जम्मू-कश्मीर: मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने मार गिराए दो आतंकी, भारी तादाद में बरामद हुए हथियार
नई दिल्ली: जम्मू और कश्मीर में जारी ऑपरेशन ऑल आउट के तहत गुरुवार को सुरक्षाबलों के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. सुरक्षाबलों ने बारामूला के सोपोर इलाके में हुए एक इनकाउंटर में दो आतंकी को मार गिराया है. मारे गए आतंकियों के कब्जे से भारी तादाद में हथियार और गोलाबारूद बरामद किया गया है. सुरक्षाबल से जुड़े अधिकारी के अनुसार , अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकी किस आतंकी संगठन से संबंध रखते हैं. जम्मू कश्मीर पुलिस की एसओजी इन मारे गए आतंकियों की पहचान करने में जुटी हुई है.
दंगेरपुरा में आतंकियों के छिपे होने की मिली थी सूचना
सुरक्षाबल के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 1:50 बजे सूचना मिली थी कि बारामूला के सोपोर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दंगेरपुरा में 2 से 3 आतंकी मौजूद है. आतंकियों के बाबत सूचना मिलते ही सीआरपीएफ की 179, 177 और 92वीं बटालियन के जवानों के साथ 22 राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के कमांडो को मौके के लिए रवाना कर दिया गया.
सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ चलाया सर्च ऑपरेशन
दंगेरपुरा इलाके में पहुंचने के बाद सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस मकान की पहचान करना था, जिसमें ये आतंकी छिपे हुए थे. आतंकियों को पनाह देने वाले घर की पहचान के लिए सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया. उन्होंने बताया कि कुछ ही समय में सुरक्षाबल उस घर की पहचान करने में सफल रहे, जिसमें आतंकी छिपे हुए थे.
सरेंडर की अपील करने पर आतंकियों ने की गोलियों की बरसात
आतंकियों को पनाह देने वाले घर की घेराबंदी करने के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने की अपील की. आतंकियों ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर करने की बजाय गोलियों की बरसात करना शुरू कर दी. जिसके चलते, सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. मुठभेड़ शुरू होने के बाद सुरक्षाबलों ने दो आतंकी को मार गिराया
पत्थरबाजों से निपटने के लिए सीआरपीएफ ने तैयार किया सुरक्षाचक्र
बुधवार को मुठभेड़ स्थल पर हुई पत्थरबाजी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां आज कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थीं. लिहाजा, आज सीआरपीएफ की तीन बटालियन को मुठभेड़ स्थल में तैनात किया गया था. जिसमें सीआरपीएफ की एक टीम को राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ के लिए तैनात किया गया था, जबकि बाकी दो बटालियन के जवानों को पत्थरबाजों से निपटने की जिम्मेदारी दी गई थी.