दिल्ली

कैसे ढह गया इंडिगो का सिस्टम, …मनमानी के लिए DGCA कितना जिम्मेदार ?

कैसे ढह गया इंडिगो का सिस्टम, क्राइसिस की इनसाइड स्टोरी
पायलट छुट्‌टी पर, फ्लाइट कैंसिल नहीं कीं, मनमानी के लिए DGCA कितना जिम्मेदार

34 साल के पायलट कैप्टन रोहित सक्सेना (बदला हुआ नाम) एयरलाइन कंपनी इंडिगो में 3 साल से काम कर रहे हैं। रोहित को 5 हजार फ्लाइंग अवर्स का अनुभव है। वे अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहते क्योंकि नौकरी जाने का खतरा है। पहचान छिपाकर उन्होंने हमें वो सब बताया, जो इंडिगो क्राइसिस की जड़ में है।

2 दिसंबर को इस क्राइसिस की शुरुआत हुई। 6 दिसंबर तक इंडिगो की 2000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ीं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता समेत देश भर में लाखों पैसेंजर परेशान होते रहे। उन्हें कई-कई घंटे एयरपोर्ट पर रहना पड़ा। इसके कई वीडियो-फोटो सामने आ चुके हैं।

 

आखिर इंडिगो क्राइसिस की वजह क्या है, इसके लिए इंडिगो के अलावा और कौन जिम्मेदार है, इस पर हमने इंडिगो के दो पायलट और चार एविएशन एक्सपर्ट्स से बात की। इससे समझ आया कि इस क्राइसिस के दो जिम्मेदार हैं।

1. इंडिगो: DGCA की गाइडलाइन के हिसाब से तैयारी नहीं की

DGCA की तरफ से जारी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL रेगुलेशन पहली बार जनवरी 2024 में नोटिफाई किए गए थे। इंडिगो के पास इन गाइडलाइंस के हिसाब से तैयारी के लिए काफी समय था। हालात बिगड़े तो उसने 5 दिन में 4 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं। इससे अलग-अलग रूट पर यात्री फंस गए और एयरपोर्ट पर अव्यवस्था फैल गई।

2. DGCA: नियमों का पालन करवाना था, इंडिगो के मामले में अनदेखी की

फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी DGCA की थी। कांग्रेस ने इस पर सवाल किया है कि DGCA क्या कर रहा था। पार्टी के सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि DGCA को पता था देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इसके लिए तैयार नहीं है। ये नियम 1 नवंबर 2025 से पूरी तरह लागू किए गए। DGCA ने इंडिगो से इनका पालन क्यों नहीं करवाया।

एक पायलट के नजरिए से समझिए

सिस्टम अचानक स्लो हो गया, आधे घंटे की प्रोसेस में एक-सवा घंटा लगा

इंडिगो के पायलट रोहित बताते हैं, ‘2 दिसंबर को मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर था। एयरपोर्ट पर उड़ान करने से पहले प्री-फ्लाइट तैयारियों में एवरेज से ज्यादा वक्त लगा। ग्राउंड स्टाफ क्लियरेंस से लेकर बाकी प्रोसेस जिनमें आधा घंटा लगता है, उसमें एक-सवा घंटा लगा।’

‘3 और 4 दिसंबर को भी ऐसा ही हुआ। लगा कि इंडिगो का सिस्टम अचानक स्लो हो गया है। इसके पीछे क्या टेक्निकल या मैनेजीरियल कारण हैं, ये पायलट्स को नहीं पता। हमें तो प्लेन उड़ाने के लिए रोस्टर मिलता है। हम उसके मुताबिक उड़ान के लिए निकल पड़ते हैं।’

क्या हाल में अचानक ज्यादा फ्लाइट उड़ाने और ज्यादा देर तक ड्यूटी करने का प्रेशर बना है? रोहित जवाब देते हैं, ‘ज्यादा उड़ान का दबाव नहीं है। हां, फ्लाइंग टाइम के अलावा दूसरे अप्रूवल्स जैसे टैक्सी, पार्किंग, एटीसी क्लियरेंस, सिक्योरिटी क्लियरेंस, चेकलिस्ट क्लियरेंस, ग्राउंड क्लियरेंस में ज्यादा वक्त लगा है।’

इस क्राइसिस के पीछे FDTL के नए नियम बताए जा रहे हैं, ये तो 1 नवंबर से लागू हो चुके थे। ये संकट एक महीने बाद क्यों आया? क्या एक महीने से पायलट ज्यादा उड़ान भर रहे थे और अचानक कम करने लगे?

