NEET को लेकर इस साल इतना विवाद क्यों?
NEET को लेकर इस साल इतना विवाद क्यों? समझिए सभी मुद्दें
NEET यूजी 2024 के नतीजों को लेकर काफी हंगामा हो रहा है. मोडिकल छात्र सिर्फ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि कई तरह के आरोप लगा रहे हैं.
इस साल अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षा NEET काफी विवादों में घिरी हुई है. छात्रों ने कई मुद्दों को लेकर आवाज उठाई है और सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों में NEET से जुड़ी याचिकाएं लंबित हैं.
4 जून को जब देश की निगाहें लोकसभा चुनाव के नतीजों पर थीं, उसी दिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी (NEET UG) के नतीजे जारी किए गए. लेकिन नतीजों ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया, क्योंकि इस बार काफी ज्यादा छात्रों ने 720 में से पूरे 720 नंबर हासिल किए थे. इतना ही नहीं, कुछ छात्रों को 718 या 719 नंबर भी मिले.
नतीजे घोषित होने के बाद कई छात्रों ने एग्जाम में गड़बड़ी और पेपर लीक होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया. दरअसल, कुल 67 छात्रों ने पेपर में पूरे मार्क्स हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की. जबकि पिछले साल दो टॉपर थे. साल 2022, 2021, 2020 और 2019 में क्रमशः एक, तीन, एक और एक टॉपर था.
इस बार इतने ज्यादा 99.99% वाले छात्रों की संख्या को देखकर ही कई लोगों को शक हुआ. इस बड़ी संख्या में टॉप स्कोरर्स को देखते हुए कुछ लोगों को संदेह है कि क्या ये वाकई में मुमकिन है या इसके पीछे कुछ खेला है?
अदालत में कितने मामले पेंडिंग
NEET UG 2024 के नतीजों के खिलाफ कम से कम दो हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. 1 जून को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि प्रश्न पत्र लीक होने के आधार पर परीक्षा दोबारा आयोजित की जाए. इससे पहले पिछले महीने भी इसी तरह की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नतीजे रोकने से इनकार कर दिया था.
वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क ने नीट में कथित अनियमितताओं की CBI से जांच कराने की मांग की है. एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी को लिखे एक पत्र में डॉक्टरों के संगठन ने सभी छात्रों के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए दोबारा परीक्षा कराने का भी अनुरोध किया है.
ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में 700 से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कुल 1,08,940 सीटें हैं. इन सीटों पर भर्ती के लिए इस साल 5 मई को 571 शहरों में आयोजित प्रवेश परीक्षा में करीब 24 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया था. जबकि पिछले साल 20 लाख 38 हजार से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी.
आखिर छात्रों को कैसे मिले 99.99% नंबर
नीट परीक्षा में टॉपर्स की संख्या ज्यादा होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. इस पर एनटीए के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार का पेपर नई एनसीईआरटी की किताब के हिसाब से बनाया गया था. मगर कुछ छात्रों के पास पुरानी एनसीईआरटी की किताबें थीं.
इसी वजह से एनटीए को उस सवाल के लिए सभी छात्रों को 5 अंक देने पड़े, जिसके दो जवाबों में से एक को छात्रों ने चुना था. इसी वजह से कुल 44 छात्रों के अंक 715 से बढ़कर 720 हो गए. नतीजा ये हुआ कि इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (यूजी) में टॉपर्स की संख्या ज्यादा हो गई. 720 नंबर हासिल करने वाले 67 छात्रों में से 44 छात्रों को ये नंबर इसी सवाल की वजह से मिले.
एग्जाम में कम समय मिलने पर भी बवाल
दूसरी बात ये है कि बहादुरगढ़ (हरियाणा), दिल्ली और छत्तीसगढ़ के कुछ छात्रों का कहना था कि उन्हें परीक्षा पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. इन छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं. ये याचिकाएं पंजाब और हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर की गई थीं. इन छात्रों का कहना है कि 5 मई को कुछ परीक्षा केंद्रों पर उन्हें परीक्षा देने के लिए पूरा समय नहीं मिला. इन शिकायतों के बाद NTA ने एक समिति बनाई.
जांच के बाद इस समिति ने माना कि कुछ छात्रों को सच में पूरा समय नहीं मिला था. सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद समिति ने ये भी बताया कि इन परीक्षा केंद्रों पर नकल जैसी कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी. इसके बाद ऐसे 1563 छात्रों को एक्स्ट्रा नंबर दिए गए. ये नंबर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 13 जून 2018 के फैसले में ये आदेश दिया था. एक्स्ट्रा नंबर के बाद 1563 छात्रों के मार्क्स -20 से लेकर 720 तक पहुंच गए. इनमें से दो छात्रों को मिले एक्स्ट्रा नंबर की वजह से उनके मार्क्स 718, 719 हो गए और छह छात्रों के नंबर 720 पहुंच गए.
