छोटे-छोटे जतन करके किसी के चेहरे पर मुस्कान लाकर आप साल के 365 दिनों को हैप्पीनेस डे बना सकते हैं

 कभी भीड़भाड़ से दूर इस शहर में मैंने लोगों की भीड़ देखी और फिर देर शाम सड़क मार्ग से दिल्ली रवाना हो गया और एयरपोर्ट के पास एयरोसिटी में होटल में चैकइन किया।

एयरपोर्ट से नजदीकी के कारण यहां होटल हमेशा व्यस्त होती हैं। दिनभर काम, फिर पानीपत से हिसार और दिल्ली यात्रा करके रात 9 बजे तक मैं बेहद थक चुका था और दुर्भाग्य से होटल प्राइड प्लाजा में भारी भीड़ थी। मैं इस सबमें स्क्रीनिंग के बाद अपना लगेज लेना भूल गया, मुझे लगा कि बाकी होटल्स की तरह ये रूम तक लगेज पहुंचा देंगे।

पता चला स्क्रीनिंग के लिए सामान जमा कराने पर होटल मेहमानों को टोकन देते हैं और मैं वो लेना भूल गया। रिसेप्शन पर मौजूद युवती को जब समझ आया कि मेरे पास टोकन या लगेज कुछ नहीं तो उसने मुस्कराते हुए कहा, ‘आप बिल्कुल बांके बिहारी जैसे हैं’ और तुरंत मेरा सामान लेने के लिए लगेज सेक्शन में गई।

10 मिनट बाद वह वापस आई और मैंने पूछा, ‘बांके बिहारी’ से तुम्हारा क्या तात्पर्य था? चेहरे पर विस्मय के भाव से उसने पूछा, ‘क्या? आपको नहीं पता बांके बिहारी कौन हैं? ‘यह श्रीकृष्ण के सैकड़ों नाम में से एक है और उनके नाम के कई अर्थों में एक अर्थ यह भी है कि बांका यानी छबीला, जिसे रमण करना पसंद हो।’ दिलचस्प है कि आप अपने कोट पर उनकी तस्वीर लगी टाइपिन पहने हैं और मैं चकित हूं कि आप उन्हें नहीं जानते?’

और तब मुझे अहसास हुआ कि हिसार में खचाखच भरे कार्यक्रम में जब मैं बोल रहा था, तभी दैनिक भास्कर का कोई पाठक पास में आकर मेरी कोट में वह टाइपिन लगा गया और बोलकर गया कि ‘वह आपकी हमेशा रक्षा करेंगे।’ जब तक मैं उसका नाम पूछ पाता और धन्यवाद दे पाता, वह भीड़ में खो गया।

ज्यों ही भीड़ थोड़ी छंटी, मैंने आयोजकों से भी पूछा और कहा कि इसे लगाने वाले शख्स से मैं मिलना चाहता हूं। पर वे भी उसका पता नहीं लगा सके और वह एक अच्छे इंसान की तरह अपना अच्छा काम करके चला गया। पर उसके शब्द मेरे कानों में लगातार गूंजते रहे कि ‘भगवान हमेशा मेरी रक्षा करेंगे।’

असल में रिसेप्शन पर मौजूद वह युवती चकित थी कि अपने सामान को लेकर मेरे चेहरे पर कोई तनाव नहीं था और इसका जिम्मा होटल के हवाले छोड़ दिया है। और वह सही थी। ठीक उसी समय एक बड़ी-सी शादी पार्टी के कई सारे लगेज आए थे और मेरा लगेज भी उनके साथ चला गया था। इसे वापस हासिल करने में उसे वाकई बहुत मुश्किल हुई होगी और मैं शांति से बैठकर वाट्सएप मैसेज का जवाब दे रहा था।

उसके हाथों में अपना लगेज देखकर मैंने कहा, ‘अगर आप किसी चीज पर शिद्दत से भरोसा करो तो वह चीज हो जाती है और मेरा पक्का यकीन है कि अगर आपने अच्छा किया है तो आपके साथ कुछ गलत नहीं हो सकता।’ उसने व्यंग्यात्मक मुस्कान दी, हालांकि उसमें अनादर नहीं था और कहा, ‘देखो, आपको बांके बिहारी कहने में मैंने कोई गलती नहीं की।’

वह वाकई मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आई। सोमवार सुबह जब मैं होटल छोड़ रहा था तो बीती रात की बातचीत दिमाग में चलने लगी और अनजाने में ही मैंने ‘बांके बिहारी’ की टाइपिन अपने नए कोट में लगा ली जैसे वो भरोसा कायम रहा, फिर इसे लगाने वाले और इसका अर्थ समझाने वाले, दोनों को धन्यवाद देता मैं निकल गया। दिल ने उन्हें साधुवाद दिया। मुझे अहसास हुआ कि रोजमर्रा के जीवन में किसी के चेहरे पर हंसी-खुशी लाने में आपका कुछ नहीं जाता।

फंडा यह है कि छोटे-छोटे जतन करके किसी के चेहरे पर मुस्कान लाकर आप साल के 365 दिनों को हैप्पीनेस डे बना सकते हैं।

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