DGP मुकुल गोयल को हटाने के 6 कारण …. चुनाव में सक्रिय न होना, ईद पर भी गैर-हाजिरी बनी वजह; कानून व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस का योगी ने दिया मैसेज
उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी डीजीपी को काम के योग्य न पाने की वजह से हटाया गया है। सरकार ने आरोप लगाया है कि डीजीपी मुकुल गोयल विभागीय कार्यों में रुचि नहीं ले रहे थे। इस पूरे मामले के पीछे डीजीपी के सरकार से शुरू से ही खराब रिश्तों को बड़ा कारण माना जा रहा है। यूपी में अपराध बढ़ना भी गोयल को हटाए जाने की वजह बताई जा रही है। दरअसल, अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति बार-बार दोहराने वाले योगी आदित्यनाथ ने इस कार्रवाई से विभाग को बड़ा संदेश दिया है।
डीजीपी को हटाने जाने की 6 अहम वजह…..
1-सरकार के भरोसे पर खरे नहीं उतरे
1987 बैच के आईपीएस मुकुल गोयल योगी सरकार के भरोसे को कायम नहीं रख सके। उनकी तैनाती के बाद से तबादले से लेकर कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न उठने लगे थे। इसी दौरान हुई लखीमपुर घटना ने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था। हालांकि, तब चुनाव के चलते सरकार ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया था।
2- पहले चंदौली कांड, फिर ललितपुर कांड
चुनाव बाद ललितपुर में थाने के अंदर रेप पीड़िता के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा रेप। फिर, वहीं पर एक महिला के कपड़े उतारकर प्रताड़ना का मामला। प्रयागराज में लगातार हो रही हत्याओं की घटना और चंदौली की घटना के बाद राजनीतिक हंगामा। इस सभी जगहों पर उनकी कार्य शैली पर लगातार सवाल खड़े हुए। इन वजहों से सरकार मुकुल गोयल से खफा थी।
3- ईद के वक्त समीक्षा बैठक में गैर-हाजिर रहे
ईद के वक्त समीक्षा बैठक में शहर में होते हुए मुकुल गोयल के गैर-हाजिर रहे हैं। तभी से यह अटकलें तेज हो गई थीं कि सरकार कोई बड़ा कदम उठा सकती है। डीजीपी मुकुल गोयल के शासन के साथ रिश्ते शुरू से ही अच्छे नहीं थे। नतीजा यह रहा कि उनके लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली के औचक निरीक्षण के दौरान प्रभारी इंस्पेक्टर श्याम बाबू शुक्ल को हटाने के निर्देश दिए। लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया। ऊपर से मुख्यमंत्री ने सभी पुलिस अधिकारियों को अपने विवेक से अधिकारियों की पोस्टिंग का आदेश दिया। जिससे साफ हो गया कि उनकी सरकार से जम नहीं रही।
4-चुनाव में भी सक्रिय न रहना भी एक वजह
विधानसभा चुनाव में डीजीपी की सक्रियता न दिखाना भी उनको हटाने की प्रमुख वजहों में से एक हैं। लगातार अपराधिक घटनाएं विपक्ष को सरकार पर प्रश्न उठाने का अवसर देती रहीं। चुनाव के दौरान भी कई जगह काउंटिंग को लेकर खूब बवाल हुआ। कौशांबी में डीएम की गाड़ी को सपा नेताओं ने चेक किया। वाराणसी में ईवीएम बदलने के आरोप को लेकर खूब हंगामा हुआ। लेकिन, इन सबमें भी डीजीपी गोयल फ्रंटफुट पर नजर नहीं आए।
5-सपा से करीबी भी थी किरकिरी की वजह
गोयल 2013 में सपा सरकार में एडीजी कानून-व्यवस्था थे। जिसके चलते उनको सपा का करीबी माना जा रहा था। चुनाव से पहले कुछ मीटिंग की बातें बाहर होने और चुनाव के दौरान सरकार के खास लोगों की सपा मुखिया से मिलने को लेकर चर्चा आम होने की वजह भी उनको हटाने का एक कारण बना। पिछली सरकार से नजदीकियां आंख के लिए किरकिरी बनी हुई थी।
6-किसान आंदोलन में भी प्रभावी नहीं रहे
जिस वक्त यानी जून 2021 को जब मुकुल गोयल को यूपी का चार्ज दिया गया था। उस वक्त किसान आंदोलन अपने चरम पर था। क्योंकि, गोयल पश्चिम यूपी के रहने वाले हैं। इसलिए, उनको केंद्र से लखनऊ लाकर सीधे डीजीपी का चार्ज दिया गया। चर्चा है कि इसके पीछे सरकार की मंशा पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन का प्रभाव कम करना भी था। हालांकि, उसमें भी इसका एक्टिव रोल नहीं रहा। ऐसे में तभी से सरकार और इनके बीच रिश्ते बिगड़ने शुरू हो गए थे।
योगी सरकार का मैसेज-जो काम नहीं करेगा उसको हटना ही होगा
इस कार्रवाई से योगी सरकार यह भी बताना चाहती है कि कोई भी जो काम नहीं करेगा उसको हटना ही होगा। हाल ही में सरकार ने दो जिलाधिकारियों और एक एसएसपी को निलंबित किया है। इसके अलावा, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात गाजियाबाद की पूर्व डीएम को निलंबित करने की संस्तुति केंद्र सरकार को भेज चुके हैं।
सहारनपुर में एसएसपी रहते हुए किए गए थे सस्पेंड
मुकुल गोयल वर्ष 2006 में सपा शासनकाल में हुए सिपाही भर्ती घोटाले में भी विवादों में रहे थे। बसपा शासनकाल में 23 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था। जब तक कोई कार्रवाई होती उससे पहले ही मुकुल गोयल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। वहीं सहारनपुर एसएसपी रहते हुए एक नेता की हत्या के बाद हुए बवाल में मुकुल गोयल को निलंबित कर दिया गया था।