हवाई यात्रा कितनी सुरक्षित?
हवाई यात्रा कितनी सुरक्षित?
370 से अधिक विमान खस्ताहाल, एअर इंडिया, इंडिगो समेत कई कंपनियों में मिली ‘बीमारी’
लोकसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जांचे गए भारतीय एयरलाइंस के आधे विमानों में बार-बार खराबी मिली है। इसमें एयर इंडिया ग्रुप सबसे आगे है। इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर के भी कई विमानों में खामियां मिलीं। सरकार ने बताया कि डीजीसीए ने निगरानी बढ़ा दी है और तकनीकी स्टाफ की संख्या भी बढ़ाई गई है।
गुरुवार को लोकसभा में सरकार ने विमानन क्षेत्र से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों के मुताबिक भारतीय एयरलाइंस के जिन विमानों की तकनीकी जांच हुई, उनमें से लगभग आधे विमानों में बार-बार खराबी पाई गई है। इस लिस्ट में एयर इंडिया ग्रुप और इंडिगो के विमान सबसे ज्यादा हैं। सरकार ने बताया कि पिछले साल जनवरी से छह बड़ी एयरलाइंस के 754 विमानों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 377 विमानों में बार-बार खराबी आने की बात सामने आई।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन को लिखित जवाब में बताया कि तीन फरवरी तक इंडिगो के सबसे ज्यादा 405 विमानों की जांच हुई, जिनमें से 148 में बार-बार खराबी मिली। लेकिन एयर इंडिया ग्रुप का अनुपात इससे कहीं ज्यादा खराब रहा। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच हुई, जिनमें से 191 में बार-बार दिक्कतें मिलीं। यह कुल जांच का करीब 72 प्रतिशत है।
अलग-अलग आंकड़ों में एयर इंडिया के 166 में से 137 विमानों में और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 में से 54 विमानों में खराबी पाई गई। अन्य एयरलाइंस में स्पाइसजेट के 43 विमानों की जांच हुई, जिसमें 16 में कमी मिली। वहीं, अकासा एयर के 32 में से 14 विमानों में खराबी पाई गई।
क्या बोले एयर इंडिया के प्रवक्ता?
इन आंकड़ों पर एयर इंडिया के प्रवक्ता ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने बहुत ज्यादा सावधानी बरतते हुए अपने पूरे बेड़े की बड़े पैमाने पर जांच की है, इसलिए ये संख्या ज्यादा दिख रही है। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी ज्यादातर कमियां डी श्रेणी की हैं। इसमें सीट, ट्रे टेबल और स्क्रीन जैसी चीजें आती हैं। अधिकारी ने कहा कि इनका विमान की सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है।

बढ़ाई गई तकनीकी स्टाफ की संख्या
मंत्री मोहोल ने बताया कि विमानन नियामक डीजीसीए ने निगरानी बढ़ा दी है। डीजीसीए ने योजना के तहत 3,890 निगरानी निरीक्षण, 56 रेगुलेटरी ऑडिट, 84 विदेशी विमानों की जांच और 492 रैंप निरीक्षण किए। इसके अलावा बिना बताए 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट निरीक्षण भी किए गए। मंत्री ने यह भी बताया कि डीजीसीए में तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करने के लिए पुनर्गठन किया गया है। साल 2022 में तकनीकी पद 637 थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 1,063 कर दिया गया है।
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अहमदाबाद विमान हादसे में एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हो गया है. विमान में क्रू मेंबर समेत कुल 242 यात्री शामिल थे. ऐसी दुर्घटनाओं पर एविएशन एक्सपर्ट कहते हैं, विमान की कुछ सीटें सबसे असुरक्षित होती हैं. इनमें विंडो सीट भी शामिल हैं. जानिए, विमान की कौनसी सीटें सबसे सुरक्षित और कहां सबसे ज्यादा खतरा.

गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान AI-171 क्रैश हो गया है. विमान में क्रू मेंबर समेत कुल 242 यात्री शामिल थे. हादसा टेकऑफ के दौरान हुआ. विमान लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट के लिए जा रहा था. विमान हादसों पर एविएशन विशेषज्ञ कहते हैं, प्लेन क्रैश की घटनाओं में सबसे ज्यादा 44 फीसदी तक खतरा उन यात्रियों को होता है जो अपने लिए बीच की सीट को चुनते हैं.
रिसर्च रिपोर्ट कहती है, अगर विमान हादसा होता है तो यात्री की जान का जोखिम कितना है, यह सीट की पोजिशन के आधार पर बताया जा सकता है. अब समझते हैं यात्री विमान में कौनसी सीटें सबसे सुरक्षित होती हैं और कहां खतरा ज्यादा होता है.
विमान की सबसे सेफ और रिस्क सीट कौनसी?
विमान की कौन सी सीट सबसे ज्यादा जानलेवा है और कहां खतरा सबसे कम है, एविएशन एक्सपर्ट्स ने इसकी जानकारी दी है. विशेषज्ञों का कहना है, सबसे कम खतरे वाली सीटें विमान के पिछले हिस्से में होती हैं. हादसे की स्थिति में कुछ सीटें पर मौत का खतरा क्यों ज्यादा होता है. विशेषज्ञों ने इसकी वजह भी बताई है.

एविएशन विशेषज्ञ विमान की कुछ सीटों को सबसे ज्यादा रिस्की मानते हैं.
कैसे बताया सीटों का जोखिम?
विमान की कौनसी सीट सबसे सुरक्षित है और किससे जान को जोखिम ज्यादा है, इसे समझने के लिए रिसर्च की गई है. रिसर्च में शोधकर्ताओं ने दुनियाभर में हुए 105 विमान हादसों की एनालिसिस की. उस विमान हादसों में जिंदा बचे सर्वाइवर्स की जानकारी जुटाई.
शोधकर्ताओं का कहना है कि जब विमान में आग लगने की घटना होती है तो सबसे ज्यादा खतरा विंडो सीट वालों को रहता है. इनके बचने की उम्मीद 53 फीसदी रहती है. वहीं, आगे की तरफ बैठने वाले यात्रियों के बचने की उम्मीद 65 फीसदी तक रहती है.
डेली मेल की रिपोर्ट में एविएशन एक्सपर्ट का कहना है, विमान के बीच में गलियारे वाली सीटों पर बैठने वाले यात्रियों की जान का जोखिम रहता है.सेंट्रल क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डग ड्रूरी के मुताबिक, विमान में पीछे बैठने वाले सबसे सुरक्षित हैं. यहां मौत का खतरा मात्र 28 फीसदी रहता है.
टाइम मैगजीन की तरफ से 35 वर्षों तक की गई जांच में पाया गया कि विमान के पिछले हिस्से की सीटों में मौत का खतरा 32 प्रतिशत था, जबकि आगे से तीसरे हिस्से में यह खतरा 38 प्रतिशत था.
सबसे सुरक्षित कौन?
ग्रीनविच यूनिवर्सिटी की रिसर्च रिपोर्ट कहती है, इमरजेंसी गेट के पास बैठे दुर्घटना में जीवित बचे लोगों के लिए विमान से बाहर निकलने का रास्ता अधिक तेज होता है, जिससे दुर्घटना से बचकर निकलने की संभावना अधिक होती है. यहां की सीटों को सुरक्षित बताया गया है.शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आग लग जाए तो गेट से पांच पंक्ति दूर वाली सीट पर बैठने से बच निकलने की संभावना अधिक होती है.