रोहित बताते हैं, ‘1 नवंबर से नियम लागू हुए, तब से नियमों के मुताबिक ही रोस्टर बनाए जा रहे थे। हफ्ते में 36 की जगह 48 घंटे का आराम दिया गया। हम पहले के बराबर ही उड़ान भर रहे थे। समझ नहीं आ रहा कि अचानक 3 दिसंबर से क्या हो गया।’

‘पायलट कम, नई भर्ती की प्रोसेस धीमी’

हमने इंडिगो में काम करने वाले एक ट्रेनी पायलट से भी बात की। वे नाम जाहिर नहीं करना चाहते। पायलट बताते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि नए नियम अचानक आ गए। कंपनी को पहले से पता था। ऐसा नहीं है कि भर्तियां नहीं हो रही हैं, लेकिन प्रोसेस बहुत धीमी है। काफी पायलट छुट्टी पर गए हुए हैं। साल का आखिरी महीना चल रहा है और उनकी छुट्टियां पेंडिंग थीं।’

‘बहुत सारे पायलट नौकरी छोड़ रहे हैं क्योंकि अनुभव लेने के बाद मिडिल ईस्ट या दूसरे देशों में अच्छी सैलरी मिलती है। पिछले कुछ साल से भारत में पायलट की सैलरी ग्रोथ रुकी हुई है। जाहिर सी बात है कि FDTL नियम सही हैं। पायलट्स को आराम चाहिए। इंडिगो बहुत ज्यादा उड़ान भरवाती है। कंपनी में नए नियमों के हिसाब से पायलट की कमी तो है।’

‘एयरलाइन सेक्टर में इंडिगो की हिस्सेदारी 60% से ज्यादा है। एक तरीके से उसका एकाधिकार है। कंपनी हर चीज को बहुत टाइट कॉस्टिंग करके रखती है, तभी प्रॉफिट में रहती है। अंदरखाने लोग यही बोल रहे हैं कि इंडिगो ने दबाव बनाने के लिए ये सब किया है क्योंकि कंपनी ने DGCA के सामने जो मांगें रखी थीं, वे मान ली गई हैं।’

इंडिगो की 100 में से सिर्फ 3 फ्लाइट वक्त पर उड़ीं

इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी है। उसकी रोजाना करीब 2300 डोमेस्टिक और इंटरनेशनल उड़ानें हैं। क्राइसिस के दौरान इंडिगो की ऑनटाइम परफॉर्मेंस 5 दिसंबर को 3.7% पर आ गई। यानी 100 फ्लाइट में सिर्फ 3.7 ही वक्त पर उड़ान भर पाईं।

5 दिसंबर को ही अकासा एयर की ऑनटाइम परफॉर्मेंस 79%, एलायंस एयर की 73%, एयर इंडिया एक्सप्रेस की 66.3%, स्पाइसजेट की 62.3% रही। 4 दिसंबर को इंडिगो की सिर्फ 8.5% और 3 दिसंबर को 19.7% फ्लाइट ही सही समय पर उड़ान भर पाई थीं।

इंडिगो ने नियम क्यों नहीं माने, सरकार पर भी सवाल

एयरलाइंस पायलट एसोसिएशन के कैप्टन अनिल राव पायलट और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। राव कहते हैैं, ‘हमने DGCA और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से यही सवाल किया है कि ये संकट अचानक क्यों आया। FDTL का नियम 2 साल से लागू किया जा रहा है। एयरलाइन कंपनी के पास इसे लागू करने के लिए काफी वक्त था। फिर भी ऐसा नहीं किया गया।’

