मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव !

मध्यप्रदेश भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव
अब सर्टिफाइड ‘ग्रीन बिल्डिंग’ पर 3 से 5% अतिरिक्त एफएआर की छूट

मध्य प्रदेश सरकार ने भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की विशेष छूट मंजूर की है। इसके लिए ‘मप्र भूमि विकास नियम, 2012’ में संशोधन किया गया गया है। छूट का फायदा सर्टिफाइड आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी भवन ले सकेंगे।

नए नियमों के तहत अब भवनों को उनकी ‘ग्रीन रेटिंग’ के आधार पर 3% से 5% तक अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी जाएगी। यह रेटिंग भारतीय ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल, गृह या समकक्ष संस्था के प्रमाणपत्र के आधार मिल सकेगी।

संशोधन के मुताबिक जिन भवनों में ऊर्जा दक्षता, पानी की बचत, रीसाइक्लिंग, ग्रीन कवर और प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल होंगे, वही अतिरिक्त एफएआर के लिए पात्र होंगे। एक से अधिक सर्टिफिकेशन में भी एक बार ही अतिरिक्त एफएआर मिलेगा।

बिल्डिंग परमिशन के साथ बताना होगा कौन सा सर्टिफिकेशन लेंगे?

नई व्यवस्था में यह भी तय कर दिया गया है कि अतिरिक्त एफएआर केवल उन्हीं प्लॉटों पर लागू होगा, जिनकी वास्तविक निर्माण स्थिति में निर्धारित ग्रीन मानदंड पूरे होते हों। यदि निर्माण पूर्ण होने पर यह शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो अतिरिक्त एफएआर खुद निरस्त हो जाएगा। बिल्डिंग परमिशन के साथ ही बताना होगा कि किस सर्टिफिकेशन के लिए दावा किया जा रहा है।

उतना अतिरिक्त निर्माण कर पाएंगे और बाद में सर्टिफिकेशन के आधार पर भवन को ग्रीन बिल्डिंग का दर्जा मिलेगा। सर्टिफिकेशन नहीं मिला तो अतिरिक्त निर्माण का तय कम्पाउंडिंग शुल्क देना होगा।

किस रेटिंग पर कितना एफएआर: आईजीबीसी गोल्ड, गृह 4 स्टार या एलईईडी गोल्ड रेटिंग पर- 3% अतिरिक्त निर्माण की छूट { आईजीबीसी प्लैटिनम, गृह 5 स्टार या एलईईडी प्लैटिनम रेटिंग पर- 5% अतिरिक्त निर्माण की छूट ।

फैसला… राहत भी जिम्मेदारी भी

इस कदम से ऊर्जा खपत में कमी, पानी की बचत, बेहतर वायु गुणवत्ता और कार्बन फुटप्रिंट में गिरावट जैसे फायदे होंगे। बिल्डरों के लिए यह फैसला राहत भी है और जिम्मेदारी भी। राहत ये कि अतिरिक्त एफएआर से परियोजनाओं की लागत नहीं बढ़ेगी, और जिम्मेदारी इसलिए कि ग्रीन मानकों पर समझौता नहीं किया जा सकेगा। पर्यावरण का ध्यान रखते हुए भोपाल-इंदौर जैसे घनी आबादी वाले शहरों में अतिरिक्त निर्माण की सुविधा उपलब्ध होगी।

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