गृह मंत्री अमित शाह कई बार दोहरा चुके हैं कि नक्सलवाद के नासूर को 31 मार्च, 2026 तक जड़ से मिटा दिया जाएगा। 2025 इस लिहाज से निर्णायक साल साबित हुआ। सुरक्षाबलों ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूती देते हुए कई बड़े नक्सलियों को ढेर किया। सरकार की आत्मसमर्पण नीति ने वर्षों से उग्रवाद की राह पर चलने वालों को हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
दशकों तक दहशत का पर्याय बने रहे वामपंथी उग्रवाद पर निर्णायक प्रहार का ही नतीजा है कि 2013 तक 182 जिलों में फैला लाल आतंकवाद अब केवल 11 जिलों तक सिमट चुका है। नक्सलवाद के खिलाफ हासिल उपलब्धियां केवल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही मायने नहीं रखती हैं बल्कि इसने दूरदराज के इलाकों तक विकास की रोशनी भी पहुंचाई है। अब ऐसे इलाकों में स्कूल, अस्पताल नजर आने लगे हैं जहां पहले नक्सलियों की दहशत थी। दशकों तक वामपंथी उग्रवाद ने राज्य की क्षमता को कमजोर किया, जनजीवन संकट में डाला और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास को बाधित किया। इसके बावजूद भारत ने साबित कर दिया कि स्थायी राजनीतिक संकल्प और संस्थागत समन्वय से चिरस्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले तीन महीनों में नक्सल मुक्त भारत की दिशा में पूरी मजबूती से कदम बढ़ा रही है।