बिहार के किस प्रमंडल में किसका दबदबा ?

बिहार नौ प्रमंडलों में बंटा हुआ है। इन प्रमंडलों में ही बिहार के सभी 38 जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों के आधार पर ही पार्टियों के लिए सत्ता के रास्ते बनते और बिगड़ते हैं। इन प्रमंडलो में तिरहुत, सारण, पटना, दरभंगा, मुंगेर, भागलपुर, कोसी, मगध और पूर्णियां प्रमंडल शामिल हैं।
प्रमंडलों के लिहाज से बात करें तो सबसे ज्यादा 49 सीटें तिरहुत प्रमंडल में आती हैं। इसके बाद दूसरा नंबर पटना प्रमंडल का है, जिसमें 43 सीटें हैं। अगला नंबर दरभंगा का है, जहां 30 सीटें हैं। मगध में 26 सीटें, पूर्णियां में 24, सारण में 24 सीट, मुंगेर में 22 सीट हैं। इसके अलावा कोसी में 13 और भागलपुर प्रमंडल में 12 विधानसभा सीटे हैं।
जहां तिरहुत प्रमंडल में भाजपा का दबदबा रहा है, वहीं, मगध-सारण में राजद का जलवा रहा है। कोसी प्रमंडल जदयू का गढ़ रहा है और बीते चुनाव में 43 सीट पाने के बावजूद नीतीश की पार्टी ने 13 सीटों वाले इस क्षेत्र में 8 सीटों पर कब्जा किया था।
(i). 2020 विधानसभा चुनाव
तिरहुत में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए का जलवा रहा। इसकी बड़ी वजह यहां भाजपा को मिलने वाली सीटें रहीं। 2020 में तिरहुत प्रमंडल की 49 सीटों में से भाजपा ने अकेले 25 सीटें हासिल की थीं। वहीं, दूसरे नंबर पर राजद रही थी, जिसे भाजपा से करीब आधी यानी 13 सीटें हासिल हुई थीं। इसके अलावा एनडीए में भाजपा की ही साथी पार्टी जदयू को 6 सीटें मिली थीं।
(ii). 2015 विधानसभा चुनाव
2015 के विधानसभा चुनावों में भले ही भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को महागठबंधन के हाथों बिहार में हार मिली थी, लेकिन पार्टी की 53 सीटों में से सबसे ज्यादा 18 सीटें इसी प्रमंडल से आई थीं। हालांकि, राजद ने यहां सेंध लगाते हुए 17 सीटें जीत ली थीं। इसके अलावा जदयू को छह, कांग्रेस को 3, लोजपा को 2 और निर्दलियों को 3 सीटें हासिल हुई थीं।
(iii). 2010 विधानसभा चुनाव
2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तिरहुत में 21 सीटें हासिल की थीं। वहीं, एनडीए में उसकी साथी जदयू को 24 सीटें मिली थीं। इसके अलावा निर्दलियों को तीन सीटें और मुख्य विपक्षी दल राजद को महज 1 सीट हासिल हुई थी। इस लिहाज से 2010 के चुनाव में एनडीए ने तिरहुत में क्लीन स्वीप के करीब पहुंच गई।
(i). 2020 का चुनाव
पटना प्रमंडल में 2020 के चुनाव में राजद का दबदबा रहा। पार्टी ने अपने इस गढ़ में 43 सीटों में से 18 पर कब्जा जमाया। वहीं, दूसरे नंबर पर भाजपा रही, जिसे 8 सीटों पर ही जीत मिल पाई। बीते चुनावों के मुकाबले जदयू की स्थिति यहां काफी खराब रही और उसे कांग्रेस के बराबर पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा। निर्दलियों को पटना प्रमंडल में 7 सीटों पर जीत मिली।
(ii). 2015 का चुनाव
महागठबंधन में चुनाव लड़ने की वजह से पटना प्रमंडल में राजद की स्थिति में सुधार हुआ। पार्टी को यहां 15 सीटों पर जीत मिली। वहीं, महागठबंधन में उसकी साथी जदयू 11 और कांग्रेस दो सीटें जीतने में सफल रही। लेफ्ट पार्टी को भी यहां एक सीट हासिल हुई।
दूसरी तरफ पिछली बार से उलट भाजपा ने जदयू से अलग होकर लड़ने के बावजूद उससे एक सीट ज्यादा यानी 12 सीटें हासिल कर लीं। भाजपा को सबसे ज्यादा पटना जिले में सात सीटें हासिल हुईं। इसके अलावा कैमूर में चार और नालंदा में एक सीट मिली, जबकि भोजपुर, बक्सर और रोहतास में उसका खाता भी नहीं खुला। उसकी साथी पार्टियों का भी हाल बुरा रहा और रालोसपा के ललन पासवान इकलौते विजेता रहे।
(iii). 2010 का चुनाव