‘DGCA और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को पता था कि नए नियमों के हिसाब से एयरलाइंस काम नहीं कर रही हैं।’

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सरकार कैसे कह सकती है कि ये अचानक हो गया। सरकार चाहे तो खुद जांच कर सकती है कि ये पायलट और क्रू की कमी की वजह से हुआ या फिर कोई और वजह थी।

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नियम लागू होने के 35 दिन बाद कैसे आया क्राइसिस

कैप्टन अनिल राव कहते हैं, ‘ये कहना गलत है कि सब कुछ अचानक हो गया है। FDTL 1 नवंबर से लागू है और ये संकट करीब 35 दिन बाद आया। एटीसी और क्रू के रिकॉर्ड देखें तो पता चलेगा कि सारे पायलट और क्रू टाइम पर जा रहे थे, फिर फ्लाइट आने-जाने में देरी क्यों हुई। ये पूरी व्यवस्था पारदर्शी नहीं है। इससे नहीं पता चल रहा कि क्राइसिस की असली वजह क्या है।’

‘इंडिगो ने सरकार पर दबाव डालने के लिए ये संकट खुद खड़ा किया है। कंपनी नियमों में राहत चाहती थी। राहत नहीं मिली, तो उसने सिस्टम ही पलट दिया। ये दिक्कत क्यों खड़ी हुई, इसका साफ-साफ कोई जवाब नहीं दिया गया है।’

एक्सपर्ट बोले- इस स्थिति के लिए सिर्फ इंडिगो जिम्मेदार

एविएशन एक्सपर्ट जीतेंद कहते हैं, ‘इस पूरी अफरातफरी के लिए सिर्फ इंडिगो जिम्मेदार है। एयरलाइन कंपनियों के अनुरोध पर ही DGCA ने दो फेज में नियम लागू करवाए थे। शायद इंडिगो के मैनेजमेंट को बहुत ज्यादा भरोसा था कि नियम लागू करवाने में थोड़ा और वक्त ले लेंगे। कंपनी को पता चल गया कि DGCA ने उसका अनुरोध नहीं माना। उसके पास इतने पायलट नहीं हैं कि सारा ऑपरेशन नॉर्मल तरीके से हो।’

भार्गव आगे कहते हैं, ‘नियमों में बदलाव के हिसाब से ज्यादा स्टाफ की जरूरत थी। DGCA का सामान्य नियम है कि एक पायलट एक साल में 1000 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकता है। अभी दिसंबर है। मुमकिन है कि नवंबर तक कई पायलट ने अपनी लिमिट पूरी कर ली हो और वे उपलब्ध न हों। इसमें कई सारे फैक्टर एक साथ जुड़े हैं।’

‘इंडिगो के पास दो ही विकल्प थे। पहला, जो अभी हुआ है। उन्होंने सारी फ्लाइट्स का शेड्यूल वैसा ही रखा। बाद में उन्हें कैंसिल करना पड़ा और यात्रियों को दिक्कतें हुईं। दूसरा, जो फ्लाइट ऑपरेट नहीं हो सकती थीं, उन्हें पहले ही कैंसिल कर देते। पायलट की तादाद के हिसाब से फ्लाइट ऑपरेट करना चाहिए था।’

‘DGCA ने समस्या को अनदेखा किया, हालात हाथ से निकल गए’

जीतेंद्र भार्गव कहते हैं, ‘ये सब DGCA को भी पता होगा। इसके बावजूद स्थिति को हाथ से निकलने दिया। नवंबर में भी इंडिगो की 1200 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हुई थीं। ऐसे में DGCA को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए था।’

‘अभी DGCA के सामने चुनौती थी कि कैसे हालात काबू में लाए। एक ऑप्शन था कि वो इंडिगो को ही समाधान करने देता। ये मुमकिन नहीं था क्योंकि पायलट पहले से तैयार नहीं मिलते। अचानक पायलट की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता था इसलिए DGCA ने नियमों में फिर से ढील दी।’

