बीते विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो बसपा का वोट बैंक करीब 0.25 फीसद कम हुआ है। इससे साफ है कि बिहार में पार्टी के केंद्रीय संयोजक आकाश आनंद और नेशनल कोआर्डिनेटर रामजी गौतम बिहार यात्रा समेत तमाम कवायदों के बावजूद सियासी जमीन तैयार नहीं कर सके।
बसपा सुप्रीमो मायावती की एकमात्र रैली का भी कोई खास असर नहीं दिखा। बिहार चुनाव के नतीजों से साफ है कि बसपा का दलित वोट बैंक तो बरकरार रहा, लेकिन मुस्लिम और अन्य जातियों ने पार्टी प्रत्याशियों को नकार दिया।
बिहार चुनाव के इन नतीजों के बाद बसपा को डेढ़ साल बाद यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति नए सिरे से तय करनी पड़ सकती है।