पुलिस थानों में साल भर से धूल खा रही चार हजार से अधिक शिकायतें !

पुलिस थानों में साल भर से धूल खा रही चार हजार से अधिक शिकायतें

एसपी के संज्ञान में आया, अब तय किया टारगेट, हर थाने को समय सीमा में करना होगा काम

रतलाम. कभी जुलूस, कभी रैली, कभी सभा तो कभी प्रदर्शन, इन सब काम में लगी पुलिस के पास एक साल से उन शिकायतों पर कार्रवाई करने का समय नहीं है, जो थानों में आती है। एक के बाद एक जिले के सभी थानों में मिलाकर सालभर में इस प्रकार की 4 हजार से अधिक शिकायत जमा हो गई। आम रतलामी की शिकायतों के धूल खाने की जानकारी जब पुलिस कप्तान को लगी तो उन्होंने अब इसको गंभीरता से लेने की सख्ती की है। थानों को हर दिन का टारगेट दे दिया है, जिसमें लंबित शिकायतों का निवारण करना होगा।
पिछले महीनों में चलाए गए विशेष अभियानों की तर्ज पर पुलिस ने जुलाई माह को शिकायत निवारण माह के रूप में लिया है। एसपी ने सभी अधिनस्थों को निर्देश जारी किए हैं कि वे शिकायतों पर त्वरित संज्ञान ही नहीं ले वरन उनका निराकरण भी करे। इतना ही नहीं, ये चेतावनी भी दी शिकायतों पर गंभीरता से काम नहीं किया तो उनकी अलग से क्लास लगेगी। इस समय पुलिस विभाग के पास और थानों में मिलाकर करीब साढ़े चार हजार शिकायतें लंबित हैं। ये शिकायतें सालभर से लेकर वर्तमान तक की हैं। इनमें जनसुनवाई में प्राप्त व थाने पर भेजी गई शिकायतें भी शामिल हैं।
10 से 15 दिन में निराकरण

एसपी ने इस अभियान में हर थाना प्रभारी को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने यहां आई हर शिकायत का कम से कम 10 से 15 दिन में समाधान और निराकरण करे। इस अवधि में नहीं होता है तो उसका ठोस कारण भी बताना पड़ेगा।
ये अभियान चला चुके

चालान पेश करना
एसपी लोढ़ा ने पदभार लेने के बाद वर्षों से लंबित पड़़े चालान को कोर्ट में पेश करने का अभियान चलाया था। इस समय तक पुलिस के चार हजार से ज्यादा चालान लंबित थे। समय सीमा में इन्हें कोर्ट में पेश करने का अभियान चलाया तो अब की स्थिति में यह एक हजार से भी कम रह गए हैं। इनमें वर्तमान के चालान ही हैं।
जब्त सामान का निराकरण
विभिन्न प्रकरणों में जब्त और थाने में रखे सामान के निराकरण के लिए भी अभियान चलाया था। इसमें थानों के जब्त सामान का निकाल करने के लिए थाना प्रभारियों को ताकिद किया तो हर थाने में बड़ी मात्रा में रखे सामान का निराकरण कर दिया गया। यूं कहे कि थानों में कबाड़ के रूप में जमा सामान अब खत्म जैसा हो गया।
स्थायी वारंट तामिली
बदमाशों के वारंट तामिली के करीब साढ़े तीन हजार वारंट थानों पर ही घुम रहे थे और कोई भी इसमें हाथ डालने को तैयार नहीं था। हर थाना प्रभारी या जांचकर्ता इनसे कन्नी काटकर इन्हें टालकर अगले पर छोड़ देता था। जब अभियान चला तो तीन हजार प्रकरणों में से अब पांच सौ से भी कम वारंट तामिली के लिए बच गए हैं।
पूरे माह अभियान
शिकायतों के निराकरण का अभियान पूरे माह चलाया जाएगा। हर एक शिकायत की मानिटरिंग की जाएगी। कोई भी थाना प्रभारी शिकायत आने पर उसका 10 से 15 दिन में निराकरण अवश्य करेगा। विवादित मामलों में दोनों पक्षोँ के बयान दर्ज करना अनिवार्य होगा।
 एसपी, रतलाम

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