एविएशन एक्सपर्ट डॉ. सुभाष गोयल भी इस क्राइसिस के लिए इंडिगो को जिम्मेदार मानते हैं। वे कहते हैं, ‘अगर दूसरी एयरलाइंस नियमों के हिसाब से अपने क्रू मेंबर्स की संख्या बढ़ा सकती हैं, तो इंडिगो क्यों नहीं। उनके पास 60% मार्केट शेयर है, तो उन्होंने सोचा कि वे ब्लैकमेल करके पुराने नियमों पर ही चलेंगे।’

‘एयरलाइन कंपनियों पर तगड़ा फाइन लगाना चाहिए’

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के प्रेसिडेंट चरणवीर सिंह रंधावा बताते हैं, ‘इंडिगो कोशिश कर रही थी कि नए नियम लागू न हो पाएं। पिछले साल भी उन्होंने देरी की थी। हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद कंपनी DGCA के पास गई। पहले फेज में 60-70% नियम जुलाई में ही लागू हो गए हैं। तब इंडिगो की एक भी फ्लाइट में देरी नहीं हुई।’

‘1 नवंबर को दूसरे फेज के नियम लागू किए गए, लेकिन कंपनियां फिर DGCA के पास गईं और नियम में राहत मांगी। एयरलाइन कंपनियों की इन नियमों को लागू करने की कोई मंशा नहीं थी।’

इंडिगो मनमानी करती रही, तो DGCA कहां चूका

चरणवीर सिंह रंधावा DGCA में फ्लाइट इंस्पेक्टर और CFO रह चुके हैं। वे कहते हैं, ‘DGCA में मैकेनिज्म काम करता है। इसके तहत वक्त पर स्पॉट चेकिंग होती है। साल में एक बार रेगुलेटरी ऑडिट करते हैं। रेगुलेटरी चेक के लिए एनुअल सर्विलांस प्लान साल की शुरुआत में जारी होता है। इसमें हर एयरलाइन कंपनी के बारे में रिपोर्ट होती है।’

‘पिछले कुछ साल में जिस तरह से एविएशन इंडस्ट्री बढ़ी है, उसके मुकाबले DGCA के पास मैनपावर नहीं बढ़ा है। इस वजह से ऑडिट ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है। एक एयरलाइन के ऑडिट के लिए 3 दिन का समय मिलता है। इंडिगो की दिन की 2200 फ्लाइट उड़ रही हैं।’

‘अभी जितना मैनपावर है, उसके हिसाब से तो एक महीने तक ऑडिट करना होगा। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के पास DGCA के अलावा रेगुलेशन के लिए दूसरी कोई संस्था नहीं है।’

टिकट के मनमाने रेट पर रोक, सरकार ने किराया तय किया

इंडिगो क्राइसिस के बीच सरकार ने 6 दिसंबर को एयरफेयर कैप लागू कर दिया। इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से कई रूट्स पर टिकट की कीमतें 60 हजार तक पहुंच गई थीं। इसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि हमने सभी प्रभावित रूट्स पर ‘उचित और वाजिब किराया’ सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया है।

एयरफेयर कैप हालात सामान्य होने तक लागू रहेगा। सभी एयरलाइन कंपनियों को निर्देश जारी किया गया है कि वे इसका सख्ती से पालन करें।

सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू ने कहा कि नए FDTL नियम 1 नवंबर से लागू हैं, लेकिन किसी और एयरलाइन को दिक्कत नहीं आई। साफ है कि गलती इंडिगो की है। एयरलाइन की लापरवाही की जांच होगी और एक्शन होना तय है। सरकार इंडिगो के कारण हुई दिक्कत की हाईलेवल इन्क्वायरी कराएगी।

इसके अलावा मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि वो बिना देरी किए यात्रियों को रिफंड दे। सभी कैंसिल या प्रभावित हुई फ्लाइट्स के लिए रिफंड प्रोसेस 7 दिसंबर 2025 को रात 8 बजे तक पूरी होनी चाहिए। किसी से रीशेड्यूलिंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। अगर रिफंड देने में देरी होती है, तो एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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