एक ही पद पर लंबे समय तक न रहें अधिकारी..इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा ?
एक ही पद पर लंबे समय तक न रहें अधिकारी’, संसद समिति ने की सिफारिश; रिपोर्ट में लिखा- इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा
संसद की स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट पेश करते हुए बताया है कि कई अधिकारी अनुकूल मंत्रालयों या स्थानों पर आठ-नौ वर्षों से अधिक समय से तैनात हैं। कमेटी ने कहा है कि नीति के अनुसार तत्काल सभी तबादले किए जाने चाहिए और कोई भी अधिकारी किसी भी मंत्रालय में निर्धारित समय सीमा से अधिक नहीं रहे। रिपोर्ट में इस तरह की खामियों को दूर करने को कहा गया है।
- कमेटी ने रिपोर्ट में दिए कई सुझाव
- कमेटी ने तत्काल ट्रांसफर की मांग की
- रोटेशन नीति लागू नहीं होने का दावा
दिल्ली। कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने कहा है कि अधिकारियों के लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। लिहाजा नीति के अनुसार तत्काल सभी तबादले किए जाने चाहिए और कोई भी अधिकारी किसी भी मंत्रालय में निर्धारित समय सीमा से अधिक नहीं रहे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से संबंधित अनुदान मांगों (2025-26) पर 27 मार्च को संसद में पेश अपनी 145वीं रिपोर्ट में समिति ने कहा कि सभी अधिकारियों के लिए एक रोटेशन नीति रही है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा।
8-9 साल से तैनात हैं अधिकारी
ऐसे भी अधिकारी हैं जो अनुकूल मंत्रालयों या स्थानों पर आठ-नौ वर्षों से अधिक समय से तैनात हैं, खासकर आर्थिक एवं संवेदनशील मंत्रालयों में। ये अधिकारी संगठन प्रमुखों के चार-पांच बार बदल जाने के बावजूद अपने पद पर बने हुए हैं। इस प्रवृत्ति का आंकलन किया जाना चाहिए।रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं जिनमें अधिकारियों ने अपनी पोस्टिंग में इतनी चतुराई का इस्तेमाल किया है कि उनका पूरा करियर एक ही मंत्रालय में रहा है। इस तरह की खामियों को तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
समिति ने कामकाज की समीक्षा की
- समिति ने यह टिप्पणी केंद्रीय सचिवालय सेवाओं (सीएसएस) और केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवाओं (सीएसएसएस) के कामकाज की समीक्षा करते समय की, जो केंद्रीय सचिवालय के कामकाज का मुख्य आधार हैं।
- रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति के संज्ञान में लाया गया है कि खासकर सीएसएस एवं सीएसएसएस में सभी राजपत्रित अधिकारियों को संवेदनशील और गैर-संवेदनशील पोस्टिंग के आधार पर रोटेट किया जाता है।’
- इसके मुताहिक, ‘संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों को तीन वर्षों के बाद बदल दिया जाता है। इसी तरह मंत्रालयों को भी आर्थिक और गैर-आर्थिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वित्त मंत्रालय में ऐसे विभाग हैं जिन्हें आर्थिक और गैर-आर्थिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है।’