा उठा रहे हैं।
अगर फर्जी डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन एक स्टेट से कैंसिल हो जाता है और एनएमसी में रिकाॅर्ड आ रहा होता है तो इसका फायदा उठाकर वह डॉक्टर दूसरे स्टेट में अपनी प्रैक्टिस के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लेता है।
केस 1 : मोहम्मद साजिद
सीकर के लक्ष्मणगढ़ का रहने वाला है। दस्तावेजों के अनुसार, किर्गिजस्तान से एमडी किया। फर्जी दस्तावेज पर 8/10/2012 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 31790 नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया। सालों तक लोगों का इलाज करता रहा।

केस 2 : यशवंत सिंह
हरियाणा के हिसार के रहने वाले यशवंत सिंह ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 2/12/2021 को 54207 नंबर से रजिस्ट्रेशन करवाया। चार साल तक राजस्थान में फर्जी डिग्री पर असली डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करता रहा।
केस 3 : कृष्णा सोनी
भोपाल की रहने वाली है। दस्तावेजों में रोमानिया से एमडी करना बताया। इसी फर्जी डिग्री के आधार पर 28/01/2013 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 32198 नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा दिया।

केस 4 : कन्जूभाई दर्जी
गुजरात के वयाड का रहने वाला है। 26/10/2021 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 53958 नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। चार साल तक किसी को इसके फर्जी होने का पता नहीं चला।
केस 5 : मोहम्मद अफजल
सवाई माधोपुर के गंगापुरसिटी का रहने वाला है। दस्तावेजों के अनुसार, कजाखस्तान से एमडी की। 9/11/2012 को फर्जी दस्तावेज पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 31882 नंबर पर रजिस्ट्रेशन करवा लिया।

केस 6 : बोम्मा रेड्डी
हैदराबाद का रहने वाला है। अपनी एमडी यूक्रेन से होना बताया है। इसी फर्जी डिग्री के आधार पर 13/01/2014 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 33843 नंबर से अपना रजिस्ट्रेशन करवाया।
केस 7 : जयदीप सिंह
सवाई माधोपुर का रहने वाला है। सोवियत संघ (USSR) से एमडी करना बताया। इसी के आधार पर 28/06/2013 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाया।

केस 8 : बलजीत कौर
पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला है। तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) से एमडी करना बताया। इसी के आधार पर बलजीत ने 13/10/2014 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल में 35430 नंबर से रजिस्ट्रेशन करवाया था।
रजिस्ट्रार बोले- एनएमसी को भेजते हैं रजिस्ट्रेशन कैंसिल का लेटर
RMC के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल गोयल ने बताया कि RMC द्वारा जिन डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाता है, RMC की साइट से उसका रिकाॅर्ड हटाया दिया जाता है। इसके साथ ही एनएमसी को भी लेटर भेज दिया जाता है।

रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा इस तरह होता है
आरएमसी रजिस्ट्रार डॉ.गिरधर गोपाल ने बताया कि काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए डॉक्टर दस्तावेज जमा करवाते हैं। आरएमसी इन दस्तावेजों की जांच करता है। स्टूडेंट ने एमबीबीएस या एमडी जहां की है, उस संस्थान को सत्यापन के लिए मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी पोस्ट और मेल से भेजी जाती है।
कई बार मेल और पोस्ट भेजने और सत्यापन होकर वापस आने के दौरान ही दस्तावेजों में गड़बड़ी हो जाती है। इसकी भनक आरएमसी को नहीं लग पाती है।
कई बार डॉक्टर दूसरे स्टेट की मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन के आधार पर राजस्थान में रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। ये डॉक्टर्स पहले ही उस काउंसिल में फर्जी दस्तावेज से अपना रजिस्ट्रेशन करवा देते हैं। ऐसे में जब काउंसिल अन्य स्टेट मेडिकल काउंसिल को दस्तावेज जांच के लिए भेजती है तो वह अपना रजिस्ट्रेशन सही बता देते हैं।
विदेश से MBBS की डिग्री लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन से राजस्थान में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सबसे बड़ी जांच शुरू कर दी है।
दैनिक भास्कर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस समय प्रदेश के 8 हजार से ज्यादा डॉक्टर एसओजी के रडार पर हैं।
इस फर्जीवाड़े में शामिल और डॉक्टरों को परमिशन देने वाली संस्था राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कई अफसर शक के दायरे में हैं। करीब एक माह पहले SOG ने तीन डॉक्टरों को पकड़ा था।
तीनों विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर आए थे और फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन करा सरकारी हॉस्पिटल्स में प्रैक्टिस कर रहे थे। इनसे पूछताछ में SOG को बड़े स्तर पर नेक्सस का पता चला है। इसके बाद एसओजी डॉक्टरों का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
संडे बिग स्टोरी में पढ़िए कैसे विदेशों से डिग्रियां हासिल कर यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है….
सबसे पहले जानते हैं, कैसे खुला फर्जी FMGE डॉक्टरों का मामला?
4 दिसंबर 2025 को एसओजी ने फर्जी प्रमाण से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने वाले 3 डॉक्टरों डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी, डॉ. देवेंद्र गुर्जर और डॉ. शुभम गुर्जर को गिरफ्तार किया था।
जांच में सामने आया कि तीनों ने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई तो की, लेकिन भारत में अनिवार्य Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) में फेल हो गए थे।
इसके बाद 16-16 लाख रुपए देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट हासिल किए। इसके आधार पर नेशनल मेडिकल काउंसिल से इंटर्नशिप की अनुमति ली गई।
इसके बाद डॉ. पियूष ने करौली के राजकीय मेडिकल कॉलेज, शुभम गुर्जर ने राजीव गांधी हॉस्पिटल, अलवर और देवेंद्र गुर्जर ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप पूरी की।

SOG को मिलीं शिकायतें
तीन गिरफ्तारियों के बाद एसओजी को अलग-अलग शिकायतों में बड़ी संख्या में संदिग्ध नाम मिले। एसओजी को मिली शिकायतों में ऐसे डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने किर्गिस्तान, जॉर्जिया, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों से एमबीबीएस की डिग्री ली।
बताया जा रहा है कि इनमें से कई डॉक्टर या तो घर पर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं या फिर बड़े प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटलों से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में एसओजी ने विदेश से डिग्री करने के बाद FMGE का सर्टिफिकेट हासिल करने वाले, इंटर्नशिप और प्रैक्टिस करने वाले करीब 8000 डॉक्टरों का डेटा मंगवाया है। डॉक्टर्स के डाक्यूमेंट्स, रजिस्ट्रेशन और FMGE प्रमाण पत्रों का क्रॉस-वेरिफिकेशन का काम तेजी से चल रहा है।
FMGE सर्टिफिकेट की वैधता की जांच, NBE और विदेशी यूनिवर्सिटी से संपर्क
एसओजी ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के एफएमजीई सर्टिफिकेट की जांच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) को पत्र लिखा है।
इसके जरिए संबंधित अभ्यर्थियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इतना ही नहीं, जॉर्जिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी से भी संपर्क किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एमबीबीएस की डिग्री भी कहीं फर्जी तो नहीं है।

मेडिकल काउंसिल के अधिकारी भी रडार पर
प्रदेश में कहीं भी प्रैक्टिस के लिए डॉक्टरों को राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMS) में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है। अगर किसी मेडिकल स्टूडेंट ने विदेश से डिग्री ली है तो उसके पास एफएमजीई पास करने का सर्टिफिकेट होना चाहिए।
उस सर्टिफिकेट की वैद्यता जांचने के बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल इंटर्नशिप की परमिशन जारी करती है। SOG की जांच में सामने आया है कि एफएमजीई के फर्जी सर्टिफिकेट को ही अप्रूवल दिया गया था।
यह बिना मिली नहीं है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान कई स्तर पर डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन होता है।

राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन की प्रक्रिया क्या है?
राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMS) डॉक्टरों के अस्थायी, स्थायी और अतिरिक्त योग्यता से जुड़े रजिस्ट्रेशन करती है। पूरी प्रोसेस ऑनलाइन होती है। लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होता है।
- डॉक्टर को अपने सभी डॉक्यूमेंट लेकर व्यक्तिगत रूप से राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता है।
- डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के बाद ही डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस किया जाता है।
- एमबीबीएस पास करने के बाद डॉक्टर को सबसे पहले अस्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। इसके आधार पर वह 6 महीने की जरूरी इंटर्नशिप करता है।
- इंटर्नशिप पूरी होने के बाद डॉक्टर स्थायी पंजीयन के लिए आरएमसी में आवेदन करता है।
- राज्य मेडिकल काउंसिल (RMC) में स्थायी रजिस्ट्रेशन होने के बाद डॉक्टर का नाम NMC के National Medical Register (NMR) में जुड़ जाता है।
- किसी डॉक्टर ने अतिरिक्त योग्यता जैसे- एमडी, एमएस, डीएनबी आदि की डिग्री हासिल की है, तो उसका अलग से रजिस्ट्रेशन भी राजस्थान मेडिकल काउंसिल में कराया जाता है।
मल्टी लेवल प्रोसेस के बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन होना कई सवाल खड़े करता है। एसओजी अब यह जांच कर रही है कि पंजीयन के प्रत्येक चरण में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही और किन परिस्थितियों में नियमों को नजरअंदाज किया गया।

SOG के एडीजी बोले- फर्जी डॉक्यूमेंट पर कैसे दी गई परमिशन?
एसओजी टीम राजस्थान मेडिकल काउंसिल से डेटा जुटा रही है। दिल्ली की उन एजेंसियों से भी संपर्क किया है, जो एफएमजीई जैसी परीक्षाएं कंडक्ट करती हैं।
SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाना कोई बड़ी बात नहीं है। असली और गंभीर सवाल यह है कि ये सर्टिफिकेट बना कौन रहा था और इन्हें अथॉरिटी से अप्रूव कैसे करवाया जा रहा था?
हम यह जांच कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेज किस तरह असली दस्तावेजों की तरह सिस्टम में स्वीकार किए गए? इतने लंबे समय तक किसी को इसकी भनक कैसे नहीं लगी?
इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई या कहीं किसी की मिलीभगत तो नहीं रही। इसकी गहराई से जांच की जा रही है।

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल से बातचीत
सवाल: हाल ही में एसओजी ने तीन डॉक्टरों को पकड़ा था, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंटर्नशिप कर रहे थे। उनका राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ?
जवाब: राजस्थान मेडिकल काउंसिल में तीनों डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इन लोगों ने हमारे यहां रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल ही प्रोसेस में नहीं दी थी, इसलिए हमें इसकी जानकारी नहीं थी।
सवाल: क्या बिना रजिस्ट्रेशन के इंटर्नशिप की जा सकती है?
जवाब: इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया जा सकता है। इंटर्नशिप शुरू होने के बाद संबंधित डॉक्टर को मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है।

