कटघरे में चीता प्रोजेक्ट का निगरानी तंत्र ???
कूनो नेशनल पार्क में निगरानी की कमजोर व्यवस्था के कारण दो चीता शावकों की अलग-अलग घटनाओं में मौत हो गई, जबकि तीसरा लापता है। अब तक 19 चीतों की मौत से सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठे हैं। तेंदुओं की मौजूदगी, सड़क दुर्घटना और प्रबंधन की लापरवाही से खतरा बढ़ा है।
चीता प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवाल। (फाइल फोटो)
- सड़क हादसे और हमले से दो चीता शावकों की मौत।
- तीसरा शावक लापता, वन विभाग सर्चिंग में जुटा।
- 19 चीतों की मृत्यु, निगरानी तंत्र सवालों में घिरा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को भले ही केंद्र व राज्य सरकार प्रोत्साहित कर रही हो, लेकिन चीतों की मौत ने वन विभाग के निगरानी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़े गए गामिनी चीता के तीन शावकों में से एक की गत पांच दिसंबर को किसी हिंसक जानवर के हमले से मृत्यु के दो दिन बाद ही एक और शावक की रविवार सुबह सड़क हादसे में मृत्यु हो गई।
वह ग्वालियर के घाटीगांव सिमरिया टांका पर सड़क पार कर रहा था। उसे कार ने टक्कर मार दी। तीसरा शावक अभी लापता है। वन विभाग की टीम उसकी सर्चिंग कर रही है। जिस शावक की मौत हुई है, उसका नाम केजी-3 है। सवाल यह है कि वन विभाग दावा करता है कि प्रत्येक चीता पर पांच वन कर्मी निगरानी में रहते हैं, लेकिन चीतों की इस तरह मृत्यु ने निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए हैं। खुले में घूम रहे चीतों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। चीता प्रोजेक्ट पर अब तक 115 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। बावजूद इसके चीतों की सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं हैं।
घास के मैदानों का विकास और ग्रामीणों के विस्थापन पर नहीं दिया पर्याप्त ध्यान चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले कई सुरक्षा उपायों, जैसे घास के मैदानों का विकास और ग्रामीणों के विस्थापन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे चीतों के पलायन और स्थानीय आबादी के साथ टकराव की संभावनाएं बढ़ीं हैं। तत्कालीन मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक वीएन अम्बाडे ने भी चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले उनकी सुरक्षा के उपाय करने की बात कही थी, लेकिन इस पर अमल ही नहीं हुआ।
चीतों के लिए तेंदुए भी खतरा
कूनो में तेंदुओं की संख्या 110 से अधिक है। इसके अलावा ग्वालियर चंबल अंचल के हर 100 किलोमीटर की परिधि में 10 तेंदुए होने का अनुमान है, जो रहवासी क्षेत्रों से खदेड़े जाने के बाद वापस कूनो की ओर रुख कर रहे हैं। इस क्षेत्र में तेंदुए हर उस जगह पर हैं, जहां चीतल, जंगली सूअर, हिरण जैसे शिकार मौजूद हैं। इन्हीं जगहों पर शिकार के लिए चीतों का भी मूवमेंट रहता है।
वन्यप्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि चीते में तेंदुए जैसी आक्रामकता व ताकत नहीं होती है, इसलिए इनके बीच तब तक दूरी रखना ही उपाय है जब तक कि चीतों की संख्या इतनी न हो जाए कि ये झुंड बनाकर अपने से बड़े जानवर पर भारी पड़ सकें।
चीतों की सुरक्षा का करेंगे बेहतर इंतजाम
सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन ने कहा कि सड़क दुर्घटना में चीता शावक की मृत्यु की पहली घटना है। इससे पहले ऐसा नहीं हुआ। हमारा प्रयास होगा कि आगे इस तरह की घटना न हो। चीतों की सुरक्षा को लेकर और बेहतर इंतजार करेंगे।