तमिलनाडु सरकार ने की है ये मांग
तमिलनाडु सरकार NEET-UG 2024 के नतीजों से खुश नहीं है और वो इस मामले में पूरी पारदर्शिता चाहती है. सरकार को डर है कि इस बार के नतीजों की वजह से उनके राज्य के मेधावी छात्रों को नुकसान हो सकता है और उन्हें मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाएगा.
तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि वह NEET-UG 2024 की परीक्षा आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर दबाव बनाएगी कि वह अपने मूल्यांकन के तरीकों को सार्वजनिक करे, जिसमें ग्रेस मार्क्स देने का तरीका भी शामिल है. ताकि यह साबित हो सके कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी थी. वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एनटीए के खिलाफ अदालत जाने के ऑप्शन पर भी चर्चा कर रहा है.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने कहा, “इस साल 720 में से 650 अंक हासिल करने वाले छात्रों को भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट नहीं मिल सकती है.”
‘पेपर लीक’ का क्या है मामला
इस साल की नीट परीक्षा को लेकर एक और विवाद ये है कि पेपर लीक हो गया था. ये आरोप बिहार के पटना से आया है. बिहार पुलिस का कहना है कि उसने इस मामले में गिरफ्तार किए गए गिरोह के सदस्यों से एडमिट कार्ड, पोस्ट-डेटेड चेक और प्रमाण पत्र जब्त किए हैं. हालांकि अभी इस मामले की गहन जांच चल रही है. लेकिन अभी तक जो सबूत मिले हैं, उनके आधार पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ये नहीं कह सकती कि पेपर लीक हुआ था.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने किसी भी तरह के पेपर लीक होने की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. एनटीए का कहना है कि उन्होंने ‘फर्जी परीक्षा देने वालों’ के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं.
हालांकि, NTA ने इस बात की पुष्टि भी की है कि सवाई माधोपुर (राजस्थान) में कुछ हिंदी मिडियम के छात्रों को गलती से अंग्रेजी मिडियम के प्रश्न पत्र दे दिए गए थे. इससे गुस्साए छात्रों ने प्रश्न पत्र अपने साथ लेकर परीक्षा हॉल से बाहर निकल कर इसका विरोध किया था. एनटीए के मुताबिक, ये प्रश्नपत्र इंटरनेट पर शाम करीब 4 बजे पोस्ट किया गया था, लेकिन उस समय तक दोपहर 2 बजे शुरू हुई परीक्षा बाकी सभी केंद्रों पर चल रही थी.
तय तारीख से पहले नतीजे आने पर भी विवाद
इस साल की नीट परीक्षा के नतीजे तयशुदा तारीख 14 जून से 10 दिन पहले ही आ जाने पर भी काफी सवाल उठाए जा रहे हैं. लेकिन एनटीए का कहना है कि उसकी सभी परीक्षाओं के नतीजे अंसर शीट को चुनौती देने की अवधि खत्म होने के बाद जरूरी जांच पूरी करके जल्द से जल्द घोषित कर दिए जाते हैं. इस बार नीट यूजी 2024 के रिजल्ट को भी इसी स्थापित व्यवस्था के अनुसार जारी किया गया है.
अपने बचाव में NTA ने ये भी बताया कि उन्होंने लगभग 23 लाख उम्मीदवारों के रिजल्ट 30 दिनों के भीतर घोषित करने में कामयाबी हासिल की. JEE (Main) 2024 के सेशन-1 के नतीजे 11 दिनों में और सेशन-2 (सेशन-1 के साथ संयुक्त) के नतीजे 15 दिनों में घोषित किए गए थे.
कटऑफ पर सवाल
इस साल नीट की कटऑफ काफी ज्यादा होने पर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं. एनटीए का कहना है कि इस बार कटऑफ ज्यादा इसलिए है क्योंकि इस बार ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी और उनका प्रदर्शन भी आम तौर पर बेहतर रहा. हर साल कटऑफ स्कोर उसी साल परीक्षा देने वाले छात्रों के पूरे प्रदर्शन के आधार पर तय होता है. कटऑफ का बढ़ना इस बात को दिखाता है कि परीक्षा काफी कठिन थी और इस साल छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया.
एनटीए ने ये भी बताया है कि 2022 में जब क्वालीफाई करने वाले छात्रों के एवरेज नंबर 259 थे, तब जनरल कैटेगरी (UR) में क्वालीफाई करने के लिए न्यूनतम स्कोर सिर्फ 117 था. जबकि 2024 में एवरेज नंबर 323.55 हो गया और कटऑफ 164 पर पहुंच गया.
NEET विवाद इस बात का संकेत है कि देश में मेडिकल एजुकेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत है. यह भी दिखाता है कि कैसे एक महत्वपूर्ण परीक्षा में छोटी सी भी गड़बड़ी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है