पटना प्रमंडल में बीते तीन चुनावों में भाजपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में आया था, जब पार्टी ने जदयू के साथ गठबंधन में रहते हुए अकेले 43 में से 16 सीटें जीती थीं। इसके पीछे नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि की बड़ी भूमिका मानी जाती है। वहीं, खुद जदयू ने पटना प्रमंडल में 19 सीटों पर जीत हासिल की। इस लिहाज से एनडीए को तब पटना में 43 में से 35 सीटें मिली थीं। दूसरी तरफ विपक्षी दलों में राजद को छह सीटें हासिल हुई थीं। एक सीट लोजपा को मिली थी। इसके अलावा एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। कांग्रेस का यहां खाता तक नहीं खुला था।
(i). 2020 विधानसभा चुनाव
2020 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा में एनडीए गठबंधन ने जबरदस्त जीत हासिल की। सबसे ज्यादा 11 सीटें भाजपा को मिलीं, जबकि जदयू को नौ सीटें हासिल हुईं। वहीं, महागठबंधन से राजद को यहां सात सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला।
जिलेवार हालात देखें तो एनडीए ने मधुबनी जिले में 8, दरभंगा जिले में 7 और समस्तीपुर जिले में 5 सीटें हासिल कीं। वहीं, राजद को मधुबनी में 2 सीटें, दरभंगा में 1 सीट और समस्तीपुर में चार सीट हासिल हुईं। इसके अलावा दरभंगा जिले में दो सीटें विकासशील इंसान पार्टी, जबकि समस्तीपुर में आने वाली एक सीट कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) को मिली।
(ii). 2015 विधानसभा चुनाव
2015 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन के लिए जबरदस्त नतीजों वाला रहा। वहीं, एनडीए का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। भाजपा ने इन चुनावों में दरभंगा प्रमंडल की 30 में से सिर्फ तीन सीटें ही हासिल कीं। वहीं, महागठबंधन से जदयू को 13 सीटें मिलीं। पार्टी को समस्तीपुर से सबसे ज्यादा छह सीट मिलीं। इसके अलावा राजद ने 11 सीटें हासिल कीं। यानी महागठबंधन की जीत में दरभंगा का बड़ा योगदान रहा। इसके अलावा रालोसपा को एक सीट और कांग्रेस को दो सीटें हासिल हुईं।
(iii). 2010 विधानसभा चुनाव
2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने एकतरफा तौर पर बाजी मारी। भाजपा को यहां 11 सीटें मिलीं, जिनमें छह अकेले दरभंगा जिले से थीं। वहीं, जदयू ने यहां 12 सीटें हासिल कीं। दूसरी तरफ राजद को यहां सिर्फ 7 सीटें मिलीं।
(i). 2020 के चुनाव
2020 के चुनाव में भले ही महागठबंधन को हार मिली थी। लेकिन मगध प्रमंडल में राजद ने अपना जलवा बरकरार रखा। पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले इस क्षेत्र में 2020 में राजद ने 26 में से 15 सीटें जीती थीं। वहीं, उसकी गठबंधन की साथी कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं। एनडीए का प्रदर्शन मगध में कुछ खास नहीं रहा और यहां भाजपा को महज तीन सीटें हासिल हुईं। जबकि जदयू यहां खाता तक नहीं खोल पाई। हालांकि, एनडीए की साथी जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (हम) यहां तीन सीटें पाने में सफल रही। पार्टी ने गया की तीन सीटें जीतीं, जिनमें जीतनराम मांझी ने खुद इमामगंज सीट पर कब्जा जमाया। इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने दो सीटें जीत लीं।
(ii). 2015 का चुनाव
2015 के विधानसभा चुनाव में भी एनडीए का प्रदर्शन मगध क्षेत्र में कुछ खास नहीं रहा, जबकि महागठबंधन से राजद ने 10 सीटें हासिल कर लीं। इसके अलावा गठबंधन में उसकी साथी जदयू को छह सीटें मिलीं और कांग्रेस ने चार सीट हासिल कीं। इस तरह महागठबंधन को इस प्रमंडल से अकेले 20 सीटें मिलीं। दूसरी तरफ
भाजपा को इस क्षेत्र में महज पांच सीटों से संतोष करना पड़ा। एनडीए में उसकी साथी हम को भी एक ही सीट मिली।
(iii). 2010 का चुनाव
