क्राइममध्य प्रदेश

छोटों के लिए शेर, बड़ों के आगे ढेर…IAS तो दूर जिन 19 SAS को पकड़ा, एक को भी सजा नहीं ???

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस:छोटों के लिए शेर, बड़ों के आगे ढेर… IAS तो दूर, जिन 19 SAS को पकड़ा, एक को भी सजा नहीं

मप्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के दावे साल दर साल दोहराए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई में तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। पिछले पांच वर्षों में लोकायुक्त पुलिस ने कुल 1271 केस दर्ज किए, जिनमें से 1035 मामले रंगे-हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने (ट्रैप केस) के हैं। यह बताता है कि सिस्टम के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार कितना व्यापक है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि कार्रवाई का दायरा किस स्तर तक पहुंच पाया है।

आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि किसी भी आईएएस अधिकारी के खिलाफ इन पांच वर्षों में एक भी कार्रवाई नहीं हुई है। राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के 19 अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए ट्रैप जरूर किया गया, लेकिन इनमें से किसी एक को भी सजा नहीं दिलाई जा सकी।

रंगे हाथ पकड़े जाने वाले मामलों से अलग हटकर भी, लोकायुक्त पुलिस ने पद का दुरुपयोग करने के 154 और अनुपातहीन संपत्ति के 82 प्रकरण दर्ज किए हैं। लेकिन कार्रवाई की गति यहां भी सुस्त ही रही। कुल मामलों में से 178 प्रकरण अभी भी अभियोजन स्वीकृति के इंतज़ार में अटके हुए हैं, जबकि 1000 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है।

फैसलों की बात करें तो लोकायुक्त पुलिस के पिछले पांच साल में जिन मामलों में अदालतों ने निर्णय दिया है, उनमें 68% में सजा सुनाई गई। लेकिन सजा पाने वालों में कोई बड़ा अधिकारी नहीं है।

लोकायुक्त.. 5 साल में 1271 केस, 1000 केस में चालान से आगे नहीं बढ़ी कहानी

ऐसे अटकी रहती है बड़े अफसरों पर कार्रवाई

  • 19 राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर रंगेहाथ पकड़े गए।
  • 9 मामलों में जांच चल रही है।
  • 4 में अभियोजन मंजूरी लंबित।
  • 4 मामलों में चालान पेश किया।
  • 1 मामले में अभियोजन स्वीकृति के बावजूद चालान नहीं।
  • 1 मामले में खात्मा लगा दिया।

ईओडब्ल्यू… 5 साल में आर्थिक अपराध के 472 प्रकरण दर्ज, 383 अभी विवेचना में ही

दावा– लगातार कार्रवाई, सजा प्रतिशत भी बढ़ा ^पद का दुरुपयोग और रिश्वत मांगने वाले लोकसेवकों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन द्वारा लगातार कार्रवाई की जाती है। भ्रष्टाचार की शिकायतों की पुख्ता जांच के बाद की गई ट्रैप और छापामार कार्रवाई से कोर्ट में सजा का प्रतिशत बढ़ा है। – योगेश देशमुख, डीजी, लोकायुक्त पुलिस

रिश्वतखोरी के किस विभाग में कितने मामले

ग्वालियर से संजय बौहरे की रिपोर्ट

दूसरा पहलू… अभियोजन मंजूरी नहीं, तो खुद पार्टी बन कोर्ट पहुंचा लोकायुक्त

भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में वर्षों से लंबित अभियोजन स्वीकृतियों पर अब लोकायुक्त संगठन ने रुख बदला है। शासन से स्वीकृति लगातार अमान्य किए जाने के बाद लोकायुक्त ने हाईकोर्ट में 35 मामलों में नई याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं का टाइटल राज्य शासन बनाम संबंधित विभाग की जगह लोकायुक्त संगठन बनाम विभाग कर दिया गया है। यह बदलाव हाईकोर्ट की एक टिप्पणी के बाद किया गया है।

भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था-जब शासन खुद स्वीकृति नहीं देना चाहता, तो उसी के नाम से याचिका क्यों? इसके बाद नींद से जागा लोकायुक्त।

…क्सपर्ट– ऋषि शुक्ला, पूर्व सीबीआई डायरेक्टर

BNS के तहत भ्रष्टाचार के केसों में तीन माह में अभियोजन स्वीकृति अनिवार्य होगी।

जीके पाठक, सेवानिवृत्त आईजी (पुलिस)​​​​​​​

ऐसे मामलों में चालान पेश करने की प्रक्रिया तय समय में और स्पष्ट होनी चाहिए।

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