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अटल जी को ईसा मसीह बनाने की मुहिम !

अटल जी को ईसा मसीह बनाने की मुहिम

जब हम बच्चे थे तब से 25 दिसंबर की तारीख हमारे लिए ‘ बडा दिन ‘होता रहा है. लेकिन इस साल ग्वालियर में बडा दिन छोटी सोच के लोगों के हत्थे चढ गया. क्योंकि प्रशासन ने अघोषित रूप से शहर मे बडे दिन पर आधा कर्फ्यू सा लगा दिया है और अनेक स्कलों में आज छुट्टी रद्द कर दी गई है,क्योंकि सरकार को बडे आदमी यानि भाजपा के पितृ पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी बाजपेयी का जन्मदिन धूमधाम से मनाना है और केंद्रीय गृज्हमंत्री अमित शाह साहब भी आज ग्वालियर आए हैं.
अटल जी हमारे शहर के सपूत थे. वे 25 दिसंबर को जन्मे थे किंतु उन्होने अपने जीते जी कभी भी अपना जन्मदिन मनाने या मनवाने के लिए बडे दिन की बलि नहीं ली. बडा दिन क्रिसमस का त्यौहार है. पूरी दुनिया में मनाया जाता है ईसा मसीह के जन्मदिन के तौर पर. ग्वालियर में भी मनाया जाता था. आज के दिन शासकीय अवकाश भी होता था. लेकिन 2025 में मप्र के ग्वालियर शहर में बडे दिन पर शहर को पंगु बनाकर एक नया इतिहास लिखा गया.
दर असल इस फैसले के पीछे वे छोटे दिल के या छोटी मानसिकता के लोग हैं जो सर्वधर्म समभाव में यकीन नहीं रखते. या उनका ये यकीन तोड दिया गया है. इरादतन तोड दिया है. भक्तो की फौज पिछले कुछ दिनों से एक अभियान चला रही है जिसमें अभिभावक अपने बच्चों के स्कूल संचालकों से अपील कर रहे हैं कि क्रिसमस पर उनके बच्चों को लाल टोपी पहनाकर ईसाई गीत न गवाये जाएं. शहर के कुछ स्कलों में आज ग्वालियर में बडे दिन का अवकाश रद्द करने के पीछे भी यही मानसिकता साफ-साफ नजर आ रही है.
मैं तो अब बच्चा नहीं रहा लेकिन मेरे बच्चों के बच्चे बडे दिन की छुट्टी रद्द करने को लेकर परेशान हैं, सवाल कर रहे हैं. मेरी मजबूरी है कि मैं बच्चों से झूठ नहीं बोल सकता इसलिए मैं उन्हे बता रहा हूँ कि ये सब हमारी सरकार, की संकीर्ण मानसिकता की वजह से प्रेरित मौखिक आदेश है. सरकार और प्रशासन मिलकर ईसा मसीह के ऊपर भाजपा के ईसा मसीह माननीय अटल बिहारी बाजपेयी को स्थापित कर देना चाहती है. मुझे लगता है कि इस साल ग्वालियर के तमाम स्कूलों में छुट्टी रद्द की है, मुमकिन है कि अगले साल इस छुट्टी को केंद्र और राज्य सरकार की आधिकारिक छुट्टी में से हटा दिया जाए.
मैं माननीय अटल बिहारी बाजपेयी को तब से जानता हूँ, जब वे विपक्ष में थे. आपातकाल के बाद पहली बार जनता पार्टी की साझा सरकार में विदेश मंत्री बने थे. प्रधानमंत्री तो वे बहुत बाद में बने. मैने उनकी अध्यक्षता और मुख्य आतिथ्य में अनेक कवि गोष्ठियों में कविता पाठ किया है. पत्रकार के रुप में वार्ताएं की हैं. मुझे पूरा यकीन है कि यदि वे जीवित होते तो अपना जन्मदिन मनाने के लिए बडे दिन पर स्कलों में छुट्टी रद्द करने के फैसले पर बिफर जाते. आंखें नचाकर कहते-‘नहीं.. नहीं, ये उचित नहीं है. मै ईसा मसीह से बडा ईसा मसीह नहीं हूँ ‘.
भाजपा में कूढमगज लोगों की संख्या लगातार बढ रही है. अटल जी एक हैं लेकिन उनके अनुयायियों में एका नहीं है. भाजपा नगर निगम पर अटल बिहारी के जन्मदिन का भार डालकर अटल जी के नाम पर लखटकिया पुरस्कार बांटती है. दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र अटल जी के नाम पर अलग मंच सजाते हैं. अटल जी को लेकर एक प्रतिस्पर्धा चल रही है. मजे की बात ये है कि इस प्रतिस्पर्धा में अटल जी के परिजन शामिल नही हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री मंत्री माननीय अटल जी के जन्मदिन पर पहली बार देश के गृहमंत्री अमित शाह साहब ग्वालियर में हैं, इसलिए प्रदेश की पूरी भाजपा, पौनी सरकार ग्वालियर में हैं. आज ही इन्वेस्टर मीट अभ्युदय का आयोजन किया गया है. अमित जी अटल जी के पुसतैनी घर भी माथा टेकने जा रहे हैं. अच्छी बात है. मै सुझाव देना चाहूंगा कि सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ बनाने के अपने फैसले को रद्द कर अटल जी के पैतृक निवास को देश का सेवातीर्थ घोषित करे.
अटल जी का मैं भी मुरीद रहा. असहमतियों के बावजूद रहा. लेकिन मुझे याद हैकि अटल जी को पराजय का दंश देकर महल के सामने बिछने वाला ग्वालियर ही तो है. इस शहर में अटल जी का नागरिक सम्मान करने की हिम्मत नहीं हुई थी. वही ग्वालियर अब उन्हे ईसा मसीह बनाकर 20 करोड की लागत का अटल स्मारक बना रहा है. अटल जी किसी भी छुट्टी या स्मारक के मोहताज नहीं रहे. उनका व्यक्तित्व बहुत बडा है. उनके जन्मदिन पर मैं उन्हें प्रणाम करते हुए बडे दिन की छुट्टी रद्द करने के अविवेकपूर्ण सरकारी फैसले पर खेद व्यक्त करता हूँ.

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