2010 का विधानसभा चुनाव एनडीए के लिए काफी बेहतर रहे थे। मगध क्षेत्र में भी गठबंधन का अच्छा प्रदर्शन देखा गया। भाजपा को यहां 8 सीटें हासिल हुईं। उधर जदयू ने यहां 16 सीटें हासिल की थीं। यानी एनडीए को 26 में से 24 सीटों पर जीत मिली थी। इस गठबंधन ने गया जिले में ही पांच सीटें हासिल की थीं, जबकि औरंगाबाद की चार और जेहानाबाद-नवादा की तीन-तीन सीट भी इसी गठबंधन को मिलीं। राजद को इस पूरे प्रमंडल में एक सीट मिली, जो कि औरंगाबाद जिले की सीट थी। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
(i). 2020 का चुनाव
2020 के विधानसभा चुनाव में पूर्णिया को अपना गढ़ साबित करते हुए भाजपा ने यहां 8 सीटें हासिल कीं। वहीं, जदयू को यहां 4 सीटें मिलीं। इस तरह पूर्णिया प्रमंडल की आधी सीटें यानी 12 सीटें एनडीए के खाते में गईं। एनडीए को अररिया, कटिहार और पूर्णिया तीनों में ही चार-चार सीटें मिलीं।
दूसरी तरफ महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद को इस पूरे प्रमंडल में सिर्फ एक किशनगंज जिले की सीट मिली। उससे ज्यादा सीटें महागठबंधन की साथी पार्टी कांग्रेस को मिली, जिसके पांच उम्मीदवार जीत गए। इनके अलावा एआईएमआईएम को पांच और कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) को एक सीट से संतोष करना पड़ा।
(ii). 2015 का चुनाव
2015 के चुनाव में राजद-जदयू और कांग्रेस के साथ आने की वजह से भाजपा को यहां नुकसान हुआ था। पार्टी को यहां छह सीटें मिलीं। अररिया, पूर्णिया और कटिहार में पार्टी को दो-दो सीटें मिलीं। उधर महागठबंधन के लिए पूर्णिया प्रमंडल की सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस, जिसे आठ सीटें हासिल हुईं। वहीं, राजद को तीन सीटें मिलीं। जबकि जदयू को जो छह सीटें मिलीं, उनमें अररिया, किशनगंज और पूर्णिया जिले की दो-दो सीटें रहीं।
(iii). 2010 का चुनाव
2010 के चुनाव में एनडीए का जलवा पूर्णिया में भी देखने को मिला। भाजपा ने यहां की 24 में से 13 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जदयू को चार सीटें मिलीं। इस तरह अकेले भाजपा ने 50 फीसदी से ज्यादा सीटें हासिल कर लीं। वहीं, विपक्षी दल राजद को इस प्रमंडल में सिर्फ एक सीट ही मिली। उधर राजद की गठबंधन की साथी लोजपा को दो सीटें मिलीं। कांग्रेस को तीन और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी को मिली।
(i). 2020 के चुनाव
2020 के चुनाव में राजद को सबसे बड़ी पार्टी बनवाने में सारण की बड़ी भूमिका थी। राजद के गढ़ के तौर पर इस प्रमंडल की पहचान लंबे समय से स्थापित रही है। 2020 के चुनाव में भी राजद को 11 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन में उसकी साथी कांग्रेस को एक सीट मिली थी। उधर एनडीए से भाजपा ने यहां सात सीटें जीतीं, जबकि जदयू को 2 सीटों पर जीत मिली। उधर कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) को दो और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को एक सीट मिली थी।
(ii). 2015 के चुनाव
2015 के चुनावों में सारण प्रमंडल में महागठबंधन का बोलबाला रहा। राजद-जदयू और कांग्रेस ने यहां 24 में से 18 सीटों पर बाजी मार ली। अकेले राजद ने 9 सीटें जीतीं, जिनमें छह सीटें सारण जिले से थीं। उधर जदयू को सीवान जिले की पांच सीट समेत इस प्रमंडल से कुल 7 सीटें हासिल हुईं। दो सीटें कांग्रेस के खाते में जुड़ीं। दूसरी तरफ भाजपा यहां सिर्फ पांच सीटें ही जीत पाई। एक सीट कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के खाते में जुड़ी।
(iii). 2010 का चुनाव
बिहार में 2010 के चुनाव में सारण प्रमंडल में एनडीए ने नीतीश कुमार के काम की बदौलत 24 में से 22 सीटें जीत लीं। इनमें 12 सीटें भाजपा को मिलीं और 10 सीटों पर जदयू का कब्जा हुआ। दूसरी तरफ राजद को यहां सिर्प दो सीटें ही हासिल हुई थीं।
(i). 2020 का चुनाव
