उत्तर प्रदेशराजनीति

यूपी में ठाकुरों के बाद ब्राह्मण विधायकों ने ‘कुटुम्ब’ बनाया…बंद कमरे में 50 MLA साथ बैठे !!!!

यूपी में ठाकुरों के बाद ब्राह्मण विधायकों ने ‘कुटुम्ब’ बनाया:बंद कमरे में 50 MLA साथ बैठे; पूर्वांचल के 2 भाजपा नेताओं ने एकजुट किया

यूपी में विधानमंडल का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस बीच ब्राह्मण विधायकों का कुटुम्ब तैयार हो गया है। शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन यानी मंगलवार की शाम कुशीनगर के भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के लखनऊ आवास पर बैठक हुई। जिसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए।

बैठक में पत्रकार से विधायक बने डॉक्टर शलभ मणि त्रिपाठी भी बैठक में पहुंचे थे। मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की मुख्य भूमिका रही है। खास बात है कि इस बैठक में अन्य पार्टियों के भी ब्राह्मण विधायक पहुंचे थे।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में कहा गया कि अलग-अलग जाति के खांचों में कई जातियां तो पॉवरफुल हो गईं, लेकिन ब्राह्मण पिछड़ गए हैं। जाति की राजनीति में ब्राह्मणों की आवाज दबती जा रही है। उन्हें अनसुना कर दिया गया है। ब्राह्मणों के मुद्दों को उठाने जोर-शोर से उठाने के लिए यह जुटान हुई है।

ब्राह्मण विधायकों ने इसे सहभोज नाम दिया है। यूपी विधानसभा में इस समय 52 ब्राह्मण विधायक हैं, इनमें 46 भाजपा के हैं। विधानमंडल के मानसून सत्र में ठाकुर समाज के विधायकों ने कुटुंब परिवार के नाम पर बैठक कर तेवर दिखाए थे। अब ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने भाजपा और योगी सरकार की चुनौती बढ़ा दी है।

कौन-कौन सहभोज में शामिल हुआ, फोटो देखिए

बैठक में सीएम योगी के पूर्व मीडिया सलाहकार एवं देवरिया विधायक डॉक्टर शलभ मणि त्रिपाठी, पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा के बेटे और एमएलसी साकेत मिश्रा, नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी, तरबगंज से विधायक प्रेमनारायण पांडेय, मिर्जापुर से विधायक रत्नाकर मिश्रा, बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी, बदलापुर से भाजपा विधायक रमेश मिश्रा, खलीलाबाद से विधायक अंकुर राज तिवारी और मेहनौन से भाजपा विनय द्विवेदी सहित अन्य विधायक बैठक में शामिल हुए।

सुनील भराला नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे

भाजपा के ब्राह्मण नेता सुनील भराला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन दाखिल करने पहुंच गए थे। उनके पास पर्याप्त संख्या में ब्राह्मण और अन्य जातियों के प्रस्तावक भी थे। जानकारों का मानना है कि भराला ने ब्राह्मण समाज को मौका नहीं मिलने से नाराज होने के बाद ही नामांकन दाखिल करने का निर्णय किया था। पार्टी के कई ब्राह्मण नेताओं ने उन्हें समर्थन भी दिया था। लेकिन एन वक्त पर पार्टी नेतृत्व के दखल के कारण उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया।

ब्राह्मणों में बढ़ रही है भाजपा से नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- ब्राह्मणों में भाजपा से नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ब्राह्मण समाज भाजपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है। जब यूपी में भाजपा तीसरे चौथे नंबर की पार्टी थी, तब भी समाज का अधिकांश वोट भाजपा को मिलता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों से समाज उपेक्षित महसूस कर रहा है। समाज के विधायक भी संगठन और सरकार में उनकी सुनवाई नहीं होने की शिकायतें करते रहे हैं।

इटावा कांड के बाद ज्यादा मुखर

ब्राह्मणों में इटावा कथावाचक चोटी कांड के बाद गुस्सा और बढ़ा है। सूबे में ब्राह्मण बनाम यादव संघर्ष ने जोर पकड़ा तो कोई ब्राह्मण नेता वहां नहीं पहुंचा। जबकि अखिलेश यादव ने कथावाचक और उनके सहयोगी को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया था।

सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ कैंपेनिंग भी हुई। ब्राह्मण एकता नाम के फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट लिखी गई। जिसमें कहा गया है कि यूपी के 51 ब्राह्मण विधायकों पर थू है, कोई भी विधायक इटावा में ब्राह्मण समाज के लिए खड़ा नहीं हुआ।

वहीं, परशुराम सेना संघ ने आरोप लगाया कि ब्राह्मणों को सभी पार्टियां कमजोर करने में जुटी हुई हैं। 2027 में सभी को सबक सिखाया जाएगा।

ब्राह्मण वोट बैंक यूपी के हर जिले में

  • ब्राह्मण वोट बैंक यूपी के लगभग हर जिले में है। हालांकि, पूर्वांचल यानी फैजाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, गाजीपुर, गोंडा, बस्ती, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, जौनपुर जैसे जिले ब्राह्मण वोट बैंक का गढ़ माने जाते हैं।
  • मध्य यूपी यानी कानपुर, रायबरेली, फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव, लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, हरदोई, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अमेठी आदि जिले भी इस वोट बैंक का गढ़ हैं।
  • इसी तरह बुंदेलखंड जोन यानी हमीरपुर, हरदोई, जालौन, झांसी, चित्रकूट, ललितपुर, बांदा आदि इलाके ब्राह्मण वोटर्स का केंद्र हैं।
  • राजनीति के जानकारों का कहना है कि ब्राह्मण वोटर्स की लगभग 30 जिलों में महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर हम एक जिले की औसतन पांच विधानसभा मान लें तो इनकी संख्या 150 तक पहुंच जाती है।

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 89 फीसदी वोट मिले

भाजपा को 2022 यूपी चुनाव में 89% ब्राह्मणों ने दिए वोट दिए थे। ब्राह्मण सियासत के जानकार कहते हैं- ब्राह्मण वोकल होता है और अपने आसपास के दस वोटरों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी पार्टियां ब्राह्मणों के ताकत को समझती हैं।

भले ही ब्राह्मणों की संख्या यूपी में 11-12 प्रतिशत हो, लेकिन दमदारी से अपनी बात रखने की वजह से वह जहां भी रहे हैं, प्रभावशाली रहते हैं। यही वजह है कि आजादी के बाद से 1989 तक यूपी को छह ब्राह्मण मुख्यमंत्री मिले।

2007 में ब्राह्मण दलित गठजोड़ से ही बसपा पूर्ण बहुमत में सत्ता में आ पाई थी। उस वक्त बीएसपी प्रमुख मायावती ने ब्राह्मण और दलित की सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बनाया था। 80 से 90 फीसदी तक ब्राह्मण बसपा के साथ जुड़ गए थे।

दलितों की पार्टी कही जाने वाली बसपा में सतीश चंद्र मिश्रा को दूसरे नंबर का दर्जा दे दिया गया। आरोप लगते हैं कि 2009 में बीएसपी सरकार में तमाम लोगों पर एससी-एसटी के मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें ब्राह्मण नाराज हो गए और वह 2012 के विधानसभा चुनावों में एसपी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ आ गए। 2017 में उन्होंने बीजेपी का साथ दिया और उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद की। विधानसभा में बीजेपी के 46 ब्राह्मण विधायक जीतकर पहुंचे।

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