ऑनलाइन गेमिंग पर भारत में लगेगा टैक्स …. देश के 43 करोड़ से ज्यादा यूजर्स इसकी चपेट में आए, सुशील मोदी बोले- टैक्स से ही कर पाएंगे कंट्रोल
ऑनलाइन गेमिंग ने दुनियाभर के बच्चों को जकड़ लिया है। बच्चों को जहां हेल्थ लेवल पर परेशानियां होने लगी हैं, तो इन गेम से फ्रॉड के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसे रोकने के लिए ऑनलाइन गेमिंग पर भारत में टैक्स लगाने की मांग उठी है।
ये मांग राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सदन में विंटर सेशन की कार्रवाई के दौरान उठाया है। मोदी ने केंद्र सरकार से इस पर नियंत्रण करने के लिए टैक्स लगाने और कानून बनाने की मांग की है।
मोबाइल गेमिंग टाइम दोगुना हो गया
इस मुद्दे को उठाते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि ऑनलाइन गेम बड़ी चिंता का विषय है। करोड़ों युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। कोविड-19 महामारी से पहले मोबाइल गेम पर बच्चे प्रत्येक सप्ताह औसतन 2.5 घंटे का समय बिताते थे। ये जो लॉकडाउन में बढ़कर 5 घंटे हो गया। आज 43 करोड़ से ज्यादा यूजर्स ऑनलाइन गेम खेल रहे हैं। अनुमान है कि 2025 तक यह आंकड़ा 65.7 करोड़ हो जाएगा।

मोदी ने कहा कि युवाओं में ऑनलाइन गेम के क्रेज लॉकडाउन के बाद तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि युवाओं में इसके बढ़ते एडिक्शन को रोकने के लिए तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि इन राज्यों के संबंधित उच्च न्यायालयों ने इसे खारिज कर दिया। ऑनलाइन गेम्स पर नियंत्रण के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार करके सरकार को टैक्स लगाना चाहिए। ऐसा नहीं किया तो देश के करोड़ों बच्चों को ऑनलाइन गेम की आदत से रोक नहीं पाएंगे। अभी ऑनलाइन गेमिंग से होने वाला रेवेन्यू 13,600 करोड़ रुपए है, जो 2025 में बढ़कर 29,000 करोड़ रुपए होने की संभावना है।
जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए
मोदी की इस मांग को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने भी गंभीरता से लिया। उन्होंने सदन में मौजूद संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से कहा कि वह इस मामले का संज्ञान लें और कानून मंत्री से बात करके जरूरी कदम उठाएं।
चीन भी ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सख्त हुआ
चीन भी बच्चों की ऑनलाइन गेमिंग से परेशान है। इस वजह से उसने ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों को दूर रखने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। वहां 1 सितंबर से लागू नियमों के तहत अब 18 साल से कम उम्र के बच्चे हफ्ते में सिर्फ तीन घंटे ही ऑनलाइन गेम खेल सकेंगे यानी शुक्रवार, शनिवार और रविवार को रोज सिर्फ एक घंटा। अगर सरकारी छुट्टी है तो वह दिन एक्स्ट्रा मिलेगा। नए नियमों को लागू कराना गेमिंग कंपनियों की जिम्मेदारी होगी। अगर वे ये नियम लागू नहीं करा पाईं तो उन्हें ही इसका जुर्माना भी चुकाना होगा।

बच्चों का स्क्रीन टाइम घटाने के लिए अब तक चीन ने क्या किया है?
- यह समस्या चीन ही नहीं, बल्कि सभी देशों की है। बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है। 2017 में ऑनलाइन गेम बनाने वाली कंपनी टेन्सेंट होल्डिंग ने पेरेंट्स और टीचर्स की शिकायतों के बाद कहा था कि वह फ्लैगशिप मोबाइल गेम ‘ऑनर ऑफ किंग्स’ के लिए टाइम लिमिट तय कर रही है।
- इसके बाद इसे एक उपाय के तौर पर देखा जाने लगा। 2018 में बच्चों में पास की नजर कमजोर होने के मामले लगातार बढ़ने लगे तो चीन सरकार ने सख्ती बरतने का फैसला किया। वह इसके रास्ते तलाशती रही। इसके बाद नौ महीने तक वीडियो गेम्स को मंजूरी देना तक बंद कर दिया गया था।
- चीन ने 2019 में एक कानून पारित किया। इसमें तय किया गया कि बच्चे सप्ताह के आम दिनों (सोमवार से गुरुवार तक) में 90 मिनट से अधिक ऑनलाइन गेम नहीं खेल सकेंगे। वीकेंड्स पर यह अवधि बढ़ाकर तीन घंटे कर दी थी। रात दस बजे से सुबह 8 बजे तक गेम खेलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी।
- सरकार ने नाबालिगों के लिए ऑनलाइन गेम्स खेलने के दौरान किया जाने वाला खर्च भी सीमित कर दिया था। इसके तहत वर्चुअल गेमिंग आइटम्स पर उम्र के आधार पर बच्चे अधिकतम 28 से 57 डॉलर (2 से 4 हजार रुपए) ही खर्च कर सकते हैं।
- सरकार ने यह भी नियम बनाया था कि बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने के लिए लॉग-इन करते समय वास्तविक नाम और नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर डालना होगा। टेन्सेंट और नेटईज जैसी कंपनियों ने सिस्टम भी बनाए] ताकि कौन खेल रहा है, यह पता लगाया जा सके।
- इस साल जुलाई में टेन्सेंट ने फेशियल रिकग्निशन फंक्शन भी जारी किया है। इसे मिडनाइट पेट्रोल भी कहते हैं। इसकी मदद से पेरेंट्स यह पता लगा सकते हैं कि बच्चे रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक एडल्ट बनकर गेम तो नहीं खेल रहे हैं।