बिना परमिशन के गलियों में चल रहे फिल्टर प्लांट ..!

बिना परमिशन के गलियों में चल रहे फिल्टर प्लांट, पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं
  • अफसर नहीं कर रहे इस आरओ पानी की जांच…..

नगर में आरओ के पानी की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में कमाई के फेर में गली-गली में अवैध आरओ प्लांट संचालित होने लगे हैं। जो गली – गली गाड़ी में वाटर केन से आरओ पानी बिक्री कर रहें हैं। जिसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं। बिना अनुमति के चल रहे इस अवैध कारोबार से जुड़े लोग शुद्धीकृत जल के नाम पर बिना जांच के पानी की होम डिलेवरी कर रहे हैं। घर दुकानों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में सप्लाई होने वाले इस पानी को लोग सेहतमंद समझकर पी रहे हैं। लेकिन उन्हें शायद पता नहीं कि आरओ वाटर के नाम पर सिर्फ नल का या हैंडपंपों का पानी ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। जिसकी शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं है। इससे सेहत के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

खाद्य विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की समय – समय पर जांच कर मिलावट पकड़ी जाती है, लेकिन पेयजल की गुणवत्ता जांचने को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। उपभोक्ता अपने स्तर पर पेयजल की जांच करवाना चाहे तो करवा सकता है, लेकिन विभागीय स्तर पर इसके लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही निजी आरओ प्लांट के पानी की जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उपभोक्ता किस प्रकार का पानी पी रहे हैं, वो शुद्ध है या नहीं इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिल पाती है।

गली -गली पहुंच रहें कैम्पर शहर की कॉलोनियों से लेकर गली गली तक कैम्पर और कैन में बेचा जा रहा यह पानी आरओ मशीन से शुद्धिकृत होने के बजाए केमिकल युक्त है। शुद्ध पानी आरओ वाटर के नाम पर एक से दो रुपए प्रति लीटर के भाव बिक रहा पानी भले की कुछ देर के लिए आपका गला तर कर दे, लेकिन यह सेहत के लिए खतरनाक साबित है। आरओ मिनरल वाटर के नाम पर बीमारियां परोसी जा रही है।

हानिकारक है केमिकल युक्त पानी पीना स्वास्थ विभाग से जुड़े अधिकारियों की मानें तो पानी में सोडियम, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम की मात्रा का होना जरूरी है। लेकिन मिनरल के नाम पर बाजार में बिक रहे पानी में स्वास्थ्य के लिहाज से वांछित तत्व मौजूद नहीं है। इससे लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। लोग इसके प्रतिकूल प्रभावों से अनजान है। विभाग के पास जानकारी ही नहीं नगर में कितने आरओ प्लांट है, कितने पंजीयन है और कितने अवैध चल रहे हैं। इसके बारे में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पास भी जानकारी नहीं है।

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