मुंगेर प्रमंडल में 2020 का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प रहा था। दरअसल, इस प्रखंड में भाजपा, जदयू और राजद तीनों ही प्रमुख दलों को 5-5 सीटें मिली थीं। वहीं, कांग्रेस को यहां 2 सीटें हासिल हुईं। हालांकि, गठबंधन में होने की वजह से एनडीए को इस प्रमंडल से 10 सीटें मिल गईं। दूसरी तरफ महागठबंधन यहां सात सीटों पर ही रह गया। इसके अलावा लोजपा को एक सीट मिली, जबकि भाकपा को दो, हम को एक और निर्दलीय को एक सीट मिली थी।
(ii) 2015 का चुनाव
2015 में पूरे बिहार के साथ-साथ महागठबंधन का मुंगेर में भी बोलबाला रहा। यहां राजद-जदयू ने आठ-आठ सीटें हासिल कीं, वहीं गठबंधन की तीसरी साथी कांग्रेस को भी चार सीटें मिलीं। इस तरह महागठबंधन ने 22 में से 20 सीटों पर कब्जा जमाया। इसके अलावा भाजपा के खाते में सिर्फ दो सीटें ही आईं। इनमें से एक लखीसराय और एक जमुई जिले से मिली।
(iii) 2010 का चुनाव
नीतीश कुमार के 2005 से 2010 तक के कार्यकाल का बिहार में एनडीए को फायदा मिला और 2010 में विधानसभा चुनाव में एनडीए ने एकतरफा तरह से जीत हासिल की। जहां जदयू को मुंगेर प्रमंडल में 14 सीटें मिलीं, वहीं भाजपा को 5 सीटें हासिल हुईं। दूसरी तरफ राजद, झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाकपा यहां एक-एक सीट ही जीतने में सफल हुईं। राजद को सिर्फ खगड़िया जिले में ही एक सीट मिली।
(i). 2020 का विधानसभा चुनाव
2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू का किला बचाए रखने में कोसी प्रमंडल की अहम भूमिका रही थी। दरअसल, पार्टी ने अपने इस गढ़ में 13 में से कुल आठ सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं, राजद को तीन और भाजपा को महज दो सीटें मिलीं। दूसरी तरफ कांग्रेस, लोजपा समेत अन्य पार्टियों का खाता भी नहीं खुल पाया।
(ii). 2015 का विधानसभा चुनाव
2015 के विधानसभा चुनाव में कोसी प्रमंडल में महागठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की थी। जदयू ने यहां अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आठ सीटें हासिल कर लीं, जबकि राजद ने यहां चार सीटें जीती थीं। इस तरह 13 में से 12 सीटें अकेले महागठबंधन को मिलीं। जबकि एक सीट भाजपा के खाते में गई थी।
(iii). 2010 का विधानसभा चुनाव
2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने कोसी प्रमंडल को अपने गढ़ के तौर पर स्थापित किया। पार्टी को यहां 10 सीटों पर जीत मिली। वहीं, एनडीए में उसकी साथी भाजपा एक सीट जीत पाई। राजद को यहां मधेपुरा और सहरसा में एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा।
(i). 2020 का विधानसभा चुनाव
2020 के विधानसभा चुनाव भागलपुर प्रमंडल में एनडीए ने सीधे तौर पर महागठबंधन को मात दी। भाजपा ने यहां की 12 सीटों में से पांच सीटों पर कब्जा जमाया। जदयू को चार सीटें मिलीं। दूसरी तरफ विपक्ष में खड़ी महागठबंधन की राजद को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली। राजद की एक सीट भागलपुर और एक सीट बांका जिले से आई। वहीं, कांग्रेस की सीट भागलपुर से आई थी।
(ii). 2015 का विधानसभा चुनाव
2015 में राजद-जदयू के साथ आने से महागठबंधन ने भागलपुर प्रमंडल में बड़ी जीत हासिल की। इसकी 12 में से छह सीटें अकेले जदयू के खाते में गईं। इसमें तीन सीटें भागलपुर और तीन सीटें बांका जिले से आई थीं। इसके अलावा राजद को भी तीन सीटें मिलीं। महागठबंधन की तीसरी साथी पार्टी कांग्रेस को यहां भागलपुर जिले से दो सीटें मिलीं।
(iii). 2010 का चुनाव
2010 में एनडीए को भागलपुर प्रमंडल में 12 में से कुल 10 सीटें हासिल हुईं। इनमें जदयू को छह सीटें (भागलपुर-बांका से तीन-तीन सीटें) और भाजपा को चार सीटें मिलीं। वहीं, विपक्षी कांग्रेस को भागलपुर जिले से एक सीट और राजद को बांका जिले से एक सीट हाथ लगी थी।