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भारत में दौलत की गहरी खाई, टॉप 10% के पास है देश की दो-तिहाई संपत्ति !!

भारत में दौलत की गहरी खाई, टॉप 10% के पास है देश की दो-तिहाई संपत्ति

भारत में अमीरी और गरीबी के बीच अंतर को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक देश में आर्थिक असमानता खूब है. कुछ प्रतिशत लोगों के पास देश की दो तिहाई से ज्यादा संपत्ति पर अधिकार है.

भारत में दौलत की गहरी खाई, टॉप 10% के पास है देश की दो-तिहाई संपत्ति

गरीबी-अमीरी का बड़ा फासला

भारत में आर्थिक असमानता दुनिया में सबसे ज्यादा है और हाल के समय में इसमें बहुत कम बदलाव आया है. देश में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 प्रतिशत लोग नेशनल इनकम का करीब-करीब 58 प्रतिशत रखते हैं. इसके साथ ही कुल दौलत का लगभग 65 फीसदी हिस्सा यानी 2 तिहाई से ज्यादा हिस्सा इन्हीं 10 फीसदी लोगों के पास ही है. जबकि नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के पास सिर्फ 6.4 प्रतिशत है.

वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत में आर्थिक असमानता खूब हैं. यहां अमीर बहुत है और गरीब बहुत ही गरीब है. ‘भारत में टैक्स न्याय और धन के पुनर्वितरण की ओर’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि आबादी का शीर्ष 1 प्रतिशत राष्ट्रीय आय का 22.6 प्रतिशत कमाता है, जो 1922 के बाद से सबसे ज्यादा है. यह साल वही है जब ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने पहली बार रिकॉर्ड रखना शुरू किया था. अभी के डेटा यह बताते हैं कि भारत के सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोगों के पास अब देश की कुल संपत्ति का 40.1 प्रतिशत हिस्सा है, जो 1961 के बाद से सबसे ज्यादा है.

अर्थशास्त्री नितिन कुमार भारती, लुकास चैंसल, थॉमस पिकेटी और अनमोल सोमांची की लिखित यह रिपोर्ट इस अत्यधिक असमानता से निपटने के लिए एक व्यापक संपत्ति कर और बहुत अमीर लोगों पर सुपर टैक्स के साथ-साथ विरासत कर लगाने का आह्वान करती है. लेखकों ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक बन गया है. 1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण के बाद असमानता में विशेष रूप से तेजी आई है.

महिलाओं की स्थिति में कोई सुधार नहींरिपोर्ट के मुताबिक, देश में प्रति व्यक्ति औसत सालाना इनकम लगभग 6,200 यूरो (PPP) है और औसत दौलत लगभग 28,000 यूरो (PPP) है. महिलाओं की लेबर में हिस्सेदारी 15.7% पर बहुत कम बनी हुई है और पिछले दस सालों में इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है. कुल मिलाकर, भारत में असमानता इनकम, दौलत और जेंडर के मामलों में गहराई से जमी हुई है, जो इकोनॉमी के अंदर लगातार स्ट्रक्चरल बंटवारे को दिखाती है.

World Inequality Report 2026

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रिपोर्ट मेंं सुझाव

रिपोर्ट में देश की आर्थिक असमानता की तस्वीर को दिखाई ही गई है. साथ ही इससे निपटने के लिए सुझाव भी दिए गए हैं. यह रिपोर्ट स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र पर खर्च के लिए राजस्व उत्पन्न करने के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध संपत्ति पर 2% वार्षिक संपत्ति कर और 10 करोड़ से अधिक की संपत्तियों पर 33% विरासत कर का प्रस्ताव करती है.

 Inequality Report (1)

World Inequality Report 2026

रिपोर्ट की मुख्य बातें

  • शीर्ष 10% के पास- कुल संपत्ति का 65%
  • शीर्ष 1% के पास- कुल संपत्ति का 40.1%
  • नीचे के 50% के पास- कुल संपत्ति का सिर्फ़ 6.4%
  • शीर्ष 1% आय का हिस्सा- 22.6% (1922 के बाद से सबसे ज्यादा)
  • राष्ट्रीय आय में अरबपतियों का हिस्सा- 3% (रूस के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा

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