Delhi Assembly Elections 2020: 70 सीटें, 672 उम्मीदवार और 1.47 करोड़ वोटर, जानें दिल्ली चुनाव से जुड़ी 10 खास बातें
दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर आज सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हो चुका है। दिल्ली में कुल 1.47 करोड़ मतदाता है। इन कुल मतदाता में से पुरुषों की संख्या 81.05 लाख है, वहीं महिला वोटरों की संख्या 66.80 लाख है। इनमें पहली बार वोट डालने वालों की संख्या 2.32 लाख है। इन चुनावों के नतीजे 11 फरवरी को आने हैं। चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन का केंद्र बने शाहीन बाग में विशेष सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। यहां हम आपको दिल्ली के दंगल की 10 खास बातें बताने जा रहे हैं।
विधानसभा बनाम लोकसभा चुनाव नतीजे
दिल्ली चुनाव 2020 के नतीजे ये बताएंगे कि क्या भाजपा लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी सात सीटों की तरह ही यहां भी जीत हासिल कर सकेगी। 2015 को विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज कर आप ने बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया था जबकि लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को जोरदार जीत हासिल हुई थी। दोनों नतीजों से साफ है कि जनता प्रदेश और राष्ट्रीय चुनाव में अलग अलग सोच के साथ वोट करती हैय़
नई तकनीकों का इस्तेमाल
इस बार चुनाव में मोबाइल एप्प, क्यूआर कोड, सोशल मीडिया इंटरफेस जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली के 11 जिलों की एक-एक विधानसभा सीट चुनी गयी हैं जिन पर मतदाता मतदान पर्ची बूथ पर नहीं लाने की स्थिति में स्मार्टफोन के जरिए हेल्पलाइन एप्प से क्यूआर कोड प्राप्त कर सकता है। इनमें सुल्तानपुर माजरा, सीलमपुर, बल्लीमारान, बिजवासन, त्रिलोकपुरी, शकूर बस्ती, नई दिल्ली, रोहतास नगर, छतरपुर, राजौरी गार्डन और जंगपुरा हैं।
शाहीन बाग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार (8 फरवरी) के मतदान के लिए दिल्ली पुलिस ने पूरी दिल्ली में सुरक्षा चाक चौबंद कर दी है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन का केंद्र बने शाहीन बाग में विशेष सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शाहीन बाग में विशेष तौर से बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) की टुकड़ी को तैनात किया गया है।”
तैनात किए गए सवा लाख सुरक्षा कर्मी
दिल्ली चुनाव में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। करीब 1.25 लाख सुरक्षा कर्मी दिल्ली की सुरक्षा की कमान संभाले रहेंगे। दिल्ली में करीब 40,000 सुरक्षाकर्मियों, होमगार्ड के 19,000 जवानों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 190 कंपनियां तैनात की गई हैं।
चुनाव अभियानों की जंग
आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी अभियानों को काफी हद तक अपने कार्यकाल में कामकाज के रिकॉर्ड के आसपास रखा, जबकि भाजपा ने अपने राष्ट्रवाद के माध्यम से मतदाताओं से अपील की और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर आम आदमी पार्टी के रवैये को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। साथ ही शाहीन बाग और जेएनयू प्रदर्शन को आप के सहयोग को “राष्ट्र-विरोधी” बताया।
युवा मतदाता निभाएंगे निर्णायक भूमिका
18 से 40 वर्ष तक की उम्र के मतदाताओं की कुल संख्या
79.70 लाख है।
18 से 25 वर्ष –11.73%
25 से 40 वर्ष–42.17%
40 से 60 वर्ष-33.56%
60 वर्ष से अधिक–12.54%
कब-कब कितने फीसदी हुए मतदान
दिल्ली विधानसभा चुनाव में साल 2015 के चुनाव में दिल्ली में 67.12 फीसदी वोट दर्ज किए गए। वहीं, 2013 के चुनाव में वोट फिसदी 65.63 रहा। 2008 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में 57.58 फीसदी लोगों ने वोट किया था। 2003 में 53.42 फीसदी
आम आदमी पार्टी के चुनावी अभियान
AAP ने सरकारी विज्ञापनों का उपयोग आदर्श आचार संहिता लगने से पहले से शुरु किया, सार्वजनिक संपर्क कार्यक्रमों, केजरीवाल द्वारा टाउनहॉल बैठके, छोटी-छोटी बैठके, दर्जनों रैलियां और रोड शो, और अपने शासन रिकॉर्ड को पेश करने के लिए एक मजबूत सोशल मीडिया अभियान चलाए। स्कूलों, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों, रियायती दरों पर बिजली और पानी की आपूर्ति और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लागू किया।
सत्ता में निर्वाचित होने पर अपने अगले कार्यकाल में प्रदूषण, स्वच्छ पानी की व्यवस्था और स्वच्छता पर ध्यान देने का भी वादा किया।
बीजेपी के चुनावी अभियान
भाजपा का अभियान शुरू में केंद्रीय कानून के माध्यम से दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के चार मिलियन निवासियों को ओनरशिप डॉक्यूमेंट प्रदान करने के दावे के साथ शुरू हुआ। पार्टी ने सत्ता में आने पर केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर भाजपा के साथ “ट्रिपल-इंजन गवर्नेंस” का वादा किया। लेकिन बीजेपी का अभियान जल्दी ही सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर, विशेष रूप से दिल्ली के शाहीन बाग की ओर मु़ड़ गया। विरोध प्रदर्शनों को “देश-विरोधी” के रूप में पेश किया गया। बीजेपी ने इन विरोध प्रदर्शनों के जरिए अराजकता और हिंसा फैलाने और शहर के निवासियों को असुविधा का कारण बनने के लिए आप और कांग्रेस को दोषी ठहराया।
मोदी बनाम केजरीवाल
पीएम ने केवल दो रैलियों को संबोधित किया लेकिन उनकी तस्वीर भाजपा के होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर लगी रही। पार्टी ने सीएम पद के लिए चेहरे की घोषणा नहीं की है। ऐसा होता तो मुकाबला मोदी बनाम केजरीवाल न होता। इसपर आप ने कहा कि केजरीवाल का मुकाबला करने के लिए भाजपा के पास कोई सीएम उम्मीदवार नहीं है