थाईलैंड व म्यांमार के विनाशकारी भूकंप ने आईटी सेक्टर के उद्यमियों से लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आइटी सेक्टर की कंपनियां अधिकतर गगनचुंबी इमारतों में चल रही हैं। भूकंप के दाैरान थाईलैंड के बैंकाक में एक निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत ताश के पत्तों की तरह गिर गई।
इसे देखते हुए आईटी उद्यमियों से लेकर आपदा के जानकारों का मानना है कि तत्काल प्रभाव से सभी प्रकार की इमारतों का भूकंप के हिसाब से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए। ऑडिट रिपोर्ट के हिसाब से इमारतों को ठीक किया जाए। जो इमारतें ठीक नहीं हो सकतीं, उन्हें तोड़ने का निर्णय लिया जाए।
अतिसंवेदनशील जोन चार में आते हैं कई इलाके
सभी को चिंता है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो थाईलैंड व म्यांमार जैसा भूकंप आने पर साइबर सिटी व आसपास भारी तबाही मचेगी। भूकंप के हिसाब से गुरुग्राम व आसपास के इलाके अतिसंवेदनशील जोन चार में आते हैं। आसपास पांच फाल्ट हैं। फाल्ट लाइन के नजदीक ही एपी सेंटर बनता है।
1960 में आया था भूकंप
गुरुग्राम के सबसे नजदीक सोहना फाल्ट है। इसके अलावा दिल्ली- मुरादाबाद फाल्ट, हरिद्वार फाल्ट, मथुरा फाल्ट एवं दिल्ली-हरिद्वार फाल्ट हैं। 1960 में सोहना फाल्ट के एक्टिव होने से छह तीव्रता का भूकंप आया था। एपी सेंटर दिल्ली से गुरुग्राम के बीच में था।

गुरुग्राम में लगभग 200 घर तबाह हुए थे। तब अधिकतर कच्चे मकान के थे। काफी लोग भी हताहत हुए थे। अब काफी इमारतें तीन से चार मंजिला हैं। इसे देखते हुए हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) के आपदा प्रबंधन संस्थान ने पांच साल पहले सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट खासकर बिना नक्शा पास कराए बनाई गई इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का सुझाव जिला प्रशासन को दिया था।

 

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यह भी सुझाव दिया था कि सात तीव्रता से अधिक का भूकंप आने के बाद सेक्टरों में बनी बहुमंजिला इमारतें टीक पाएंगी या नहीं, इसके लिए भी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए। दोनों में किसी भी विषय पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

थाईलैंड व म्यांमार में सात तीव्रता से अधिक का भूकंप आने पर जहां एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई वहीं कई इमारतों में दरारें आ गई हैं। जानकारों का मानना है कि थाईलैंड व म्यांमार में आए भूकंप के झटकों को देखते हुए साइबर सिटी व आसपास की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट तत्काल प्रभाव से कराना चाहिए।
इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी
सेवानिवृत मुख्य नगर योजनाकार प्रो. केके यादव कहते हैं कि ऑडिट कराने के बाद देखा जाए कि किन इमारतों में भूकंप के हिसाब से सुधार हो सकता है। जिनमें सुधार नहीं हो सकता है उन इमारतों को ध्वस्त करने का निर्णय लिया जाए।
आज यह बात भले ही किसी को अच्छी न लगे, लेकिन जब भूकंप आएगा फिर अहसास होगा कि यदि इमारतों में भूकंप के हिसाब से सुधार कर लिया होता तो तबाही से बच सकता था। जिला आपदा प्रबंधन संस्थान को इस दिशा में कारगर कदम उठाने चाहिए। यही नहीं एक-एक व्यक्ति को भूकंप आने के बाद कैसे बचाव करें, इसके बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।

मैंने ही हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान में आपदा प्रबंधन विभाग का अध्यक्ष रहते प्रशासन को सुझाव दिया था कि भूकंप के हिसाब से सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल आडिट कराया जाए। इसके ऊपर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है। थाईलैंड व म्यांमार की तबाही से सबक लेना चाहिए अन्यथा यदि सात तीव्रता का भूकंप आया फिर ऐसी तबाही मचेगी, जिसकी कल्पना नहीं कर सकते। गुरुग्राम अतिसंवेदनशील जोन चार में आता है। क्या स्ट्रक्चरल आडिट पर ध्यान तबाही मचने के बाद दिया जाएगा।

– डॉ. अभय श्रीवास्तव, पूर्व विभागाध्यक्ष, आपदा विभाग, हिपा

साइबर सिटी में छह हजार से अधिक आईटी, आईटी इनेबल्ड एवं टेलीकाम सेक्टर की कंपनियां हैं। अधिकतर ऊंची इमारतों में संचालत हो रही हैं। मेरी कंपनी स्पेज टावर में हैं। वह भी 14 मंजिल की है। बैंकाक की घटना ने हिलाकर रख दिया है। सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल आडिट तत्काल प्रभाव से शुरू कर देना चाहिए। वैसे भी साइबर सिटी अतिसंवेदनशील जोन चार में है। शनिवार को दिन भर कंपनियों में भूकंप को लेकर नहीं बल्कि भूकंप की वजह से गगनचुंबी इमारत के गिरने की चर्चा चलती रही।

 प्रदीप यादव, प्रेसिडेंट, हाइटेक इंडिया (आईटी एवं टेलीकाम सेक्टर की कंपनियों का संगठन)