‘मुकदमों के बोझ को कम करना प्राथमिकता…’, देश के अगले CJI सूर्यकांत बोले !
‘मुकदमों के बोझ को कम करना प्राथमिकता…, देश के अगले CJI सूर्यकांत बोले- ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है मध्यस्थता
देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए एक सुझाव दिया है. सोमवार को देश के 53वें सीजेआई का कार्यभार संभालने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपने आवास पर सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान अपने कार्यकाल के दौरान अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया.

सोमवार को देश के 53वें सीजेआई का कार्यभार संभालने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपने आवास पर सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान अपने कार्यकाल के दौरान अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की संख्या 90 हजार पहुंच गई है और इससे निपटना हमारी पहली प्राथमिकता होगी. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम इसके लिए काम कर रहे हैं और इससे निपटना हमारी पहली प्राथमिकता में है.
लंबित मुकदमों को निपटाने की दिशा में करेंगे काम
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अलावा, देशभर की अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ से निपटने की दिशा में काम करेंगे. उन्होंने कहा, हम और हमारे साथी न्यायाधीश पहले से अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन कई कारणों से मुकदमें अधिक दाखिल हो रहे हैं. इसकी वजह यह हो सकती है कि मामला दाखिल करना अब आसान हो गया है. मुकदमों के बोझ से निपटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने कुछ ऐसे मामलों की पहचान की है जिसके निपटारा होने से देश भर की अदालतों में बहुत सारे मुकदमों का आसानी से निपटारा हो सकता है.
मामलों के निपटारों का रोडमैप होगा तैयार
उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली में अधिग्रहण से जुड़े मामले में उनके एक फैसले से करीब 1200 से अधिक मामलों का निपटारा हो गया और हम अब इसी तरह उन केसों की पहचान करेंगे और प्राथमिकता से निपटारा करेंगे जिसके बहुत सारे मामले जुड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि किसी मामले में एक हजार मामले जुड़े हों, किसी में 500 या किसी में 200 या फिर 100 मामले. उन्होंने कहा कि कार्यभार संभालने के वह सभी उच्च न्यायालयों से ऐसे मामलों की जानकारी मांगेंगे ताकि निपटारे के लिए रोडमैप तैयार किया जा सके.
मध्यस्थता निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिका
देश के अगले सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इंडियन लीगल लैंडस्केप में मीडिएशन और मीडिएशन सेंटर्स के डेवलपमेंट पर भी ज्यादा जोर देने की जररूत है. उन्होंने कहा कि मुकदमों के निपटारे में मध्यस्थता गेम चेंजर साबित हो सकती है. साथ ही कहा कि विवाद के समाधान में अब बीमा, बैंक सहित बड़ी बड़ी कंपनियां मध्यस्थता के लिए आगे आ रही हैं और सुप्रीम कोर्ट से मध्यस्थत की मांग करते हैं. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में मुकदमों को कम करने में मध्यस्थता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
सिर्फ सुप्रीम कोर्ट नहीं बना सकता है उच्च न्यायालयों का पीठ
उच्च न्यायालयों, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में उच्च न्यायालय का खंडपीठ बनाने के मुद्दे पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने साफ किया कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और इसमें कई इंस्टीट्यूशनल स्टेकहोल्डर शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, एक बहुत बड़ा राज्य होने के नाते, उच्च न्यायालय के किसी भी नई पीठ के लिए एक पूरी और अच्छी तरह से सोची-समझी विचार की जरूरत होगी.
कभी भी की जा सकती है राष्ट्रीय महत्व के मामले की सुनवाई
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व से जुड़े मामलों की सुनवाई कभी की की जा सकता है. उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मामले में कोई बड़ा कद वाला वकील पेश हो रहा है या कोई आब या जूनियर वकील. उन्होंने इस बात को सिरे से नकार दिया कि आम वकील के पेश होने पर मामले को सुना नहीं जाता है या फिर उच्च न्यायालय भेज दिया जाता है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायाधीश रात को ही फाइल पढ़कर मामले के बारे में अपनी राय बना लेते हैं, लेकिन अदालत में दलील सुनने के बाद आदेश पारित करते हैं.
प्रदूषण के बावजूद टहलना नहीं छोड़ता
दिल्ली के प्रदूषण का जिक्र करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह चिंताजनक है, लेकिन मैं सुबह की शैर करना बंद नहीं करता. उन्होंने कहा कि मैं हर सुबह कम से कम एक घंटा टहलता हूं. प्रदूषण पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात की.
एआई के फायदे और नुकसान हैं
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के अपने फायदे भी हैं और मुश्किलें भी. हम इसकी कमियों का पता लगाएंगे. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट चैटजीपीटी जैसे टूल्स से हुई गलतियों से होने वाले मामलों की भी जांच करेगा. उन्होंने चैक बाउंस से जुड़े वर्चुअल कोर्ट बंद करने के सवाल पर यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई जज करे.
जजों पर सोशल मीडिया ट्रोलिंग का नहीं पड़ता है प्रभाव
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सोशल मीडिया पर होने वाले टिका-टिप्पणी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और पड़ना भी नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि वास्तव से ये सोशल मीडिया, अनसोशल है. उन्होंने जोर देकर कर कि किसी भी जज को सोशल मीडिया ट्रोलिंग या कमेंट्री के दबाव में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता सबसे जरूरी होनी चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल होंगे शपथ ग्रहण समारोह में
देश के 53वें सीजेआई का कार्यभार संभालने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण समारोह एतिहासिक होने जा रहा है. इसमें कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. सुप्रीम कोर्ट सूत्रों मे मुताबिक सोमवार को जब सीजेआई के पद की शपथ लेंगे तो उस मौके पर नेपाल, भूटान, श्रीलंका, केन्या, मॉरिशस, ब्राजील और मलेशिया के सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश और उनके परिवार मौजूद रहेंगे.

