इंदौर में पानी से 13 मौतें ….जिम्मेदारों पर हत्या का केस क्यों नहीं?
जो पानी जिंदगी देता है…वो ही मौत बन गया। क्योंकि सरकारी सिस्टम ने उसमें ‘जहर’ घोल दिया था। नलों के जरिए उसे इंदौर के भागीरथपुरा में घर-घर तक पहुंचा दिया। फिर शुरू हुई एक त्रासदी… एक के बाद एक मौतें। पिछले 4 दिन से घरों में लाशें पहुंच रही हैं। अब तक 13 जानें जा चुकी हैं। 150 से ज्यादा लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक स्वच्छता अभियान इस सिस्टम के लिए भी चले
देश का सबसे स्वच्छ शहर और गंदे पानी से मौतें… इसे बर्दाश्त कैसे कर पा रहे हैं? मन नहीं कचोटता? शर्म नहीं आती? और उस पर महापौर की ये स्वीकारोक्ति कि शिकायत पहले से मिल रही थी। अफसरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। अरे हमें इससे क्या लेना-देना? इंदौर के लिए ये त्रासदी है।
भागीरथपुरा का हर घर बीमार है। डर लग रहा है… पता नहीं कब कहां से फिर किसी मौत की खबर न आ जाए। अस्पतालों में लोग तड़प रहे हैं। स्वच्छ शहर का गंदा सिस्टम देखिए- लोगों को शौचालय वाला पानी पिला दिया।
ये आपके सपनों के शहर की हालत है मुख्यमंत्रीजी। प्रदेश के सबसे सीनियर और अनुभवी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विधानसभा क्षेत्र है। पानी वाला विभाग संभालने वाले मंत्री तुलसी सिलावट का जिला है। क्या ये सिस्टम की बेशर्मी आपमें से किसी को नहीं कचोट रही? लोगों का दर्द नहीं दिख रहा? कोई पिता को खो चुका, किसी की पत्नी नहीं रही। किसी का बच्चा जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है।
इतना सब देखने के बाद भी छोटे-छोटे अफसरों को सिर्फ सस्पेंड कर देने भर से इंसाफ हो जाएगा? 2-2 लाख की राहत उन जिंदगियों की भरपाई कर पाएगी? अब भी सबकुछ एक-दूसरे पर ढोला जा रहा है। आइए आपको इस बेशर्म और बेरहम सिस्टम की एक-एक करतूत से रूबरू करवाते हैं-
- पहली मौत 26 दिसंबर को हो चुकी थी, तब भी नगर निगम, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग ने कुछ नहीं किया।
- महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि 2024 से शिकायतें थीं। पर खुद कुछ नहीं करवा पाए।
- 4 महीने पहले टेंडर जारी हो गया… लेकिन निगम काम शुरू नहीं करवा सका।
- जिस पार्षद कमल वाघेला के पास इस वार्ड की जिम्मेदारी है, वो खुद बेखबर रहे। 4 महीने की शिकायतें, लगातार बीमार लोगों की सूचना, मौतें…सब होता रहा और वो अनजान रहे।
- जब भागीरथपुरा में मौतें हो रही थीं, लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय का यहां के पार्षद का झूला झूलते हुए वीडियो सामने आ रहा है। जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा आयोजन में खाना परोस रहे हैं।
- 8 मौतें होने के बाद भी जिम्मेदार आंकड़े छिपा रहे थे। कभी 1 तो कभी 3 मौतें बताई, गंदे पानी के बजाय कार्डियक अरेस्ट बताते रहे…ऐसा क्यों?


आज भागीरथपुरा है…कल किसी और इलाके का इंतजार है?
इन मौतों, बीमारियों और जिम्मेदारों की करतूतों के बीच सवाल सिर्फ एक ही है- स्वच्छता सर्वे में नंबर लाने वाला शहर अगर अपने नागरिकों को सुरक्षित पानी तक नहीं दे पा रहा, तो यह पूरे स्वच्छ मॉडल पर सवाल है। यह गंदगी सिर्फ नालियों में नहीं है, यह प्रशासनिक सोच में भरी हुई है।
आज भागीरथपुरा है, कल विजय नगर, परसों कोई और इलाका। अगर जिम्मेदारी तय नहीं हुई, अगर बड़े अफसरों से जवाब नहीं मांगा गया तो अगली मौत भी डायरिया कहलाएगी और सिस्टम फिर बच निकलेगा।
यह हादसा नहीं, हत्या है…
नलों से पानी की जगह मौत आ रही थी। ये जानकर दी गई मौत जैसा ही है। किसी ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया। तो क्यों बख्शा जा रहा है ऐसे जिम्मेदारों को? इसे हादसा कतई न मानें…ये हत्या है। और जिम्मेदारी तय कर एक-एक पर हत्या का केस होना चाहिए। तभी इंदौर बच सकेगा। वरना… सबसे स्वच्छ शहर होना सिर्फ एक खोखला तमगा रह जाएगा। हमारे सबसे साफ शहर को दागदार बनाने वाले इस बेशर्म और बेरहम सिस्टम पर आपकी बड़ी सफाई का इंतजार रहेगा।

