क्यों भतीजे के पीछे बैठने को तैयार नहीं शिवपाल?:
विधानसभा में सीट बदलने के लिए डाली अर्जी, दूरी बनाने की जानिए 4 बड़ी वजह ….
यूपी विधानसभा में सपा के 17 विधायकों की सीट बदल गई है। जिन सदस्यों की सीटों में बदलाव हुआ, उनमें प्रमुख रूप से स्वामी ओमवेश, श्याम सुंदर, गीता शास्त्री, विजमा यादव, अभय सिंह, समरपाल सिंह, अनिल कुमार और सैय्यदा खातून प्रमुख हैं। इन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से अनुरोध किया था।
चर्चा ने जोर तब पकड़ लिया, जब शिवपाल यादव ने भी अपनी सीट बदलने का अनुरोध किया। हालांकि अभी इस पर विचार ही चल रहा है। दरअसल, शिवपाल यादव भी अपनी सीट बदलवाना चाहते हैं। उनका मानना है कि वह सीनियर हैं, पर सीट निर्धारण में इसे नजरअंदाज किया गया है।
सीट बदलने की ऐसे उठी मांग
सपा विधायक बृजेश कठेरिया ने पहले के आवंटन में अपनी सीट पीछे होने की बात उठाई थी। उन्होंने कहा था कि वह तीन बार के विधायक हैं, सीट पीछे की मिली है। इस पर मार्शल का तर्क था कि सीट आवंटन पार्टी नेता से मिली सूची के आधार पर किया जा रहा है।
अभी कैसा है सीटिंग अरेंजमेंट
अभी शिवपाल को उपाध्यक्ष के पीछे वाली लाइन में बीच की सीट आवंटित है। यह चार सदस्यों वाली सीट है, जो शिवपाल के साथ मनोज कुमार पारस व दो अन्य सपा सदस्य को आवंटित है। उपाध्यक्ष की सीट के बगल में नेता विपक्ष की सीट है, जहां अखिलेश बैठते हैं। ऐसे में शिवपाल को आवंटित सीट अखिलेश के नजदीक और उनके पीछे है।
अब अखिलेश से आगे ही रहना चाहते हैं शिवपाल
अखिलेश से हर बात पर शिवपाल यादव आगे रहना चाहते हैं। वह आजम खान से भी जेल में मिलने गए थे। साथ ही, यह भी कहा था कि सपा ने उन्हें बाहर निकालने का प्रयास नहीं किया है। अब विधानसभा सत्र शुरू होते ही शिवपाल ने अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपनी सीट बदलने का अनुरोध किया। इसस पहले शिवपाल सिंह यादव व आजम के बीच गोपनीय बैठक हुई। शिवपाल आजम के सरकारी आवास पहुंचे थे। बता दें कि आजम अभी तक अखिलेश से नहीं मिले हैं।
विधानसभा में शिवपाल इतने अकेले कभी नहीं थे
बीते 3 कार्यकाल की बात करें तो शिवपाल यादव विधानसभा में इतने अलग-थलग कभी नहीं थे। वरिष्ठता के हिसाब से उन्हें सदन में अपनों के बीच हमेशा सम्मान मिला। उनका नाम और कद मुलायम सिंह यादव की वजह से हमेशा आगे ही रहा। सत्ता अखिलेश के पास भी रही तब भी उनका कद कम नहीं रहा। अक्सर उन्हें आजम के साथ या फिर सपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ आते जाते देखा गया। लेकिन इस बार नेता प्रतिपक्ष अखिलेश हैं, तो शिवपाल अपने इर्द गिर्द अपने स्तर के विधायकों को न देख असहज महसूस कर रहे हैं।

फिलहाल, विधानसभा में शिवपाल की नाराजगी की बात तो यही है लेकिन यह सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। इस समय शिवपाल के हर कदम को एक राजनीतिक रणनीतिक के तौर पर देखा जा रहा है। नतीजा यह है कि अखिलेश के सुर में सुर न आजम मिलाते दिख रहे हैं और न ही उनके सहयोगी ओम प्रकाश राजभर।
‘नए कुनबे’ को मजबूत करते दिख रहे शिवपाल
शिवपाल यादव के करीबी बताते हैं कि विधानसभा में वह अलग थलग पड़े हुए हैं, लेकिन वह बाहर एक नए कुनबे को बनाने में लगे हैं। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव के अंदर अब लगातार यह कसक दिख रही है कि वह विधायक तो सपा के हैं, लेकिन उनका अपना आधार पार्टी में ही था। इसलिए अब वह हर उस शख्स को अपने साथ लाने में लगे हैं, जो अखिलेश से खफा हैं।