इंडी गठबंधन बचेगा या बिखरेगा ?
इंडी गठबंधन बचेगा या बिखरेगा?
सिटिंग प्लान पर अखिलेश की नाराजगी, रामगोपाल-उदयवीर के बयान; 2027 के गठबंधन पर संकट
‘कांग्रेस संसद में तो संभल मुद्दा उठा नहीं रही, लेकिन राहुल संभल जा रहे हैं। कांग्रेस औपचारिकता कर रही है।’ सपा नेता रामगोपाल यादव के इस बयान के बाद सपा से एक और कमेंट आया।
सपा नेता अबू आसिम आजमी ने कहा- समाजवादी पार्टी को महाराष्ट्र में अकेले चलना गवारा है लेकिन महाविकास अघाड़ी में रहते हुए शिवसेना UBT की सांप्रदायिक विचारधारा का हिस्सा बनना हरगिज गवारा नहीं!

इन दो बयानों के मायने निकाले जा रहे थे कि रविवार को सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह का बयान सामने आ गया। उदयवीर सिंह ने पश्चिम बंगाल की सीएम टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को गठबंधन नेतृत्व के लिए सक्षम नेता बताया।
ऐसे में इंडी गठबंधन और यूपी में कांग्रेस-सपा गठजोड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूरे मामले को इस सप्ताह संसद में हुए सिटिंग प्लान घटनाक्रम से जोड़कर भी देखा जाने लगा। जब अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा- धन्यवाद कांग्रेस! अब कयास लगाए जाने लगे हैं कि 2027 में सपा और कांग्रेस या इंडी गठबंधन शायद ही एकजुट होकर चुनाव लड़ सके।

संसद के सिटिंग अरेंजमेंट से शुरुआत
बयानबाजी की शुरुआत लोकसभा के अंदर सिटिंग अरेजमेंट के दौरान सपा को नजरअंदाज करने से हुई। सपा सुप्रीमो और सदन में देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को आठवें ब्लॉक से छठे ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया। इसे लेकर सपा ने खुले तौर पर नाराजगी का इजहार कर दिया। यहां तक कि अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि धन्यवाद कांग्रेस!

इसके बाद दिल्ली से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी संभल के लिए निकले तो सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा ‘पार्लियामेंट में मुद्दा उठा नहीं रहे और वहां जा रहे। पुलिस तो वहां किसी को जाने नहीं देगी। वे औपचारिकता कर रहे हैं।’
सपा चाहती है बना रहे गठबंधन
हालांकि मुंबई में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी के गठबंधन तोड़ने के बयान को लेकर राम गोपाल नाराज हैं।
उन्होंने कहा कि गठबंधन की कई मजबूरियां होती हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। राम गोपाल का मानना है कि बिना गठबंधन के इन तिकड़मी लोगों को हराया नहीं जा सकता।
इंडी ब्लॉक का नेता कौन हो, इस पर भी शुरू हुई तकरार
इंडी गठबंधन का नेता कौन हो, इसे लेकर भी तकरार शुरू हुई है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह कमान संभालने के लिए तैयार हैं।
इस पर सपा के प्रवक्ता उदयवीर का कहना था कि इस पद के लिए ममता बनर्जी पुरानी नेता हैं, बड़ी नेता हैं। उनके पास लंबा अनुभव है। संघर्ष के जरिए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। हमारे दल का और हम लोगों का व्यक्तिगत रिश्ता भी है। हम लोग 100 प्रतिशत उनके समर्थन में, उनके पक्ष में और उनकी लीडरशिप में हम लोगों का भरोसा है। बाकी इंडी गठबंधन के सारे लोगों को मिलकर तय करना है कि क्या होना है।
उधर, अबू आसिम आजमी के बयान पर इंडी गठबंधन के घटक शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने खुला हमला बोला।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनके कुछ नेता बीजेपी की बी-टीम के रूप में काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि हम बाबरी मस्जिद के बारे में पहले भी पोस्ट करते रहे हैं। हमने कभी हिंदुत्व नहीं छोड़ा, हम हिंदुत्व के साथ हैं।
सरकार नहीं बनी इसलिए महाराष्ट्र में छिटकना चाह रही सपा
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि महाराष्ट्र चुनाव में सभी दल लगे थे। हारने के बाद सपा नेता को इस तरह की बात नहीं करना चाहिए।
जब बाबरी मस्जिद गिरी थी उस समय भी उद्धव ठाकरे की पार्टी उसके पक्ष में थी। आज भी है, उस मुद्दे को लेकर गठबंधन से अलग होना हजम नहीं होता। गठबंधन के बारे में उन्हीं लोगों को बोलना चाहिए जो इसके लिए अधिकृत हैं।
जहां तक लोकसभा में सीट अरेंजमेंट का सवाल है तो मैं भी सदन का हिस्सा रहा हूं, यह अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है। गठबंधन के दलों को लड़ाने के लिए भाजपा इस तरह की चाल चल रही है।
राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार कहते हैं कि यूपी में जो हालात बन रहे हैं उसमें कांग्रेस व सपा दोनों को एक दूसरे को छोड़ना महंगा पड़ेगा। उपचुनाव में यह संकेत देखने को मिला भी।
2019 के चुनाव में सपा और बसपा मिलकर लड़े तो सपा को 5 और बसपा को 10 सीट मिली। 2024 में कांग्रेस के साथ समझौता हुआ तो सपा 5 से 37 और कांग्रेस 1 से 6 हो गई। यानी जनता ने इसे स्वीकार किया। ऐसे में अगर 2027 में दोनों दल अलग लड़े तो सपा अकेले भाजपा को नहीं रोक सकती।