सवाल: इंटर्नशिप शुरू होने के बाद कितने समय के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है?
जवाब: जितना जल्दी हो सके, आमतौर पर एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया जाता है।
सवाल: लेकिन इन डॉक्टरों को तो इंटर्नशिप करते हुए काफी समय हो गया था?
जवाब: यह मामला हमारी जानकारी में नहीं आ पाया था।
सवाल: क्या राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पास फर्जी तरीके से डॉक्टरी या इंटर्नशिप करने वालों का पता लगाने की व्यवस्था नहीं है?
जवाब: हम इस तरह की बातों का ध्यान रखते हैं। लेकिन इस मामले में जानकारी सामने नहीं आ सकी। अब एसओजी जिस प्रकार का सहयोग चाहती है, हम पूरा कर रहे हैं। हमने अपना पूरा सिस्टम एसओजी के सामने खोल दिया है और कहा है कि वे इसमें से जो भी देखना चाहें, देख सकते हैं। यह पूरा डेटा सरकारी है। इसमें हमारा कोई व्यक्तिगत डेटा शामिल नहीं है।
भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी हैं ये 2 एग्जाम पास करने
एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार यूएसए, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रूस, किर्गिस्तान, जॉर्जिया, चीन और बांग्लादेश जैसे कई देशों की एमबीबीएस डिग्री भारत में मान्य है, बशर्ते यूनिवर्सिटी WHO से मान्यता प्राप्त हो। लेकिन भारत में प्रैक्टिस करने के लिए आमतौर पर FMGE या NExT परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। FMGE पासिंग परसेंटेज (उत्तीर्ण प्रतिशत) आमतौर पर 20-30% के बीच रहता है। 2024 में लगभग 25.8% और 2025 के जून सत्र में लगभग 18.61% रहा है।
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स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए तीन फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपी डॉक्टर्स ने विदेश से एमबीबीएस कर FMGE का फर्जी सर्टिफिकेट लेकर इंडिया में इंटर्नशिप की। फिलहाल आरोपी डॉक्टर्स से एसओजी पूछताछ कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी निवासी प्रेम रूक्मणी दौसा, डॉ. शुभम गुर्जर निवासी खेरवाल दौसा और डॉ. देवेन्द्र सिंह गुर्जर निवासी खुरी कला दौसा है।

एसओजी ने सूचना पर कार्रवाई को दिया अंजाम एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि एसओजी को सूचना मिली कि डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी निवासी दौसा ने FMGE परीक्षा में पास नहीं होने के बावजूद गैंग की मदद से फेक FMGE सर्टिफिकेट तैयार कराया। उसी के आधार पर NMC से इंटर्नशिप की अनुमति हासिल कर ली। इंटर्नशिप के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली का आवंटन भी हो गया था।
आरोपी डॉ. पीयूष ने साल-2020 में जॉर्जिया से किया था MBBS
इसके बाद एसओजी ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु कर दी। जांच में सामने आया कि आरोपी डॉ. पीयूष ने साल-2020 में जॉर्जिया से MBBS किया था। भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य FMGE परीक्षा को उसने साल-2022, 2023 और 2024 में तीन बार दिया। तीनों बार दी परीक्षा में वह फेल हो गया।

आरोपी डॉ. पीयूष ने करौली मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की पूरी
उन्होंने बताया कि बार-बार असफल होने पर उसके परिचित डॉ. देवेन्द्र सिंह गुर्जर से कॉन्टैक्ट किया। देवेन्द्र ने अपने साथी डॉ. शुभम गुर्जर और अन्य लोगों के साथ मिलकर 16 लाख रुपए में फेक सर्टिफिकेट और NMC का रजिस्ट्रेशन दिलवा दिया। इसी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर पीयूष ने करौली मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी कर ली।
जांच में सामने आए चौकाने वाले खुलासे
वहीं डॉ. शुभम गुर्जर ने भी FMGE के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजीव गांधी हॉस्पिटल अलवर में इंटर्नशिप की। डॉ. देवेन्द्र सिंह गुर्जर ने इसी गिरोह के माध्यम से फर्जी सर्टिफिकेट लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा से इंटर्नशिप पूरी की।
एसओजी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पेशेवर गिरोह बड़ी रकम लेकर विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को फर्जी सर्टिफिकेट दिलवाने का काम करता है। एसओजी की ओर से FMGE का फेक सर्टिफिकेट तैयार करने वाले नेटवर्क, बिचौलिए और फेक डिग्री लेकर इंटरर्नशिप कर चुके अन्य डॉक्टर्स की पहचान की जा रही है।


